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भव्य भवन, शिक्षक दो, छात्र सिर्फ चार

सरकारी स्कूलों को नहीं मिल रहे छात्र

ग्वालियर। स्कूल शिक्षा विभाग ने भले ही जिले में कम छात्र संख्या वाले कई स्कूल बंद कर दिए हों। बावजूद इसके आज भी कुछ स्कूल ऐसे बचे हैं, जहां छात्र संख्या न के बराबर है। घाटीगांव विकासखंड के अंतर्गत पंजाबी पुरा में संचालित शा. प्राथमिक विद्यालय इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जिसमें मात्र चार छात्र ही दर्ज हैं।
पंजाबी पुरा में भव्य स्कूल भवन बना हुआ है, जहां रसोई घर के साथ बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग दो शौचालय भी हैं और दो शिक्षक एम.के.जैन व भारती निगम कार्यरत हैं, लेकिन आज डाइट के वरिष्ठ व्याख्याता एवं जिला स्त्रोत समूह के सदस्य ओ.पी. दीक्षित इस स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तो पता चला कि यहां मात्र चार छात्र ही दर्ज हैं और उनमें से मात्र दो ही छात्र उपस्थित थे। इसमें पिछले साल भी छात्रों की संख्या चार ही थी। श्री दीक्षित ने इस संबंध में ग्रामीणों से बात की तो बताया गया कि इस गांव में करीब 16-17 परिवार निवास करते हैं और करीब 25-30 बच्चे हैं। चूंकि गांव के स्कूल में पढ़ाई अच्छी नहीं होती है, इसलिए अधिकांश बच्चे मोहना स्थित दाताबंदी छोड़ स्कूल में पढऩे जाते हैं। ऐसी ही हालत दौरार के पास स्थित मोगियों का पुरा में संचालित शा. सेटेलाइट प्राथमिक विद्यालय की भी है। हालांकि इसमें करीब 16 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन यहां के कुछ मोगिया परिवार पलायन कर गए हैं। इसके चलते वर्तमान में केवल तीन से चार बच्चे ही पढऩे आते हैं, जबकि यहां दो शिक्षक कार्यरत हैं। खास बात यह है कि यहां स्कूल भवन नहीं है और बच्चे एक वृक्ष के नीचे बैठकर पढ़ते हैं।
एक माह से लापता हैं प्रधानाध्यापक
श्री दीक्षित जब घाटीगांव विकासखंड के शा. माध्यमिक विद्यालय पाटई का निरीक्षण करने पहुंचे तो पता चला कि यहां के प्रधानाध्यापक अभयकांत झा विगत 18 जनवरी से बिना स्वीकृत अवकाश के अनुपस्थित हैं। इससे पहले शा. उमावि पाटई के संकुल प्राचार्य आदर्श पंडित द्वारा 28, 29, 30 दिसम्बर को निरंतर किए गए निरीक्षण के दौरान भी श्री झा अनुपस्थित मिले थे। इस पर उनका वेतन भुगतान रोक दिया गया था। केवल प्रधानाध्यापक ही नहीं, यहां भृत्य की भी मनमानी चल रही है।
मूल विभाग में नहीं लौटी वसुन्धरा
श्री दीक्षित ने घाटीगांव विकासखंड के शा. प्राथमिक विद्यालय पाटई का भी निरीक्षण किया, जहां कुल दर्ज 199 में से मात्र 41 छात्र ही उपस्थित मिले। इसी दौरान पता चला कि यहां की शिक्षिका वसुन्धरा कुशवाह 1 दिसम्बर 2015 से एसडीएम झांसी रोड सर्किल कार्यालय में अटैच हैं, जो अभी तक मूल विभाग में वापस नहीं लौटी हैं, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग ने गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे सभी शिक्षकों को 10 फरवरी तक मूल विभाग में अनिवार्य रूप से वापस लौटने के निर्देश जारी किए थे।
देरी से स्कूल पहुंचीं शिक्षिकाएं
श्री दीक्षित पूर्वान्ह करीब 11 बजे जब घाटीगांव विकासखंड के सहरिया जनजाति बाहुल्य भट्टपुरा गांव के शा. प्राथमिक स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे तो स्कूल बंद था, जबकि स्कूल खुलने का समय सुबह 10.30 बजे निर्धारित है। श्री दीक्षित के अनुसार स्कूल करीब 11.10 बजे खोला गया, जबकि प्रधानाध्यापक उर्मिला स्नेही, शिक्षिका प्रभा आर्य, डोली रावत एवं मीरा यादव 11.20 बजे पहुंचीं। इसके बाद गांव से बच्चों को बुलाया गया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने पंचनामा देकर बताया कि सभी शिक्षिकाएं आए दिन देरी से आती हैं और जल्दी चली जाती हैं। ग्रामीणों ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री हेल्प लाइन पर भी की है। श्री दीक्षित ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कोई रिकार्ड नहीं मिला। स्कूल भवन का फर्स खुदा पड़ा था और बोर्ड भी खराब हालत में थे।
इनका कहना है
ग्रामीण क्षेत्र में कम छात्र संख्या वाले स्कूल बंद नहीं किए जा सकते क्योंकि यह जनसंख्या और दूरी के हिसाब से संचालित हैं। आज भोपाल में हुई विभागीय योजनाओं की समीक्षा बैठक में भी इस विषय पर चर्चा हुई थी। यदि अगले सत्र में भी इन स्कूलों में छात्र संख्या कम रही तो इनका अन्य स्कूलों में समायोजन करने पर विचार करेंगे।
के.जी. शुक्ला
परियोजना समन्वयक
जिला शिक्षाक केन्द्र, ग्वालियर
पंजाबी पुरा व मोगियां का पुरा के स्कूलों में यदि छात्र संख्या कम है तो हम इन दोनों स्कूलों का निरीक्षण-परीक्षण कराएंगे। इसके बाद देखेंगे कि इनका क्या करना है। हमने गैर शैक्षणिक कार्यों में लगे सभी शिक्षकों को मूल विभाग में वापस लौटने के लिए भी पत्र जारी कर दिए हैं।
विकास जोशी
जिला शिक्षा अधिकारी, ग्वालियर

Updated : 2016-02-14T05:30:00+05:30
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