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भक्तों की आस्था का केन्द्र हैं अचलेश्वर महादेव

भक्तों की आस्था का केन्द्र हैं अचलेश्वर महादेव
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कितना पुराना है शिवलिंग, नहीं है प्रमाण

प्रशांत शर्मा/ग्वालियर। महादेव की महिमा तो सारा जगत जानता है। आस्था की बात कि जाए तो इनके द्वार से कोई खाली नहीं जाता। शहर में भगवान शिव के विभिन्न मंदिरों में से एक है शहर के मध्य स्थित अचलेश्वर महादेव का मंदिर जिसकी महिमा अपरम्पार है। मंदिर में विराजित शिवलिंग के दर्शन के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। लेकिन सोमवार के दिन तो यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ता है।

अचलेश्वर महादेव मंदिर में विराजित शिवलिंग कितनी पुरानी है इसका कोई प्रमाण नहीं है। इसमें भी अद्भुत बात यह है कि इस शिवलिंग के छोर का आज तक पता नहीं चल पाया है। यहां दर्शनों के लिए आने वाले भक्तों की यह आस्था है कि अचलेश्वर महादेव सभी कि मनोकामना पूरी करते हैं।

सावन व शिवरात्रि पर होते हैं बड़े आयोजन:- अचलेश्वर महादेव की महिमा अपरम्पार है। इस मंदिर में सावन और शिवरात्रि पर्व पर विशेष आयोजन होते हैं। इस दौरान हजारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए आते हंै। शिवरात्रि के दिन महादेव के दर्शन करने के लिए भक्तों को घंटो लाइन में लगा रहना पड़ता है।

सफाई के दौरान दिखी पिंडी

किसी समय जयविलास पैलेस के आसपास घना जंगल हुआ करता था। जब इन जंगलों की सफाई कराई गई तो एक पेड़ के नीचे भोले नाथ की पिण्डी मिली। कुछ समय बाद जब पिण्डी के पास बना पेड़ गिर गया तो वहां आने वाले चरवाहों ने उस पिन्डी के पास एक चबूतरा बनवा दिया। इस पिण्डी को बीच रास्ते से हटाने के कई प्रयास किए गए लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली।

40 लाख का मुकुट पहनते हैं बाबा
बाबा अचलनाथ 40 लाख का स्वर्ण मुकुट धारण करते हंै। लगभग 1 किलो 117 ग्राम का यह मुकुट मुरार निवासी शिव भक्त कारोबारी कमल साहा ने रक्षाबंधन के मौके पर अचलेश्वर महादेव को समर्पित किया था। इसकी कीमत करीब 40 लाख रुपए आंकी गई है। बताया जाता है कि इस मुकुट को बनवाने में कई माह लग गए। इसके चारों और सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के मूर्ति विग्रह उकेरे गए हैं। साथ ही मुकुट में नंदी, त्रिशूल, नाग व चंद्रमा समेत सभी शिव प्रतीक भी उकेरे गए हैं।

दूध-दही का लगता है भोग
न्यास के सचिव भुवनेश्वर वाजपेयी ने बताया कि बाबा अचलानाथ को सुबह शाम दूध, दही, मक्खन का भोग लगाया जाता है। वहीं प्रात: 6.30 बजे और शाम को 7.30 बजे नगाड़ों की धुन पर बाबा की आरती होती है।

Updated : 2016-07-02T05:30:00+05:30
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