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हर महीने करता था 10-12 निरीक्षण फिर भी नहीं दिखा अवैध उत्खनन

हर महीने करता था 10-12 निरीक्षण फिर भी नहीं दिखा अवैध उत्खनन
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-जिलाधीश कैसे वसूलेंगे सवा चार सौ करोड़, खनिज निरीक्षक ने दर्ज बयान में कहा
ग्वालियर। बिलौआ खनन क्षेत्र में अवैध उत्खनन के आरोप में 24 खनन कारोबारियों पर लगाया गया लगभग सवा चार सौ करोड़ का अर्थदण्ड अब प्रशासन के गले की हड्डी बनता जा रहा है। जिलाधीश न्यायालय में विचाराधीन प्रत्येक प्रकरण पर तत्कालीन खनिज निरीक्षक सुमित गुप्ता के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। आरोपी खनिज कारोबारियों के अभिभाषकों द्वारा पूछे जा रहे प्रश्नों के उत्तर में खनिज अधिकारी और निरीक्षक उलझे दिखाई दे रहे हैं। खनिज निरीक्षक ने इन प्रकरणों का ठीकरा राजस्व टीम पर फोड़ते हुए स्पष्ट किया है कि प्रकरण राजस्व विभाग के दस्तावेजों के आधार पर बने हैं। मंगलवार को अभिभाषक के एक प्रश्न के उत्तर में खनिज निरीक्षक ने साफ किया कि वह महीने में खनिज क्षेत्र में 10-12 दिन स्थल निरीक्षण करते थे, लेकिन उन्हें आरोपी खनिज कारोबारी कभी अवैध उत्खनन करते दिखाई नहीं दिए।
उल्लेखनीय है कि फरवरी-मार्च 2017 में डबरा के तत्कालीन अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) अमनवीर सिंह वैश्य ने राजस्व और खनिज विभाग के संयुक्त दल के साथ बिलौआ एवं रफादपुर क्षेत्र में निरीक्षण किया था। उन्होंने पूरे खनन क्षेत्र का सीमांकन भी कराया था। इस तरह राजस्व निरीक्षक और पटवारी द्वारा तैयार रिपोर्ट और नक्शे के आधार पर जिन स्थानों पर अवैध उत्खनन पाया गया था। उन स्थानों से सटी खदानों के संचालकों के अलावा कई ऐसे खनन कारोबारियों पर भी चोरी हुए खनिज की रॉयल्टी के तीस गुना राशि का अर्थदण्ड अधिरोपित किया था, जिनकी खदानें अवैध उत्खनन क्षेत्र से बहुत दूर स्थित हैं। इस तरह प्रत्येक खनिज कारोबारी पर 4-5 करोड़ से लेकर 97 करोड़ रुपये तक का अर्थदण्ड अधिरोपित किया गया। इन प्रकरणों पर सुनवाई विगत दो माह से जिलाधीश न्यायालय में चल रही है। अधिकांश प्रतिपरीक्षण की स्थिति में लंबित हैं। सभी प्रकरणों में खनिज विभाग तथा आरोपी खनिज कारोबारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। बयानों में खनिज निरीक्षक ने स्पष्ट किया कि उन्हें उत्खनन की जानकारी राजस्व अमले के दस्तावेजों के आधार पर लगी।

राजस्व अधिकारियों ने नक्शे में दर्शाई अवैध उत्खनन की स्थिति

खनिज निरीक्षक ने अपने बयान में यह भी दर्ज कराया है कि जिस भूमि पर अवैध उत्खनन हुआ है, बटांकन नहीं होने के कारण यह नहीं बताया जा सकता कि उस भूमि का भूमि स्वामी कौन है। आरोपी खनिज ठेकेदार राजीव लोचन के प्रकरण में दर्ज बयानों में उन्होंने कहा कि सर्वे क्र. 3909 पर खनिज पट्टा इस ठेकेदार को आवंटित है, जो सर्वे नं. 3911 से मिला हुआ है, जो शासकीय है तथा यह नक्शे में भी स्पष्ट नहीं दिख रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संलग्न नक्शे में उल्लेखित अवैध उत्खनन क्षेत्र मेरे द्वारा नहीं दर्शाया गया। बिलौआ के सम्पूर्ण खनन क्षेत्र का सीमांकन कुंआ और तिम्हाड़ा को निर्धारित बिन्दु मानकर किया गया। उक्त अवैध उत्खनन क्षेत्र राजस्व दल के अधिकारियों द्वारा ही उन्हें बताया गया। उन्होंने प्रतिवेदन में अवैध उत्खनन क्षेत्र कहीं नहीं दर्शाया। वयानों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नक्शे में आर.आई के हस्ताक्षर हैं,एसडीएम के नहीं। फरवरी-मार्च में एसडीएम एवं जांच दल द्वारा किए गए निरीक्षण के समय सभी खदानें बंद थीं।

मंगलवार को इन प्रकरणों में थी पेशी

सुनील शर्मा (दो प्रकरण) राजेश नीखरा, सरदार सिंह गुर्जर, मीरेन्द्र सिंह पाल, मनीष गुप्ता, राजेश नीखरा, एस.सी.जैन, रामनिवास शर्मा, कल्लू उर्फ दीनदयाल बगैरह, राजीव लोचन शर्मा, अशोक सिंह यादव, प्रतीक खण्डेलवाल (दो प्रकरण) एवं मुनेन्द्र मंगल के प्रकरण मंगलवार को प्रतिपरीक्षण हेतु रखे गए। इसी प्रकार ओमप्रकाश का तर्क हेतु, आर.सी.जैन-पक्षकारों को साक्ष्य हेतु एवं प्रतिपरीक्षण हेतु व चन्द्रशेखर गोहदा बगैरह के प्रकरण मंगलवार को जवाब हेतु जिलाधीश न्यायालय में रखे गए।

बयान दर्ज कराने स्थानांतरित खनिज निरीक्षक को बुलाया

चार अरब से अधिक के अर्थदण्ड के मामले में खनिज, राजस्व और आरोपी खनिज कारोबारियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। इसलिए ग्वालियर से करीब डेढ़ माह पूर्व स्थानांतरित हो चुके खनिज निरीक्षक सुमित गुप्ता को ग्वालियर बुलाया गया है। खनिज अधिकारी को खनन क्षेत्र एवं प्रकरणों की जानकारी तक नहीं होने के कारण बयान दर्ज होते समय वह खनिज निरीक्षक के पीछे बैठकर प्रकरणों और बयानों को समझ रहे हैं।

Updated : 2017-10-04T05:30:00+05:30
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