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बेहतरीन अभिनेता होने के साथ साहसी निर्माता भी थे शशि कपूर

बेहतरीन अभिनेता होने के साथ साहसी निर्माता भी थे शशि कपूर


मुंबई।
2017 जाते-जाते एक बड़ा दर्द भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को दे गया। साल के आखिरी महीने में हिंदी सिनेमा के लीजेंडरी अभिनेता और थिएटर पर्सनेलिटी शशि कपूर का किरदार दुनिया के रंगमंच को अलविदा कह गया। शशि कपूर का जाना सिनेमा का बहुत बड़ा नुकसान है, जिसकी भरपाई शायद ही हो सके। सिनेमा के आला खानदान कपूर परिवार से ताल्लुक रखने वाले शशि ने अपने करियर में कई यादगार फिल्में दीं, जिनमें विशुद्ध मसाला फिल्मों के अलावा आर्ट सिनेमा के रंग भी देखने को मिलते हैं। शशि बेहतरीन अभिनेता होने के साथ साहसी निमार्ता भी थे, जिन्होंने ऐसे विषयों को अपनी फिल्मों का हिस्सा बनाया, जो अपने दौर में काफी बोल्ड माने गये। नए टैलेंट को मौका देने में भी शशि कपूर हिचकते नहीं थे। शशि कपूर की कुछ चुनिंदा 5 फिल्मों के बहाने उन्हें याद करते हैं, जिनका उन्होंने निर्माण किया...

जुनून

1978 में आयी 'जुनून' को शशि कपूर ने प्रोड्यूस और डायरेक्ट किया था। रस्किन बांड के नॉवल अ फ्लाइट आॅफ पिजंस पर आधारित ये फिल्म 1857 के पहले गदर के आस-पास सेट थी। फिल्म में शशि कपूर की पत्नी जेनिफर केंडल, नसीरुद्दीन शाह और शबाना आजमी मुख्य किरदारों में शामिल थे। इस फिल्म को 3 नेशनल अवॉर्ड मिले, जिनमें बेस्ट फिल्म के लिए भी शामिल था।

36 चौरंगी लेन

1981 में आयी इस फिल्म का निर्देशन अपर्णा सेन ने किया था। बंगाली सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस अपर्णा ने इस फिल्म से डायरेक्टोरियल डेब्यू किया था। फिल्म क्रिटिकली हिट रही। इसमें जेनिफर केंडल, धृतिमान चैटर्जी और देबाश्री रॉय मुख्य किरदारों में थे।

कलयुग

1981 में रिलीज हुई 'कलयुग' को शशि कपूर ने प्रोड्यूस किया था, जबकि इसके डायरेक्टर श्याम बेनेगल थे। एक कॉरपोरेट परिवार के इर्द-गिर्द घूमती फिल्म की कहानी के किरदार महाभारत की तर्ज़ पर बुने गये थे। खुद शशि का किरदार कर्ण पर आधारित था। 'कलयुग' आर्ट और मीनिंगफुल सिनेमा की बेहतरीन मिसाल है।

विजेता

1983 में रिलीज हुई 'विजेता' शशि कपूर के निर्माण में बनी एक और शानदार फिल्म है, जिसका डायरेक्शन गोविंद निहलानी ने किया। एक परिवार की इस कहानी में शशि कपूर, रेखा और उनके बेटे कुणाल कपूर मुख्य किरदारों में शामिल थे।

उत्सव

1984 में आयी 'उत्सव' अपने दौर की बोल्ड फिल्मों में शामिल थी, जिसके निर्माण का जिÞम्मा शशि कपूर सरीखा साहसी निमार्ता ही उठा सकता था। दूसरी शताब्दी में शूद्रका द्वारा लिखित संस्कृत नाटत मृच्छकटिका पर आधारित फिल्म में शेखर सुमन और रेखा ने लीड रोल्स निभाये थे। फिल्म का निर्देशन गिरीश कर्नाड़ ने किया था।

फिल्म आवारा में राजकपूर (जय रुद्) के बचपन का रोल भी शशि ने ही निभाया था

विदेशी लड़की से हुआ प्यार और कर ली शादी

एक समय ऐसा भी था जब शशि कपूर को बॉलिवुड का 'चॉकलेटी हीरो' कहा जाता था। लड़कियों के बीच उनकी अच्छी खासी फैन फॉलोइंग थी। 50 के दशक में शशि अपने पिता के थिएटर से जुड़ गए। इस दौरान भारत और पूर्वी एशिया की यात्रा पर आई बर्तानवी नाटक मंडली शेक्सपियेराना से वह जुड़ गए। यहां उनकी मुलाकात मंडली के संचालक की बेटी जेनिफर केडिल से हुई। शशि को उनसे प्यार हो गया और बाद में दोनों ने शादी कर ली।

ऐसी थी जीवन यात्रा...

शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को कोलकाता में हुआ था। उनका असली नाम बलबीर राज कपूर था। उनकी बचपन से ही ऐक्टर बनने की चाहत थी। शशि के पिता पृथ्वीराज कपूर और भाई राज कपूर व शम्मी कपूर फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने ऐक्टर रहे हैं। शशि के पिता का कहना था कि शशि संघर्ष करें और अपनी मेहनत से ऐक्टर बनें। 40 के दशक में शशि ने अपने करियर की शुरूआत चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में की। उन्होंने कई फिल्मों में राज कपूर के बचपन की भूमिका निभाई।

शुरूआती फिल्में नहीं कर सकीं कमाल

शशि कपूर ने अभिनेता के रूप में करियर की शुरूआत फिल्म 'धर्म पुत्र' से की। यश चोपड़ा की यह फिल्म साल 1961 में आई थी। इसके बाद विमल राय की फिल्म 'प्रेम पत्र' में शशि ने काम किया लेकिन दोनों ही फिल्में कुछ खास कमाल नहीं कर सकीं।

इस फिल्म से बने स्टार

इसके बाद साल 1965 में शशि कपूर की फिल्म 'जब जब फूल खिले' रिलीज हुई। शानदार गीत, संगीत और अभिनय वाली इस फिल्म को जबरदस्त कामयाबी मिली और यहीं से शशि कपूर स्टार बन गए। इसी साल उनकी एक और फिल्म 'वक्त' रिलीज हुई जिसमें उनके साथ बलराज साहनी, राजकुमार और सुनील दत्त जैसे नामी सितारे थे। इसके बाद भी शशि ने अपने अभिनय से दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

अमिताभ बच्चन के साथ की कई फिल्में

शर्मिला टैगोर और नंदा जैसी अभिनेत्री के साथ शशि कपूर की जोड़ी को काफी सराहा गया। इसके अलावा अमिताभ बच्चन के साथ उनकी कई फिल्में आईं जो बॉक्स आॅफिस पर सुपरहिट रहीं। दीवार, त्रिशूल, शान, कभी-कभी, सुहाग, सिलसिला, नमक हलाल जैसी फिल्मों में दोनों की जोड़ी हिट साबित हुई।

इन पुरस्कारों से हुए सम्मानित

90 के दशक में स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण शशि कपूर ने फिल्मों में काम करना बंद कर दिया। शशि ने करीब 200 फिल्मों में काम किया है। शशि कपूर को 2011 में पद्मभूषण और 2015 में फिल्म इंडस्ट्री के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

Updated : 2017-12-05T05:30:00+05:30
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