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पॉलीथिन और गुटखा पर कागजी प्रतिबंध

पॉलीथिन और गुटखा पर कागजी प्रतिबंध
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-स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरा
ग्वालियर। 26 जनवरी 2017 को लाल परेड मैदान से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश में पॉलीथिन की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध की घोषणा की थी। प्रदेश में इस प्रतिबंध को एक मई 2017 से लागू किया जा चुका है। पॉलीथिन पर प्रतिबंध को सात माह से अधिक समय निकल जाने के बावजूद ग्वालियर शहर में परचूनी, मिठाई की दुकानों, सब्जी-फलों के ठेलों सहित खेरिज सामग्री विक्रय वाली सभी दुकानों व संस्थानों पर खुलेआम उपयोग की जा रही है। न तो नगर निगम, न ही प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और न ही जिला प्रशासन पॉलीथिन के उपयोग को रोकने की कार्रवाई कर रहा है।

पॉलीथिन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद बाजार में खुलेआम पॉलीथिन का उपयोग किया जा रहा है। प्रतिबंध के बाद पतली पॉलीथिन निर्माण एवं बाजार में पॉलीथिन में रखकर सामग्री बेचे-खरीदे जाने पर भारी अर्थदण्ड का प्रावधान किया गया है। खास बात यह है कि एक मई को प्रतिबंध लगाए जाने के दिनांक से एक सप्ताह तक पॉलीथिन बाजार से गायब रही थी। लेकिन प्रशासन के ढुलमुल रवैया के चलते पॉलीथिन बाजार में पूर्व की भांति खुलेआम उपयोग होने लगी। स्थानीय प्रशासन न केवल ठेलों और दुकानों पर पॉलीथिन के उपयोग पर मौन है, बल्कि शहर में पॉलीथिन निर्माण कर बेच रहीं फैक्ट्रियों पर भी कार्रवाई नहीं की जा रही है।

क्यों लगाया गया प्रतिबंध?

बाजार में सब्जी, फल और अन्य सामग्री बेचने के लिए धड़ल्ले से उपयोग में लाई जा रही पतली पॉलीथिन को एक-दो बार उपयोग के बाद कचरे में फैंका जा रहा था। पॉलीथिन में अनुपयोगी फल-सब्जियों व अन्य खाद्य सामग्री रखकर कचरे में फैंके जाने से जहां गायों व अन्य पशुओं की भयाभय मौत होने, सीवेज नालियां बंद होने, मिट्टी की उर्वरक क्षमता कम होने व पॉलीथिन के कारण पर्यावरणीय प्रदूषण बढ़ने जैसे कारणों के चलते प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाया गया था।

गुटखा पर यह कैसा प्रतिबंध?

जबलपुर उच्च न्यायालय के आदेश के बाद मध्यप्रदेश में गुटखा (तम्बाकू युक्त पान मसाला) की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा चुका है। प्रतिबंध आदेश का पालन भी सख्ती से हुआ लेकिन पान मसाला कारोबारियों ने इस प्रतिबंध आदेश के बाद गुटखा के शौकीनों के लिए बीच का रास्ता निकालते हुए मोटा मुनाफा कमाना शुरू कर दिया। पान मसाला कंपनियों ने पान मसाला में तम्बाकू का मिश्रण डालना तो बंद कर दिया, लेकिन इस पान मसाले के साथ एक छोटा पाउच तम्बाकू का देना शुरू कर दिया। शौकीन दुकान पर ही पान मसाला और तम्बाकू के पाउच फाड़कर इन्हें मिलाकर तुरंत गुटखा तैयार कर लेते हैं। खास बात यह रही कि प्रतिबंध के पूर्व जो गुटखा एक रुपये में उपलब्ध हो जाता था। अब 5,10 और 20 रुपये में बेचा जा रहा है। इस तरह गुटखे पर लगाया प्रतिबंध आदेश तो मजाक बना ही है। उच्च न्यायालय के आदेश की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

पॉलीथिन में पहुंचती है अधिकारियों की सब्जी

शासन-प्रशासन, पुलिस सहित अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के बंगलों और आवासों पर पदस्थ शासकीय और निजी कर्मचारी पॉलीथिन में ही सब्जी-भाजी, फल सहित बाजार से अन्य सामग्री खरीदकर ले जाते हैं। कर्मचारी इस खाद्य सामग्री को अधिकारियों के हाथों में भी सौंपते हैं और अधिकारी स्वयं भी बाजार से पॉलीथिन में सामान खरीदते देखे जा सकते हैं। प्रदेश में पॉलीथिन पर प्रतिबंध की जानकारी होते हुए भी अधिकारी कार्रवाई करने की बजाय चुपचाप सामान लेकर निकल जाते हैं।

Updated : 2017-12-11T05:30:00+05:30
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