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मुआवजा : प्रशासन कर रहा है झूठे दावे, पोल खोल रहे भटकते किसान

तहसील से अभी भी नहीं छंट रही किसानों की भीड़

गुना। खरीफ फसल नुकसान की मुआवजा राशि वितरण के मामले में वित्तीय अनियमितताओं को अंजाम देने के साथ प्रशासन निरंतर झूठे दावे करने में लगे हुआ है। यह बात अलग है कि प्रशासन के दावों की पोल मुआवजे के लिए बैंक और तहसील के बीच भटक रहे किसान खोलने में लगे हुए है। पूर्व में प्रशासन का दावा रहा कि मुआवजे का 100 फीसदी वितरण किया जा चुका है, वहीं बाद में जानकारी निकलकर सामने आई कि आवंटित 151 करोड़ की राशि में से 27 करोड़ एकमुश्त सहकारी बैंक में जमा किए गए है। इसके बाद कलेक्टर राजेश जैन ने जानकारी दी कि 27 करोड़ में से 14 करोड़ किसानों के खाते में पहुँच चुके है और शेष राशि 4-5 दिनों में किसानों को वितरित कर दी जाएगी, जबकि सूत्र बताते है कि बैंक में अभी किसानों के खाते खोलने की मशक्कत ही चल रही है, इसके बाद राशि खाते में डालने की प्रक्रिया गति पकड़ेगी।
6 हजार किसानों को मिलना है मुआवजा
बताया जाता है कि अभी भी हजारों किसान मुआवजे से वंचित है। प्रशासन के अंाकड़े को ही अगर सही माने तो 6 हजार किसान ऐसे रहे थे, जिनके खाते नहीं थे। इसके चलते उनके मुआवजे की राशि 27 करोड़ सहकारी बैंक में एकमुश्त एडवांस में जमा कराई गई थी, जबकि इनमें से अधिकांश किसानों के खाते पहले से किसी न किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में है और खाते नंबर जेब में डाले वह पिछले कई दिनों से मुआवजे के लिए भटक रहे है। बावजूद इसके प्रशासनिक फरमान के चलते अब यह किसान मुआवजे के लिए फिर से खाता खुलवाने को मजबूर है। जिससे उन्हे मुआवजा मिल सके।
सहकारी बैंक में उमड़ रही भारी भीड़
प्रशासनिक फरमान के चलते सहकारी बैंक में खाता खुलवाने के लिए इन दिनों किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है। जिसके चलते खाता खुलवाने के लिए किसानों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। पिछले 2-3 दिनों में यहां हजारों किसानों के खाते खोले जा चुके है और अभी भी खाता खोलने का क्रम चल रहा है। इसके चलते बैंक में तमाम कार्य ठप पड़ गए है। खाता खोलने के बाद मुआवजे की राशि उनमे डालने की प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी। जिसमें तकरीबन हफ्ते भर का समय लगने की संभावना जताई जा रही है।
पहले खाते खोले, अब केवाएसी जमा करा रहे
प्रशासनिक दबाव में आनन-फानन में सहकारी बैंक ने नियमों को दरकिनार करते हुए हजारों किसानों के खाते खोल दिए और अब किसानों से केवाएसी जमा कराई जा रही है, जबकि नियमानुसार खाता खोलने के लिए खाताधारक के मौजूद होने के साथ ही उन्ही के हाथों केवाएसी ली जाना चाहिए, किन्तु सहकारी बंैक में उलटा हो रहा है, पहले खाते खोल दिए गए और अब केवाएसी जमा कराई जा रही है। इससे किसानों के साथ बैंक प्रबंधन को दो-दो बार मशक्कत करनी पड़ रही है। पहले खाते खोलने के लिए और फिर केवाएसी जमा करने के लिए।
किसान उठा रहे है आपत्ति
पहले से ही राष्ट्रीयकृत बैंक में खाता होने के बावजूद फिर से खाता खुलवाने के प्रशासनिक फरमान को लेकर किसान आपत्ति उठा रहे है। उनका कहना है कि जब उनके पास पहले से ही बैंक खाता है तो फिर दुबारा खाता खुलवाने की क्या तुक है? किसानों के अनुसार शुरु से चली आ रही इस जबरिया कवायद के चलते ही उन्हे मुआवजा मिलने में देरी हो रही है। पहले पटवारी ने खाते नंबर लिए, फिर तहसील में बॉक्स रखकर खाता नंबर एकत्रित किए गए है और अब सहकारी बैंक में खाता खुलवाने पर जोर दिया जा रहा है। इस दौरान कई ऐसे किसान भी सामने आए, जिनके पहले से ही सहकारी बैंक में ही खाता है।
भारी गड़बड़ी की आशंका
प्रशासन द्वारा मुआवजा वितरण को लेकर अपनाई जा रही प्रक्रिया से भारी गड़बड़ी की आशंका बनने लगी है। कारण एक तो जिनके खाते खुले है, वह वास्तविक पीडि़त किसान है, यह जानना मुश्किल हो जाएगा, दूसरे जल्दबाजी में कुछ मृत व्यक्तियों के खाते भी खोल दिए गए है, उन खातों में राशि पहुँचने के बाद क्या होगा? आदि सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है? दूसरी ओर प्राकृतिक सितम झेल चुका अन्नदाता अब प्रशासनिक सितम झेलने के लिए मजबूर है।

Updated : 2016-01-24T05:30:00+05:30
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