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हंगामा भोपाल में, रिमोट दिल्ली में

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व्यापमं घोटाले को लेकर नई सियासत


अतुल तारे/भोपाल।
क्या प्रदेश की राजधानी भोपाल में बीते-रोज कांग्रेस के ड्रामेबाजी की स्क्रिप्ट देश की राजधानी नई दिल्ली में लिखी गई है। यह सवाल प्रदेश के राजनीतिक वातावरण को गरम किए हुए है। व्यापमं घोटाले में कौन-कौन दोषी हैं, क्या सत्ता के शीर्ष की भी इसमें संलिप्तता है, यह जांच का विषय हो सकता है और एसआईटी अपना यह काम कर भी रही है। पर कल कांग्रेस की गुटीय राजनीति में अलग-अलग ध्रुवों पर खड़े नेताओं का व्यापमं घोटाले को लेकर मंच साझा करना पर्दे के पीछे लिखी जा रही एक नई कहानी की ओर संकेत अवश्य करता है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में व्यापमं घोटाले की जांच एस.आई.टी.कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने जांच के निर्देश दिए थे। अब तक इस घोटाले के आरोप में प्रदेश के पूर्व वरिष्ठ मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जेल की सीखचों में हैं। कांग्रेस ने घोटाले में मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा करने का प्रयास विधानसभा, लोकसभा और हाल ही में स्थानीय निकाय चुनाव में भी किया पर जनता ने कांग्रेस को ही खारिज किया। इस बीच जांच अपनी गति से जारी थी। कल अचानक प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह एस.टी.एफ. कार्यालय पर गए फिर दो अन्य नेताओं पूर्व केन्द्रीय मंत्री कमलनाथ, ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ एक पत्रकार वार्ता की और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को निशाने पर लेकर इस्तीफे की मांग की। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस की गुटीय राजनीति में ये नेता लंबे समय से दूरी बनाए हुए हैं, पर कल तीनों का एक साथ आना प्रदेश की राजधानी में एक नए घटनाक्रम की ओर इशारा कर रहा है। ये तीनों नेता क्या कांग्रेस हाईकमान के इशारे पर एक साथ आए या इसके पीछे कोई नई सियासत है। यह प्रश्न कल भोपाल के राजनीतिक तापमान को गरम किए हुए रहा। सूत्र बताते हैं कि सर्वश्री ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं कमलनाथ श्री दिग्विजयसिंह के साथ पत्रकार वार्ता के पक्ष में नहीं थे पर ये आए, अब इसके पीछे क्या दबाव है इसका खुलासा आने वाले दिनों में हो सकता है। सूत्रों का यह भी कहना है कि कल पत्रकारवार्ता में राज्यपाल पर नरमी दिखाने के पीछे भी एक रणनीति है। राज्यपाल पर नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने का दबाव दिल्ली में कांग्रेस की तरफ से बनाया जा रहा है। कांग्रेस की नीति राज्यपाल से इस्तीफा लेकर मुख्यमंत्री पर दबाव बढ़ाने की है।
इधर एस.आई.टी. के अनुसार आरोप वही पुराने हैं, कागजात भी वही पुराने हैं। सिवाय एक नए प्रपत्र के जिसकी जांच कराई जाएगी। प्रश्न यह उठ रहा है कि एकाएक हड़बड़ी में बिना किसी खास तैयारी के दो वरिष्ठ वकीलों की मौजूदगी में कांग्रेस के ये नेता क्या साबित करना चाहते थे या इसका रिमोट कहीं और है? प्रदेश के कांग्रेसी अपने नेताओं की अचानक हुई इस सक्रियता को देखकर हतप्रभ हैं। 


Updated : 2015-02-18T05:30:00+05:30
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