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भारत अंतरिक्ष अभियान ने छुई नई ऊँचांईयां, सबसे ज्यादा और सबसे भारी उपग्रह किए कक्षा में स्थापित

भारत अंतरिक्ष अभियान ने छुई नई ऊँचांईयां, सबसे ज्यादा और सबसे भारी उपग्रह किए कक्षा में स्थापित
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नई दिल्ली। वर्ष 2017 में भारत ने अंतरिक्ष में नई ऊँचाई छूते हुए दुनियाभर को दिखा दिया कि उपग्रहों को सफलता और सस्ते ढंग से अंतरिक्ष में उसकी कक्षा में स्थापित करना है तो भारत का कोई समकक्ष नहीं है। एक साथ 104 उपग्रह और सबसे भारी उपग्रह को अंतरिक्ष में भेज कर भारत ने एक नये कीर्तिमान स्थापित किये।

वर्तमान में दुनिया के 13 देशों के पास अंतरिक्ष में उपग्रह भेजने की क्षमता है, उनमें से केवल 6 एजेंसियां ऐसी हैं जिनके पास पूर्ण लांच क्षमता है। इनमें कई उपग्रहों को लॉन्च करने और उन्हें पुन: प्राप्त करने, क्रायोजेनिक रॉकेट इंजनों को तैनात करने और बाहर की सीमाओं की जांच करने की क्षमता शामिल है। यह छह एजेंसियां भारत, यूरोप, चीन, जापान, अमेरिका और रूस से जुड़ी हुई हैं।

भारत की अंतरिक्ष एजेंसी भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने इस साल चार लांच किए हालांकि एक लांच असफल रहा। निरंतर नए आयाम छूता भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम वर्ष 2017 में कैसे आगे बढ़ा आइए जानें।

15 फरवरी: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने एक बार में ऑनबोर्ड पीएसएलवी-सी37 पर 104 उपग्रहों को लांच किया। इसमें 6 देशों के उपग्रह थे। इस लांच से इसरो ने रूस के 37 उपग्रह एक साथ भेजने के रिकॉर्ड को तोड़ दिया जिसके लिए उसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित देशवासियों की ओर से ढेरों शुभकामनाएं मिलीं।

05 मई: भारत के जियो सिंक्रोनस सैटेलाइट लांच व्हिकल मार्क-II (जीएसएलवी-एफ09) ने अपने सुनियोजित जियो सिंक्रोनस ट्रांसफर आर्बिट (जीटीओ) में 2230 किलोग्राम दक्षिण एशिया उपग्रह (जीसैट-9) का प्रक्षेपण किया। इस उपग्रह का मकसद दक्षिण एशियाई देशों में दूरसंचार, मौसम, सर्वेक्षण से जुड़ी बेहतर सुविधाएं प्रदान करना था।

यह जीएसएलवी का 11वां प्रक्षेपण था और भारत के अंतरिक्ष प्रक्षेपण स्थल श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र , एसएचएआर (एसडीएससी एसएचएआर) से दूसरे लांच पैड से इसका प्रक्षेपण किया गया। स्वदेशी रूप से विकसित क्रायोजनिक अपरस्टेज को ढोने वाले जीएसएलवी द्वारा अर्जित यह चौथी लगातार सफलता थी।

05 जून: भारत के हैवी लिफ्ट लांच व्हिकल जीएसएलवी एमके-III के पहले डेवलपमेंटल फ्लाइट (जीएसएलवी एमके-III-डी1) का जीसैट-19 उपग्रह के प्रक्षेपण के साथ सतीश धवन अंतरिक्ष केन्‍द्र एसएचएआर, श्रीहरिकोटा से सफलतापूर्वक परिचालन किया गया।

यह जीएसएलवी एमके-III का पहला आर्बिट मिशन था| इसका मुख्‍य रूप से उद्देश्‍य उड़ान के दौरान अपने संपूर्ण रूप से विकसित स्‍वदेशी क्रायोजनिक अपर स्‍टेज व्हिकल का प्रदर्शन व मूल्‍यांकन करना था। लिफ्ट-ऑफ के दौरान 3136 किलोग्राम वजन वाला जीसैट-19 भारतीय भूमि से प्रक्षेपित होने वाला सबसे भारी वजन का उपग्रह बन गया।

23 जून: इसरो ने एक बार में ऑनबोर्ड पीएसएलवी-सी38 पर 31 उपग्रहों का प्रक्षेपण किया। इस लांच के बाद भारत के अंतरिक्ष में कुल 48 उपग्रह हो गए जिन्हें पीएसएलवी से भेजा गया था।

29 जून: जीसैट-17 दो महीनों के दौरान आर्बिट में सफलतापूर्वक पहुंचने वाला तीसरा संचार उपग्रह बन गया। जीसैट-17 को फ्रेंच गुयाना के कोरो से यूरोपीय एरियन-5 लांच व्हिकल द्वारा प्रक्षेपित किया गया।

04 अगस्त: इसरो टेलीमेट्री ट्रैकिंग एंड कमांड नेटवर्क (आईएसटीआरएसी), भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतरिक्ष विभाग, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), राष्‍ट्रीय भौतिकी प्रयोगशाला (एनपीएल) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के बीच नई दिल्‍ली में समझौता पत्र पर हस्‍ताक्षर हुए। समझौते के तहत सीएसआईआर-एनपीएल इसरो को समय और फ्रीक्‍वेंसी पर निगरानी बनाए रखने की सुविधा देते हैं।

31 अगस्त: श्रीहरिकोटा से शाम सात बजे स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली इंडियन रीजनल नेविगेशनल सैटेलेइट सिस्टम (आईआरएनएसएस यानि नाविक) श्रृंखला का आठवां उपग्रह आईआरएनएसएस-1एच को पीएसएलवी-सी39 से लांच किया गया। इस मिशन में इसरो सफल नहीं हो पाया। मिशन सैटेलाइट से हीट शील्ड अलग नहीं हो पाने के कारण विफल रहा।

29 सितम्बर: प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्‍यमंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुजरात के सूरत में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की उपलब्धियों से जुड़ी एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इस प्रदर्शनी का आयोजन नगर-निगम विद्यालय बोर्ड के तहत हुआ जिसमें बड़ी संख्‍या में स्‍कूली बच्‍चों ने भाग लिया।

24 सितम्‍बर: मंगलयान मिशन के अपनी कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित होने के तीन वर्ष पूरे हो गए। हालांकि इसको 6 माह के मिशन की समय सीमा के आधार पर ही तैयार किया गया था।

आने वाले साल में भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम और भी अधिक बेहतर होने जा रहा है। इसमें चन्द्रयान-2 सबसे महत्वपूर्ण है जिसे मार्च 2018 में लांच किया जाएगा। इसके अलावा इसरो अगले साल से हर महीने एक अंतरिक्ष प्रक्षेपण अभियान करेगा जिसके तहत विभिन्न उपयोगों वाले सेटेलाइट अंतरिक्ष में स्थापित किए जाएंगे।

Updated : 2017-12-27T05:30:00+05:30
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