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फर्जीवाड़ा: व्यापमं मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद जीआरएमसी के कई छात्रों पर लटकी तलवार

फर्जीवाड़ा: व्यापमं मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद जीआरएमसी के कई छात्रों पर लटकी तलवार
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-महाविद्यालय को चिकित्सा शिक्षा विभाग के पत्र का इंतजार
-वर्ष 2008 से 2012 के दौरान का मामला


ग्वालियर|
व्यापमं फर्जीवाड़ा मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के लगभग एक सैकड़ा से अधिक छात्रों की डिग्रियां खतरे में पड़ गई हैं। इनमें से सात छात्रों को उच्च न्यायालय के आदेश पर नकल के आरोप में महाविद्यालय द्वारा पूर्व में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था। सूत्रों के अनुसार वर्ष 2008 से 2012 के दौरान जिन छात्रों ने एमबीबीएस में प्रवेश लिया था, उनमें से कई छात्रों की डिग्रियां पहले ही निरस्त की जा चुकी हैं, साथ ही कुछ छात्रों को जेल भी भेजा गया था।

जानकारी के अनुसार म.प्र. उच्च न्यायालय द्वारा नकल के आरोप में घिरे छात्रों के प्रवेश रदद् करने के आदेश म.प्र. चिकित्सा शिक्षा विभाग को दिए गए थे। आदेशों का पालन करते हुए गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय प्रबंधन ने संबंधित छात्रों के प्रवेश रदद् कर दिए थे। इस फैसले के खिलाफ छात्र उच्च न्यायालय में गए, जहां से उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी। इस पर छात्रों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी, लेकिन सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने छात्रों की ओर से दायर सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए वर्ष 2008 से 2012 के दौरान हुए प्रवेश को रदद् करने का आदेश दिया है। इस अवधि के चिकित्सा छात्रों में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के वर्ष 2012 के विनोद मेहरा, विवेक शेजवलिया, गुलजीत नायर, परख नायक, वर्ष 2010 के चित्रेश गर्ग, नेहा कैना सहित दो जूनियर चिकित्सकों के नाम सामने आ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद अब गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय को चिकित्सा शिक्षा विभाग के पत्र का इंतजार है। ाहाविद्यालय प्रबंध को पत्र प्राप्त होते ही छात्रों को निष्कासित किया जाएगा। इससे कई छात्रों की धड़कनें बढ़ गई हैं।

सूत्रों के अनुसार व्यापमं फर्जीवाड़े में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के लगभग 143 छात्रों के नाम सामने आए थे, जिनमें से जहां कई छात्रों को जेल भेजा गया था, वहीं कुछ छात्रों के प्रवेश निरस्त कर दिए गए थे। सीबीआई ने अपनी जांच में वर्ष 2008 से 2012 में गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय के ऐसे कई छात्रों के नामों का खुलासा किया था, जिन्होंने एमबीबीएस में फर्जी ढंग से प्रवेश लिए थे। इसके साथ ही महाविद्यालय के छात्र विशाल यादव ने पूछताछ के दौरान खुलासा किया था कि इस फर्जीवाडेÞ में सबसे ज्यादा सॉल्वर्स गजराराजा चिकित्सा महाविद्यलय के थे, जिनमें करीब एक दर्जन चिकित्सा छात्रों के नाम भी एसआईटी को बताए थे, जिनका इस्तेमाल सॉल्वर्स के लिए किया जाता था। उल्लेखनीय है कि व्यापमं फर्जीवाड़ा तब सामने आया था, जब ग्वालियर सहित मध्यप्रदेश के कई चिकित्सा महाविद्यालयों के छात्रों की डिग्रियों और उनके प्रवेश को लेकर उंगलियां उठना शुरू हुई थीं।

पांच-पांच लाख में होते थे चयनित
व्यापमं फर्जीवाड़े में फंसे छात्रों ने पूछताछ के दौरान बताया था कि दलालों द्वारा उनसे सिलेक्शन के नाम पर पांच-पांच लाख रुपए लिए जाते थे।
4 व्यापमं फर्जीवाड़े में फंसे दीपक यादव, विशाल यादव व उनका साथी धमेन्द्र चंदेल को न्यायालय ने करीब दो वर्ष तक जेल में रहने के बाद जमानत दे दी थी।
4वर्ष 2010 के छात्र चित्रेश गर्ग से जब इस संबंध में बात की गई तो उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर हमें आपत्ति है। हमारा पक्ष किसी ने नहीं सुना है।

पीएमटी कांड में पुलिस अधिकारी ने बयान दर्ज कराए
पीएमटी फर्जीवाड़ा में आरोपी गौरव गुप्ता के मामले में विशेष न्यायालय में तत्कालीन पुलिस अधिकारी ने सोमवार को पेश होकर बयान दर्ज कराया कि डॉ.गौरव गुप्ता और पंकज गुप्ता का दाखिला संतोष चौरसिया ने कराया था और इसी बयान पर मामला दर्ज किया गया था। सीबीआई न्यायालय में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आकाश भूरिया ने कहा कि इस मामले में ट्रोमा सेंटर में कार्यरत गौरव गुप्ता और पंकज गुप्ता को एसआईटी ने गिरफ्तार किया था।

हो चुकी हैं कई मौतें
व्यापमं फर्जीवाड़े से जुड़े लगभग 48 लोगों की अब तक मौत हो चुकी है। मरने वालों में व्यापमं घोटाले के आरोपी समेत कई हाईप्रोफाइल नाम शामिल हैं।इन्होंने कहा

अभी महाविद्यालय को छात्रों के प्रवेश निरस्त करने के संबंध में कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। चिकित्सा शिक्षा विभाग से पत्र आने के बाद भी छात्रों के नाम सामने आएंगे।

डॉ. के.पी. रंजन
प्रवक्ता, गजराराजा चिकित्सा महाविद्यालय

Updated : 2017-02-14T05:30:00+05:30
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