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फरवरी तक आ सकते हैं कूनो में बब्बर शेर

फरवरी तक आ सकते हैं कूनो में बब्बर शेर
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दिसम्बर में कूनो अभयारण्य का दौरा करेगा विशेषज्ञ दल

ग्वालियर।
श्योपुर जिले के कूनो वन्यप्राणी अभयारण्य में गुजरात के बब्बर शेरों को बसाने की प्रक्रिया अब तेज होती दिख रही है। इसी सिलसिले में दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में गुजरात, मध्यप्रदेश और केन्द्र सरकार का संयुक्त वन्यजीव विशेषज्ञ दल कूनो अभयारण्य का दौरा करने आने वाला है। इस दल ने कूनो अभयारण्य को यदि शेरों को बसाने की दृष्टि से अनुकूल पाया तो आगामी जनवरी से फरवरी के बीच गुजरात से यहां आठ से दस की संख्या में बब्बर शेरों को लाकर छोड़ा जा सकता है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून की अनुशंसा पर कूनो वन्यप्राणी अभयारण्य में बब्बर शेरों को बसाने के लिए सन् 1996 में सिंह परियोजना स्थापित की गई थी। इसके लिए गुजरात के गिरि राष्ट्रीय उद्यान से बब्बर शेरों को लाकर यहां बसाया जाना था, लेकिन गुजरात सरकार बब्बर शेर देने को तैयार नहीं थी। इसके बाद यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में चलता रहा। वर्ष 2013 के अपै्रल माह में सर्वोच्च न्यायालय ने कूनो अभयारण्य में बब्बर शेरों को बसाने की योजना पर आगामी छह माह में अमल करने के निर्देश केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को दिए थे, लेकिन साढ़े तीन साल गुजर जाने के बाद भी कूनो अभयारण्य में बब्बर शेरों को बसाने की प्रक्रिया अधर में अटकी हुई है। हालांकि अब कुछ बात बनती दिख रही है।

सूत्रों के अनुसार दिसम्बर के दूसरे सप्ताह में विशेषज्ञों का एक दल कूनो अभयारण्य का भ्रमण करने के लिए आने वाला है। इस दल में मुख्य रूप से मध्यप्रदेश व गुजरात वन विभाग, केन्द्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी, सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर केन्द्र सरकार द्वारा गठित वन्यजीव विशेषज्ञ समिति के सदस्य तथा भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून के वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल होंगे। यह दल मुख्य रूप से यह देखेगा कि कूनो वन्यप्राणी अभयारण्य बब्बर शेरों को बसाने की दृष्टि से अनुकूल है या नहीं। इसके बाद इस दल द्वारा यदि केन्द्र सरकार को अनुकूल रिपोर्ट सौंपी जाती है तो माना जा रहा है कि गुजरात के गिरि राष्ट्रीय उद्यान से आगामी जनवरी से फरवरी के बीच कूनो अभयारण्य में आठ से दस बब्बर शेरों की शिफ्टिंग की जा सकती है।

बजट के अभाव में अधूरी हैं तैयारियां
सूत्रों के अनुसार गुजरात से आने वाले बब्बर शेरों को कूनो अभयारण्य में स्वच्छंद विचरण के लिए खुला छोडऩे से पहले कुछ समय तक एक बाड़े में रखा जाएगा, लेकिन बजट के अभाव में बाड़े का निर्माण अभी तक नहीं हो सका है। इसके अलावा बब्बर शेरों को बसाने की दृष्टि से इस अभयारण्य का क्षेत्रफल भी काफी कम बताया जा रहा है, इसलिए अभयारण्य का विस्तार भी किया जाना है। इन दोनों कमियों की पूर्ति के लिए अर्थात अभयारण्य में बाड़े का निर्माण और 350.577 वर्ग कि.मी. एरिया बढ़ाने तथा दो गांवों के विस्थापन के लिए अभयारण्य प्रबंधन द्वारा अलग-अलग प्रस्ताव तैयार कर भेजे गए थे, जो विभिन्न कारणों से पिछले करीब एक साल से वन विभाग के भोपाल मुख्यालय में अटके हुए हैं। इसके चलते वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों को आशंका है कि उक्त कमियों को आधार बनाकर विशेषज्ञ दल ने यदि केन्द्र सरकार को प्रतिकूल रिपोर्ट सौंप दी तो यहां बब्बर शेरों को बसाने की प्रक्रिया एक बार फिर टल भी सकती है।

Updated : 2016-11-23T05:30:00+05:30
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