Top
Home > Archived > देश में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं गंभीर रुप ले रही हैं : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

देश में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं गंभीर रुप ले रही हैं : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद

देश में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं गंभीर रुप ले रही हैं : राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
X

नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं देश में एक गंभीर रुप लेती जा रही हैं। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2016 से पता चला है कि भारत की आबादी के करीब 14 प्रतिशत लोगों को मानसिक इलाज की ज़रुरत है।

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को मानसिक स्वास्थ्य पर आयोजित 21वीं विश्व कांग्रेस का उद्घाटन किया। इसे मानसिक स्वास्थ्य वैश्विक समूह, केयरिंग फाउंडेशन और अन्य संस्थान मिलकर आयोजित करा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आधुनिक शहरों में रह रहे युवा, बच्चे और किशोर मानसिक बीमारी की सबसे ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। देश की 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है और हमारा समाज धीरे-धीरे शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्यायें महामारी का रूप लेती दिखाई दे रही हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे मरीजों की सबसे बड़ी समस्या है वह स्वीकार नहीं कर रहे कि वह बीमार हैं। अक्सर इसे नजरंदाज कर दिया जाता है और इस पर कोई चर्चा नहीं की जाती। उन्होंने कहा कि हमें मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के बारे में चर्चा करनी चाहिए और अवसाद व तनाव जैसी बीमारियों का इलाज कराना चाहिए।

मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौती का सामना करने में सबसे बड़ी बाधा मानव संसाधन की है। देश की 1.25 अरब आबादी के लिए केवल 7 लाख डॉक्टर हैं। मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉक्टरों की कमी ज्यादा गंभीर रूप ले लेती है। हमारे देश में करीब 5 हजार मनोचिकित्सक और 2 हजार क्लीनिकल मनोवैज्ञानिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत का राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्कृष्टता के 22 केंद्रों का निर्माण कर रहा है। इसके साथ ही जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम ने पहले ही भारत के लगभग 650 जिलों में से 517 को कवर किया है।

राष्ट्रपति ने खुशी जाहिर की कि विश्व कांग्रेस में योग, ध्यान और मानसिक स्वास्थ्य जैसे पारंपरिक दृष्टिकोणों पर सत्र होगा। उन्होंने कहा कि योग के आम तौर पर शारीरिक लाभ ही बताये जाते हैं लेकिन योग के मानसिक, मनोवैज्ञानिक और संज्ञानात्मक लाभ भी हैं जिनका अध्ययन किया जाना चाहिए।

Updated : 2017-11-02T05:30:00+05:30
Next Story
Share it
Top