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भ्रष्टाचार पर नकेल के लिये कानून में सख्त बदलाव को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी

भ्रष्टाचार पर नकेल के लिये कानून में सख्त बदलाव को केन्द्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी
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नई दिल्ली । देश में बढ़ते भ्रष्टाचार पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन को मंजूरी दे दी जिसके तहत अब भ्रष्टाचार के मामले में त्वरित एवं कठोर कार्रवाई की जा सकेगी। नये प्रावधानों के तहत भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों का दो वर्ष के अन्दर निपटारा करना अनिवार्य होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई केन्द्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस आशय की मंजूरी दी गई। इसके तहत राज्यसभा में लम्बित ‘भ्रष्टाचार निरोधक संशोधन विधेयक 2013’ में संशोधन करने के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है, जिसमें रिश्वत देने वालों और लेने वाले दोनों को और ज्यादा कठोर सज़ा देने का प्रावधान है। छह माह की न्यूनतम सज़ा को भी बढ़ाकर तीन साल तथा अधिकतम पांच से सात वर्ष करने का प्रावधान है। सात वर्ष की सज़ा भ्रष्टाचार के गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है। प्रस्तावित संशोधनों में जिला न्यायालय की जगह अब निचली अदालत के पास भ्रष्टाचारी की संपत्ति कुर्क करने का अधिकार होगा। मंत्रिमंडल ने स्मार्ट सिटी योजना का नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने और 100 स्मार्ट सिटी बनाने को मंजूरी दे दी। इसमें मध्यप्रदेश के चार शहर भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर शामिल हैं। साथ ही पुरानी आवसीय योजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है। मंत्रिमंडल ने अनाज के 14 प्रतिशत नमी, छह प्रतिशत टूट-फूट और दो प्रतिशत तक चमक की कमी के पूर्व फैसले को भी बदलने का निर्णय लिया है। प्रा​कृतिक आपदाओं से फसलों के चौपट होने और किसानों की दुर्दशा के मद्देनज़़र यह फैसला लिया गया है। एक अन्य फैसले के तहत देश में वन भूमि को अन्य कार्यों के लिये उपयोग में लेने को रोकने हेतु अनिवार्य वन स्थापना कोष विधेयक 2015 को संसद के चालू सत्र में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी गई। इस विधेयक में वन लगाने की राशि को प्रभावी, पारदर्शी और तीव्र गति से अपयोग सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है। यह राशि राष्ट्रीयकृत बैंको में रखी जाती है। ऐसा होने से ग्रामीण क्षेत्रों में खासकर आदिवासी क्षेत्रों में संसाधन और रोजगार के अवसर बढेंगे।

Updated : 2015-04-29T05:30:00+05:30
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