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बीमारी ने नहीं लापरवाही व अव्यवस्थाओं ने ली वृद्ध की जान

बीमारी ने नहीं लापरवाही व अव्यवस्थाओं ने ली वृद्ध की जान
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-मामला जिला अस्पताल के चिकित्सक की लापरवाही का
ग्वालियर। शहर के शासकीय अस्पतालों में चिकित्सकों की लापरवाही के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं। लेकिन इस बार चिकित्सक की लापरवाही व अस्पताल की अव्यवस्थाओं ने एक बुजुर्ग की जान ले ली। बुजुर्ग अस्पताल की गैलरी में पड़ा रहा, लेकिन डॉक्टरों ने उसको सही समय पर इलाज नहीं दिया। बुजुर्ग की मृत्यु हो जाने के करीब डेढ़ घंटे बाद सुरक्षाकर्मी ने शव की सूचना थाने में दी और शव को पुलिसकर्मियों को सौंप दिया। दरअसल शुक्रवार की सुबह करीब 5 बजे मुरार घासमंडी निवासी 62 वर्षीय रमेशचन्द्र श्रीवास अपने घर से सुबह की सैर पर निकल रहे थे, तभी रमेशचन्द्र के सीने में दर्द उठने लगे। जिसके चलते वह अकेले ही मुरार जिला अस्पताल की कैजुअल्टी में उपचार के लिए जा पहुंचे। जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉ. नरेश लछवानी ने उनका परीक्षण कर ईसीजी कराने के लिए डायलेसिस कक्ष के पास भेज दिया। इस पर रमेश ईसीजी कराने के लिए कैजुअल्टी से निकले तो करीब डेढ़ घंटे तक वापस लौट कर नहीं आए। रमेश जैसे ही डायलेसिस कक्ष के पास गैलरी में पहुंचे तो उन्हें दिल का दौरा पड़ गया और उनकी वहीं मृत्यु हो गई। इतना ही नहीं बुजुर्ग के वापस न लौटने पर चिकित्सक ने बुजुर्ग की कोई सुध तक नहीं ली। बुजुर्ग करीब डेढ़ घंटे तक अस्पताल की गैलरी में ही पड़ा रहा और सुबह करीब 7.30 सुरक्षाकर्मी ने देखा कि बुजुर्ग के शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही है। सुरक्षाकर्मी ने जब बुजुर्ग को हिलाया तो देखा कि उसकी मृत्यु हो चुकी है, जिसकी सूचना उसने डॉ. लछवानी को दी। जिस पर डॉ. लछवानी ने पुलिस को सूचना देकर शव को भिजवा दिया।

प्रबंधन ने बचाव में कहा- उपचार के लिए नहीं आया बुजुर्ग:-इस पूरे मामले में सबसे बड़ी बात तो यह है कि अस्पताल प्रबंधन ने अपनी गलती छुपाने के लिए पुलिस को सूचना दी कि कोई अज्ञात बुजुर्ग का शव अस्पताल में पड़ा हुआ है। जबकि बुजुर्ग चिकित्सक के पास उपचार के लिए पहुंच चुका था, फिर भी स्वास्थ्य अधिकारी लापरवाह चिकित्सक पर कार्रवाई करने की जगह उन्हें बचाने में लगे हुए हैं।

अगर समय पर मिलता उपचार तो बच सकती थी जान

अस्पताल के कैजुअल्टी में अगर बुजुर्ग को समय पर उपचार मिलता तो शायद उसकी जान बचाई जा सकती थी। कैजुअल्टी में अधिकांश गंभीर मरीज ही उपचार के लिए पहुंचते हैं। लेकिन कैजुअल्टी में ईसीजी तक की व्यवस्था नहीं है, अगर कैजुअल्टी में चिकित्सक बुजुर्ग को समय पर दवा व उसकी जांच करते तो शायद बुजुर्ग को बचाया जा सकता था।

इनका कहना है

बुजुर्ग सुबह उपचार के लिए आया था, उसे दवा देकर ईसीजी कराने के लिए कहा गया था। लेकिन बुजुर्ग वापस लौट कर ही नहीं आया, बुजुर्ग को ढंूढने के लिए भी स्टॉफ को भेजा गया था। लेकिन वह मिला नहीं।

डॉ. नरेश लछवानी
चिकित्सक जिला अस्पताल

बुजुर्ग अगर उपचार के लिए अस्पताल में पहुंचा था और उसे चिकित्सक ने देखा भी था तो इस मामले की जांच कराई जाएगी।

डॉ. ए.के. दीक्षित
क्षेत्रीय संचालक ,स्वास्थ्य सेवाएं

Updated : 2017-10-28T05:30:00+05:30
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