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बोर्ड परीक्षा से चिंतितों के लिए जारी की गाइडलाइन

आगरा। बोर्ड परीक्षा जैसे-जैसे नजदीक आ रही हैं, बच्चों के साथ अभिभावक भी चिंतित दिखाई दे रहे हैं। बच्चों का रिजल्ट अभिभावकों के मैनेजमेंट और उनकी मेहनत का स्कोर कार्ड बनने जा रहा है। इस चिंता को देखते हुए सीबीएसई ने अभिभावकों के लिए भी गाइडलाइन जारी कर दी है।

इसमें बताया गया है कि अभिभावकों को परीक्षा के दौरान बच्चों के साथ किस तरह का व्यवहार करना है। आमतौर पर अभिभावक अपने बच्चे से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन चाहते हैं। परीक्षा में कम नंबर लाने पर बच्चे से ज्यादा वे निराश हो जाते हैं। ऐसा करना गलत है। अभिभावक को बच्चों को सहज रखने से पहले खुद सहज होना पड़ेगा। उन्हें एग्जाम को न खुद पर हावी होने देना है न बच्चों को समक्ष चिंता का प्रदर्शन करना है।

जारी किया टोल फ्री नंबर
परीक्षा स्ट्रैस दूर करने के लिए काउंसलिंग चाहने वाले स्टूडेंट टोल फ्री नंबर 1800118004 डायल कर सकते हैं। सुबह आठ बजे से रात 10 बजे तक यह नंबर खुला रहेगा। तनाव और परीक्षा संबंधी गंभीर परेशानी होने पर विशेषज्ञों की टीम बच्चों की काउंसलिंग करेगी। सामान्य सवालों का जवाब ऑपरेटर देंगे। इसके लिए सीबीएसई ने विभिन्न स्कूलों के 90 प्रिंसिपल व विशेषज्ञ नियुक्त किए हैं।

ये हैं अभिभावकों के लिए गाइडलाइन
बच्चे के भीतर आत्म अनुशासन, आत्म विश्वास, जीतने की अभिलाषा जगाएं। कम नंबर आने पर बच्चों को हतोत्साहित करने के बजाय उनका विश्वास बढ़ाएं। उन्हें बताएं कि वे सब कुछ कर सकते हैं। अपनी चिंता बच्चों पर जाहिर न होने दें। बच्चे के लिए निर्धारित किए जाने वाला लक्ष्य वास्तविक होना चाहिए। बच्चे की क्षमता को देखकर ही उसके लिए लक्ष्य निर्धारित करें।पढ़ाई और स्कूल के मुद्दे को घर में होने वाले झगड़े में शामिल न करें। बार-बार पढऩे के लिए कहने से अच्छा है कि उसका शेड्यूल बनाएं और उसी के अनुसार पढ़ाई करने के लिए कहें।पुरानी गलतियों और असफलताओं को बार-बार बच्चे के सामने न दोहराएं।बच्चे के साथ मजाक भी करें। इससे मूड हल्का होता है और वह टेंशन फ्री रहता है।बच्चे का विश्वास जीतने की कोशिश करें। उसकी समस्याओं पर उससे बात करें और समाधान ढूंढने की कोशिश करें।परीक्षा पर ही दुनिया केंद्रित नहीं है। हर बच्चे से सर्वश्रेष्ठ की उम्मीद की आशा नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करना हर किसी के लिए संभव नहीं है।दूसरों के सामने उसकी आलोचना न करें।

ऐसे दूर होगा छात्र-छात्राओं का स्ट्रैस
यह पता लगाएं कि आप कितनी देर तक एकाग्र होकर पढ़ सकते हैं। उसी के आधार पर शेड्यूल बनाएं। ब्रेक देकर पढ़ें। घर में नॉर्मल रुटीन फॉलो करें। अगर चिंता अधिक है तो अपने शिक्षकों और काउंसलर से बात करें। रियलस्टिक प्लान बनाएं। क्या पहले पढऩा है, क्या बाद में..इसका निर्धारण खुद करें। परीक्षा और रिजल्ट को लेकर बुरे विचार मन में न लाएं। जो भी याद किया है उसे काम करते समय मन ही मन दोहराते रहें। रिवीजन के बिना याद हुआ आसानी से भूल जाते हैं। जो चीज आपको पसंद है उसके लिए समय निकालें। फ्रेंड्स के साथ बाहर जाना, टीवी पर पसंदीदा धारावाहिक देखना, रिवीजन खत्म होने के बाद म्यूजिक सुनना, खेलना जारी रखें। एग्जाम हॉल में प्रवेश से पहले पूरी तरह रिलेक्स्ड हो जाएं।

सुबह का नाश्ता जरूर करें
बोर्ड ने स्ट्रैस मैनेजमेंट के साथ खान-पान को लेकर भी टिप्स जारी की है। बोर्ड का कहना है कि विद्यार्थी नाश्ता करना न छोड़ें। नाश्ता न करने पर पढ़ाई पर ध्यान लगाने में दिक्कत होती है। फिंगर चिप्स, बर्गर के बजाय दलिया, कॉर्न, सेब खाएं।

स्नैक ब्रेक ले सकेंगे डायबिटिक विद्यार्थी
टाइप वन डायबिटीज के शिकार छात्र-छात्राओं को सीबीएसई ने इस बार बड़ी राहत दी है। बोर्ड ने कक्षा दस और बारह की बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले डायबिटिक छात्रों को परीक्षा के बीच में स्नैक ब्रेक लेने की इजाजत दे दी है। टाइप वन डायबिटीज के मरीजों को शुगर कंट्रोल में रखने के लिए हर दिन दो से चार इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। ऐसे छात्रों के खान-पान में बोर्ड ज्यादा अंतराल नहीं रखना चाहता। ऐसा न होने पर उनका शुगर लेवल कम हो जाएगा, जिससे सिर दर्द, बैचेनी, कंफ्यूजन होने लगेगा और छात्र अच्छी तरह परीक्षा नहीं दे पाएंगे। इसका असर उनके रिजल्ट पर पड़ेगा। वर्तमान में देश में चार लाख बच्चे टाइप वन डायबिटीज के शिकार हैं।

Updated : 2017-02-16T05:30:00+05:30
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