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तड़पती रही मासूम बच्ची, पिता लगाता रहा गुहार, नहीं खुले दरवाजे

तड़पती रही मासूम बच्ची, पिता लगाता रहा गुहार, नहीं खुले दरवाजे

मामला कमलाराजा अस्पताल के बाल एवं शिशु रोग विभाग का

ग्वालियर|
मरीजों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग प्रयास कर रहा है, लेकिन जिम्मेदार लोगों की लापरवाही मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रही है। इसी के चलते शनिवार को कमलाराजा अस्पताल के बाल एवं शिशु रोग विभाग में ऐसा ही एक मामला सामने आया। जिसमें एक पिता अपनी मासूम बच्ची को तपड़ता देख उसे दिखाने के लिए स्टॉफ नर्स के कमरे को खट-खटाता रहा, लेकिन सब इतनी गहरी नींद में थे कि कोई बाहर नहीं आया। जिस कारण पिता के सामने ही उसकी मासूम बच्ची ने दम तोड़ दिया।

वहीं अब इस मामले में अस्पताल प्रबंधन जांच कराने की बात कह रहा है। दरअसल मरीमाता मंदिर के पास रहने वाले हरीसिंह (बंटी) की छह वर्ष की बेटी वीरा को बुखार आ रहा था। जिसके उपचार के लिए उन्होंने अपनी बेटी को विगत दस दिन पहले कमलाराजा अस्पताल के बाल एवं शिशु रोग विभाग में भर्ती कराया था। हरी सिंह ने रोते हुए बताया कि शनिवार को सुबह करीब 4 बजे उसकी बेटी को नर्स द्वारा इंजेक्शन लगाया गया, जिसके करीब 1 घंटे बाद से ही वीरा की तबियत बिगड़ने लगी। जिसे देख वह दौड़े-दौड़े नर्सिंग स्टॉफ के ड्यूटी रूम में पहुंचे तो वहां अंदर से गेट लगे हुए थे। हरीसिंह का आरोप है कि उन्होंने बच्ची को देखने के लिए कई बार गेट खट-खटाए, लेकिन अंदर सब सो रहे थे। करीब 40 मिनट बाद चिकित्सक और नर्स आए और उन्होंने वीरा को मृत घोषित कर दिया। बच्ची की मौत के बाद परिजन ने हंगामा करते हुए आरोप लगाए कि अगर समय रहते स्टॉफ आ जाता तो वीरा नहीं मरती। हंगामे की सूचना मिलने के करीब 45 मिनट बाद सीनियर चिकित्सक भी वहां पहुंचे और परिजन से कहा कि इलाज में कोई लापरवाही नहीं हुई है, फिर भी यदि उन्हें कोई शिकायत है तो शव का पोस्टमार्टम करवा देते हैं। लेकिन परिजन पोस्टमार्टम के लिए तैयार नहीं हुए और अधीक्षक से फोन पर शिकायत करने के बाद शव को लेकर चले गए। इस मामले को लेकर हरी सिंह ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. जे.एस. सिकरवार से भी शिकायत दर्ज कराई है।
इनका कहना है

‘‘परिजन का आरोप है कि स्टॉफ सो रहा था, जिसकी जांच के लिए विभागाध्यक्ष डॉ. अजय गौड़ की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर दी गई है। जांच में जो भी दोषी होगा उस पर सख्त कार्रवाई होगी। ’’

डॉ. जेएस सिकरवार
अधीक्षक, जयारोग्य अस्पताल

Updated : 2018-01-07T05:30:00+05:30
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