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भारतीय रेल : खाना बनते देख लो तो खुद ही नहीं खा पाओगे

भारतीय रेल : खाना बनते देख लो तो खुद ही नहीं खा पाओगे
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* कहीं दूषित पानी तो कहीं शौचालय किनारे बन रहा था खाना
* कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि रेलवे का खाना इंसानों के लायक नहीं

ग्वालियर। संसद में ट्रेन के खाने को लेकर सीएजी की रिपोर्ट पर सवाल ऐसे ही नहीं उठे हैं। ट्रेनों में खाने की शिकायतें आम हैं। कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होने पर ट्रेन यात्री लुट रहे हैं और दूषित खाना खाने को मजबूर हैं। ट्रेन में पनीर के एक टुकड़े के लिए 120 रुपये वसूले जाते हैं।

ट्रेनों में खानपान की पड़ताल के लिए शनिवार को स्वदेश ने ग्वालियर से गुजरने वाली ट्रेनों की पेंट्रीकार की स्थिति देखी। यहां जो कुछ देखने को मिला, उससे तो खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से भरोसा ही उठ गया। पेंट्रीकार में खाने की शुद्धता से खिलवाड़ किया जा रहा था। इस नजारे को संवाददाता ने अपने कैमरे में कैद कर लिया। यहां पड़े चूल्हे पूरी तरह से काले हो चुके थे, जिन पर काफी गंदगी जमी हुई थी। इसके अलावा आगरा से चढ़ाई गई बर्फ की सिल्ली शौचालय के पास पड़ी थी।

शनिवार को निजामुद्दीन से विशाखापट्नम की ओर जाने वाली समता एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 30 मिनट की देरी से दोपहर 1.44 मिनट पर ग्वालियर पहुंची। ट्रेन के ग्वालियर पहुंचते ही संवाददाता जब पेंट्रीकार में पहुंचा तो वहां का नजारा ही कुछ ओर था। पेंट्रीकार का मैनेजर मोबाइल कैमरे से बचते हुए वहां से भाग निकला। पेंट्रीकार में हर तरफ गंदगी ही गंदगी नजर आ रही थी। हालत यह थी कि एक दिन पहले कटे आलुओं से यात्रियों के लिए सब्जी बनाने की तैयारी की जा रही थी। इस बारे में जब मैनेजर से पूछा तो उसने कहा कि जगह नहीं है तो क्या करें, सब्जियों को काट कर रख लेते हैं।

खुले में पड़े थे आलू के मसाले, गंदगी में रखी सब्जियां

समता एक्सप्रेस की पेंट्रीकार में कर्मचारी अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। शनिवार को पेंट्रीकार में आलू का मसाला खुले में रखा हुआ था, और उन पर मक्खियां भिन- भिना रही थीं, वहीं कटी हुई सब्जियां शौचालय के पास रखी हुई थीं। यहां तक कि बैठने वाली सीटों पर खुले में सब्जियां रखी गई थीं।

15 रुपए की पानी की बोतल 20 में

समता एक्सप्रेस ट्रेन में यात्रियों ने बताया कि पानी की जो बोतल 15 रुपए की है, उसे 20 रुपए में बेचा जा रहा है। ब्रेकफास्ट, डिनर व लंच निर्धारित रेट से ज्यादा रेट पर दिया जा रहा है।

सीएजी की रिपोर्ट में हुआ था खुलासा

सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक,सीधे नलों से पानी लिया जाता है। डस्ट बिन्स खुली पड़ी रहती हैं और इन्हें धोया भी नहीं जाता। खाने का सामान भी ढंककर नहीं रखा जाता। इसके ऊपर मक्खियां, मच्छर, धूल, चूहे और कॉकरोच पाए गए। परांठों सहित कई खाद्य सामग्री कम मात्रा में यात्रियों को दी जाती हैं और उनकी गुणवत्ता बहुत खराब होती है। कई खाद्य सामग्री में फफूंद लगी रहती हैं। उल्लेखनीय है दो वर्ष पहले कांति नगर शताब्दी एक्सप्रेस में अधिकारियों ने छापामार कार्रवाई की थी। जिसमें कई अनियमितताएं पाई गई थीं।

खाद्य पदार्थों के नहीं लिए जाते नमूने

खाद्य पदार्थ की चेकिंग करने के लिए रेलवे ने मुख्य खाद्य अधिकारी तैनात किए हैं। बावजूद इसके खाद्य पदार्थों की जांच करने के लिए नमूना तक नहीं लिया जाता। खुले खाद्य पदार्थों के बजाय पॉकेट बंद पदार्थो का नमूना लेकर औपचारिकता निभा देते हैं।

मंगला एक्सप्रेस की पेंट्रीकार भी सबसे गंदी

शुक्रवार को जब मंगला एक्सप्रेस की पेंट्रीकार देखी तो वहां भी गंदगी का अंबार लगा हुआ था। इस ट्रेन में कई बार अधिकारी छापामार कार्रवाई कर चुके हैं, लेकिन उसके बाद भी यहां पर सबसे ज्यादा गंदगी का अंबार लगा हुआ है। हैरानी की बात तो यह है कि गंदगी में बनने वाला खाना भी यात्रियों को बड़ी आसानी से परोसा जा रहा है।

ठेकेदार फायदे के लिए करते हैं मनमानी

रेल प्रशासन खान-पान की व्यवस्था संभालने के बजाय ठेकेदार को सौंप देता है। इसके अलावा अवैध वेंडरों से मोटी रकम वसूल कर ट्रेनों में खाना बेचने की छूट दे दी जाती है।

सीएजी की रिपोर्ट में हुआ था खुलासा

सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक,सीधे नलों से पानी लिया जाता है। डस्ट बिन्स खुली पड़ी रहती हैं और इन्हें धोया भी नहीं जाता। खाने का सामान भी ढंककर नहीं रखा जाता। इसके ऊपर मक्खियां, मच्छर, धूल, चूहे और कॉकरोच पाए गए। परांठों सहित कई खाद्य सामग्री कम मात्रा में यात्रियों को दी जाती हैं और उनकी गुणवत्ता बहुत खराब होती है। कई खाद्य सामग्री में फफूंद लगी रहती हैं। उल्लेखनीय है दो वर्ष पहले कांति नगर शताब्दी एक्सप्रेस में अधिकारियों ने छापामार कार्रवाई की थी। जिसमें कई अनियमितताएं पाई गई थीं।

इनका कहना है

‘‘रेलवे हमेशा यात्रियों को बेहतर सुविधा देने का कार्य कर रहा है। आईआरसीटीसी ने अपनी नई पॉलिसी में काफी बदलाव किए हंै और पेंट्रीकारों में रेलवे अधिकारियों द्वारा छापामार कार्रवाई की जाती है और आगे भी कार्रवाई की जाएगी।’’

मनोज कुमार सिंह

पीआरओ, झांसी

Updated : 2017-07-23T05:30:00+05:30
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