Top
Home > Archived > सामाजिक समरसता हेतु आज भी प्रासंगिक है ‘बल्लभ’ का दर्शन

सामाजिक समरसता हेतु आज भी प्रासंगिक है ‘बल्लभ’ का दर्शन

सामाजिक समरसता हेतु आज भी प्रासंगिक है ‘बल्लभ’ का दर्शन

सामाजिक समरसता हेतु आज भी प्रासंगिक है ‘बल्लभ’ का दर्शन


-कैलाश पुरी स्थित श्रीनाथ जी मंदिर में भक्तों ने मनाई जन्म जयंती

आगरा। भक्तिकालीन सगुणधारा की कृष्णभक्ति शाखा के आधारस्तंभ श्रीवल्लभाचार्य जी का मंगलवार को प्राकट्य दिवस उनके दर्शन सिद्धांतों पर समूह चर्चा व अष्टछाप कवियों के पद गायन के साथ मनाया गया। उत्सव में उपस्थित नगर के विद्धजनों ने सामाजिक समरसता के निर्माण हेतु श्रीमद् बल्लभाचार्य जी के विचारों को वर्तमान में भी प्रासंगिक बताया।
कैलाश पुरी रोड स्थित श्रीनाथ जी मंदिर में आयोजित जयंती उत्सव में नगर वैष्णव परिषद व मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष समाजसेवी शांति स्वरुप गोयल ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए कहा कि बल्लभाचार्य जी ने पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण को ही परब्रह्म स्वीकारते हुए जीव में आनंद के आविर्भाव को अपने दर्शन के केंद्र में रखा और मानव ब्रह्म की इस आत्म-कृति से पुष्ट होता रहे, इसके लिए पुष्टिमार्ग की स्थापना की। साथ ही पुष्टिमार्ग के फलस्वरुप आमजन की ब्रजभाषा में अष्टछाप कवियों ने विभिन्न पद लिखकर समाज में समरसता के प्रसार में योगदान दिया।
वरिष्ठ चिकित्सक डाॅ. बीबी माहेश्वरी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के अनुग्रह और विनम्रता से प्रकृति के सभी तत्वों को स्वीकार करने के कारण बल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग की रचना की। वहीं प्रेम प्रकाश शास्त्री ने बल्लभाचार्यजी के तीन तत्व ब्रह्म, जगत और जीव पर प्रकाश डालते हुए लोगों को ईष्षा रहित जीवन जीने की प्रेरणा दी। उत्सव में विभिन्न शास्त्रीय रागों में अष्टछाप कवियों के पदों का गायन किया गया। बाद में प्रभू नाथ जी भी भव्य आरती उतारी गई। जयंती उत्सव में समाजसेवी संजय अग्रवाल, अभिनय सेठी, एस के मेहरा, बालकृष्ण मुदगल, कुसुम भगत, राधारानी, शारदा देवी शांति बंसल आदि भक्तगण उपस्थित रहे। पूजन व तिलक मंदिर के सेवायत मुकेश व राकेश शास्त्री ने सम्पन्न कराया।

Updated : 2016-05-03T05:30:00+05:30
Next Story
Share it
Top