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मकर संक्रांति पर रही मेलों की धूम

नदियों के संगम तटों पर दिनभर चला स्नान-दान का कार्यक्रम

अशोकनगर। मकर संक्रांति पर जिलेभर में मेलों की धूम रही। जिले के सिद्ध स्थानों सहित प्रमुख नदियों के संगम तटों पर दो दिवसीय मेले आयोजित किए गए। जहां हजारों की तादात में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर स्नान-दान कर पुण्यलाभ कमाया। वहीं आयोजित मेलों में भी खरीददारी की। जिले के तूमैन, सुरई-सुमेर, रणछोर जी, बहोरा घाट, सिद्ध क्षेत्र मोला डेम, नहारगढ़, घाट बमूरिया, भरका, राजघाट आदि स्थानों पर आयोजित मेले के दौरान देव स्थानों पर विशेष पूजा-अर्चना का कार्य दिनभर चलता रहा।
जिला मुख्यालय के पास ही ऐतिहासिक नगरी तूमैन में त्रिवेणी संगम पर श्रद्धालुओं ने पूरे श्रद्धा भाव के साथ स्नान-दान कर पुण्यलाभ कमाया। पिपरई से 20 किमी दूरी पर स्थित प्राचीन गुफा भरका स्थान नाम से विख्यात है। यहां पर भी हजारों की तादात में लोगों ने उपस्थित होकर प्राचीन गुफा, शिवमंदिर और हनुमान जी के मंदिर में विशेष दर्शन कर पुण्यलाभ लिया। इस स्थान के बारे में क्विदंती यह है कि शिलाओं से घिरी गुफा में प्रत्येक मकर संक्रांति के समय श्रद्धालुओं को नाग देवता के दर्शन होते हैं। नजदीक में बने कुण्ड में श्रद्धालु स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना करते हैं। इस स्थान तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सुरई संगम घाट सुप्रसिद्ध नदी केथन मोला के संगम तट पर स्थित है। यहां पर प्राचीन सुरई है। यहां भी पिछले कई वर्षों से मेला का आयोजन किया जाता है। इस स्थान पर भी शिवालय पर विशेष पूजा-अर्चना के साथ सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। रणछोर जी हालांकि उ.प्र. से जुड़ा हुआ क्षेत्र है, यहां भी भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ स्थान मानकर प्रत्येक संक्रांति को विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। वहीं बेतवा नदी पर स्थित बहोरा घाट पर स्थित शिवालय की पूजा-अर्चना के साथ मेले का आयोजन किया जाता है। सिद्ध क्षेत्र मोला डेम और नहारगढ़ में भी इस दौरान मेला का आयोजन किया गया। केथन तट पर स्थित घाटबमूरिया में भी मकर संक्रांति पर धार्मिक आयोजन होने की परंपरा बनी हुई है।
थूबोन जी में निकली श्रीजी की शोभायात्रा
अतिशय क्षेत्र थूबोन जी में मकर संक्रांति पर्व पर जैन विमानोत्सव कार्यक्रम के दौरान श्रीजी की आकर्षक शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान जिलेभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर विमानोत्सव कार्यक्रम में उपस्थित होकर आकर्षक शोभायात्रा के दर्शन लाभ उठाए। इससे पूर्व भगवान जी का अभिषेक किया गया, अभिषेक का सिलसिला दोपहर साढ़े 11 बजे से शुरु हुआ। इस दौरान भगवान् जी का अभिषेक किया गया।
मेलों में बिकते हैं हाथी-घोड़े और वाहन
मकर संक्रांति पर यूं तो जिलेभर में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर मेलों का आयोजन किया जाता है। इन स्थानों पर जहां संगम तटों पर स्नान, दान और देव स्थानों पर पूजा-अर्चना करने का प्रचलन है। वहीं मेले में लकड़ी, मिट्टïी से बने ट्रक, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर सहित अनेक वाहनों को खरीदने का भी प्रचलन है, तो शकर से बने हाथी, घोड़े को खरीदने की परंपरा है। उक्त सामग्री बच्चों के खेलने और खाने के उद्देश्य से खरीदी जाती है।
बच्चों में दिखा विशेष उत्साह
मकर संक्रांति का त्यौहार हो और बच्चे हल्ला गुल्ला न करें ऐसा तो हो ही नहीं सकता। जो बच्चे भी सुबह होते ही हाथों में गडग़डिय़ा, चकिया, गाड़ी आदि लेकर मोहल्लों की सडक़ों पर घूमते हुये दिखाई दिये। वहीं युवा वर्ग ने पर्व को प्रतिवर्ष की भांति पिकनिक मनाकर किया। त्यौहार के पूर्व ही युवा वर्ग ने पिकनिक स्पॉट पर जाकर मस्ती करने का मन बना लिया था। जिसके तहत उन्होंने क्रिकेट खेलकर इस दिन का लुत्फ उठाया।

Updated : 2016-01-16T05:30:00+05:30
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