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पोलिकन पक्षियों में नहीं है बर्ड फ्लू का संक्रमण

पोलिकन पक्षियों में नहीं है बर्ड फ्लू का संक्रमण
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*जांच में भोपाल की डीआई लैब ने किया खुलासा
*चिडिय़ाघर प्रबंधन ने ली राहत की सांस


ग्वालियर|
गांधी प्राणी उद्यान (चिडिय़ाघर) में बर्ड फ्लू के संक्रमण से असमय मौत का शिकार बने पेंटेड स्टार्क पक्षियों के साथ एक ही केज में रहे तीन पोलिकन पक्षी बर्ड फ्लू के संक्रमण से ग्रस्त नहीं हैं। इस बात का खुलासा राष्ट्रीय डीआई लैब भोपाल के वैज्ञानिकों ने इन पक्षियों के मल-मूत्र की जांच के बाद स्थानीय अधिकारियों से दूरभाष पर हुई बातचीत में किया है। हालांकि अभी लिखित में अधिकृत जांच रिपोर्ट आना है। इससे चिडिय़ाघर प्रबंधन ने राहत की सांस ली है।
उल्लेखनीय है कि चिडिय़ाघर में बर्ड फ्लू का शिकार बने पेंटेड स्टार्क पक्षियों के केज में तीन पोलिकन पक्षी भी थे, जिनमें संक्रमण की आशंका सबसे ज्यादा थी। इसी के मद्देनजर इन तीनों पक्षियों को आइसोलेशन में रखा गया है। बताया गया है कि उक्त तीनों पोलिकन पक्षियों में बर्ड फ्लू के संक्रमण का पता लगाने के लिए पशु पालन विभाग द्वारा इनके मल-मूत्र के नमूने राष्ट्रीय डीआई लैब भोपाल भेजे गए थे, जहां से अभी तक लिखित में अधिकृत रिपोर्ट तो नहीं आई है, लेकिन बताया गया है कि मंगलवार को पशु पालन विभाग के उप संचालक ने नमूनों की रिपोर्ट के संबंध में डीआई लैब में दूरभाष से सम्पर्क किया तो चर्चा के दौरान वहां के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि चिडिय़ाघर के तीनों पॉलिकन पक्षियों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। यह खबर मिलते ही चिडिय़ाघर प्रबंधन ने राहत की सांस ली है। हालांकि डीआई लैब भोपाल से अभी चिडिय़ाघर के अन्य पक्षियों सहित जिले के पॉल्ट्री फार्मों और चिकन सेन्टरों से एकत्रित किए गए मुर्गियों के मल-मूत्र के नमूनों की जांच रिपोर्ट आना शेष है।


पेंटेड स्टार्क पक्षियों के एन्क्लोजर में भरी साफ मिट्टी
बर्ड फ्लू से पेंटेड स्टार्क पक्षियों की सामूहिक मौत के बाद चिडिय़ाघर परिसर का केमिकल ट्रीटमेंट के साथ डिस इन्फेक्शन लगातार किया जा रहा है। पेंटेड स्टार्क पक्षियों के एन्क्लोजर को वायरस मुक्त करने के लिए उसकी ऊपरी सतह की करीब आधा फीट मिट्टी खोदकर उस मिट्टी को विभिन्न प्रकार के केमिकल के साथ एक गड्ढे में दबा दिया गया है। करीब साढ़े तीन स्क्वेयर फीट के इस एन्क्लोजर की खुदाई के बाद उसमें अन्य स्थान से स्वच्छ मिट्टी लाकर भर दी गई है। इसके साथ ही बर्ड फ्लू वायरस के अन्य एन्क्लोजर तक पहुंचने की आशंका के मद्देनजर वायरस को समाप्त करने के लिए चिडिय़ाघर में प्रतिदिन पक्षियों और जानवरों के पिजड़ों की कीटनाशक से धुलाई, बाड़ों में कीटनाशकों का छिडक़ाव और पूरे परिसर में फोविंग नियमित रूप से कराई जा रही है। इन तमाम प्रयासों के फलस्वरूप चिडिय़ाघर में अब स्थिति पूरी तरह सामान्य है। यहां उल्लेखनीय है कि 24 जलीय पक्षी पेंटेड स्टार्क की मौत बर्ड फ्लू से होने की पुष्टि के बाद विगत 23 अक्टूबर को भोपाल से आए उच्च स्तरीय विशेषज्ञ दल की सलाह पर प्रशासन द्वारा चिडिय़ाघर को एक माह के लिए बंद कर दिया गया था।

इनका कहना है

‘‘चिडिय़ाघर के तीनों पोलिकन पक्षियों की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई है। यह बात दूरभाष पर हुई चर्चा में डीआई लैब भोपाल के वैज्ञानिकों ने स्पष्ट की है। लिखित में यह रिपोर्ट एक-दो दिन में मिल जाएगी। इसके अलावा अन्य पक्षियों के नमूनों की जांच रिपोर्ट भी अभी आना है। फिलहाल जिले के पॉल्ट्री फार्मों का रुटीन सर्वे आगामी एक माह तक चलता रहेगा। तिघरा व रमौआ बांध पर विचरण करने वाले प्रवासी पक्षियों के भी नमूने एकत्रित कर जांच के लिए भेजे जाना हैं। ’’

ओ.पी. त्रिपाठी
उप संचालक
पशु पालन विभाग

Updated : 2016-11-02T05:30:00+05:30
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