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भोपाल या इंदौर जाएंगे नरहरि

* निगमायुक्त, एडीएम का हो सकता है तबादला

* अंचलके अधिकारियों में हो सकता है बदलाव

ग्वालियर, विशेष संवाददाता। विधानसभा और लोकसभा चुनाव के चलते पिछले दो साल से प्रशाकीय फेरबदल पर लगी रोक हटते ही ग्वालियर-चंबल संभाग में अधिकारियों की नए तरीके से जमावट और कसावट को लेकर चर्चाएं तेज हो गईं हैं। जिलाधीश के रूप में बेहतर कामकाज के पुरस्कार स्वरूप पी.नरहरि को भोपाल या इंदौर में बतौर जिलाधीश भेजा जा सकता है। निगमायुक्त अजय गुप्ता को भी दतिया या श्योपुर में किसी एक जगह स्थानातंरित किए जाने की संभावना है।
श्री नरहरि के स्थानातंरण की चर्चाएं तो लोकसभा चुनाव के बाद से चल रहीं हैं,लेकिन अब तबादलों से रोक हटने के बाद इस संभावना को और ज्यादा बल मिला है। नरहरि को इंदौर या भोपाल की कलेक्टरी मिल सकती है। चंूकि इंदौर जिलाधीश आकाश त्रिपाठी लंबे अवकाश पर चले गए हैं, इसलिए नरहरि को इंदौर स्थानातंरित किए जाने की संभावना ज्यादा बताई जा रही है। ग्वालियर के निगमायुक्त अजय गुप्ता को श्योपुर या दतिया जैसे किसी छोटे जिले का कलेक्टर बनाए जाने की चर्चा है। हालांकि गुप्ता ग्वालियर छोड़कर कहीं अन्यत्र जाने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। एडीएम विदिशा मुखर्जी को यहां करीब चार साल होने को आ गए, इसलिए तबादलों के दौर में वे भी बदली जा सकती हैं। चार साल पहले उन्हें जबलपुर से यहां पदस्थ किया गया था। राजस्व मंडल, भू-अभिलेख एवं बंदोबस्त में पदस्थ आईएएस अधिकारियों को मैदानी पदस्थापना देने पर भी विचार हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो राजस्व मंडल के सचिव सुहेल अली की लॉटरी खुल सकती है।

अंचल में भी होगा फेरबदल
भिंड जिलाधीश मधुकर आग्नेय को हटाए जाने की सबसे ज्यादा संभावना बताई जा रही है। आग्नेय के बारे में खबर है कि पिछले दिनों किसानों को लेकर की गई उनकी कथित टिप्पणी वल्लभ भवन में खासी चर्चा में है। इसके बाद से ही आग्नेय अवकाश पर भी चले गए थे। सोमवार को मुख्यमंत्री के गोहद आगमन पर वे आगवानी के लिए लौट आए। कयास लगाया जा रहा है कि उन्हें हटाकर सरकार किसानों के बीच पसरी नाराजगी दूर कर सकती है। दतिया जिलाधीश प्रकाश जांगरे तथा श्योपुर जिलाधीश धनजंय भदौरिया के कामकाज को लेकर आमजन नाराज नहीं है। इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इन्हें बदले जाने की चर्चा है। अपनी तेजतर्रार कार्यशैली और मुख्यमंत्री ऑनलाइन के काम में अच्छी पैठ होने के चलते उन्हें किसी बड़े जिले की कमान भी सौंपी जा सकती है।*

Updated : 2015-04-14T05:30:00+05:30
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