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ब्रिटेन संसद में भी है भैय्या और भतीजावाद

ब्रिटेन संसद में भी है भैय्या और भतीजावाद

लंदन। भाई भतीजावाद सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन में भी प्रचलित है। यहां हर पांच में से एक ब्रिटिश सांसद करदाताओं के पैसे पर अपने रिश्तेदार को नौकरी देता है। यह छूट केवल पहली बार निर्वाचित सांसदों के लिए नहीं है।

बीबीसी के अनुसार, पिछले 8 जून को हुए चुनाव में कुल 650 में से 589 सांसद ऐसे हैं जो दोबारा चुने गए हैं। इनमें से 122 ने सांसदों के वित्तीय हितों का लेखा-जोखा रखने वाले 'रजिस्टर ऑफ मेंबर्स फाइनेंशियल इंटरेस्ट्स' में रिश्तेदारों को नौकरी देने की बात स्वीकार की है। लेकिन पहली बार चुने गए 61 सांसदों को ऐसा करने की इजाज़त नहीं दी गई।

रिश्तेदारों को नौकरी देने के खिलाफ अभियान चला रहे लोगों की मांग है कि सभी सांसदों के लिए यह व्यवस्था खत्म करने की एक स्पष्ट आखिरी तारीख तय होनी चाहिए। संसद की गतिविधियों पर निगरानी रखने वाली संस्था 'इंडिपेंडेंट पार्लियामेंट्री स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी' (इप्सा) ने मार्च में नए सांसदों के लिए इस पर प्रतिबंध लगा दिया था।

संस्था का कहना था कि परिवार के सदस्यों को नौकरी देना रोजगार की आधुनिक परंपरा के अनुकूल नहीं है और अगली संसद में नए सांसदों को इसकी इजाज़त नहीं होगी। हालांकि उस वक़्त के सांसदों को इसकी इजाज़त दी गई कि वह पहले से नौकरी कर रहे रिश्तेदारों की नौकरियां जारी रख सकें।

उल्लेखनीय है कि रिश्तेदारों को नौकरी देने में प्रधानमंत्री टेरीज़ा मे की कंज़र्वेटिव पार्टी के सांसद सबसे आगे हैं। इसके बाद लेबर पार्टी और फिर डीयूपी का स्थान है।

रजिस्टर ऑफ मेंबर्स फाइनेंशियल इंटरेस्ट्स के अनुसार, सांसदों ने सबसे ज़्यादा नौकरियां पत्नियों को दी हैं। दूसरा नंबर पति और तीसरा पार्टनर का है। इसके बाद क्रमश: बेटियों, बहनों, बेटों, भाइयों, भतीजियों, पिताओं और मांओं को नौकरियां दी गई हैं।

Updated : 2017-08-01T05:30:00+05:30
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