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आठ माह में पूरी नहीं हुई निविदा प्रक्रिया

ग्वालियर। रेलवे स्टेशन पर सफाई कार्य का ठेका जिस कम्पनी को दिया गया था उसका ठेका दस दिन पहले समाप्त हो गया। दस दिन गुजरने के बाबजूद भी झांसी मण्डल नया ठेका देने के लिए टेण्डर प्रक्रिया नहीं कर सका है। इस प्रक्रिया में विलम्ब क्यों हो रहा है? इस पर कोई भी अधिकारी खुल कर बोलने के लिए तैयार नहीं है। झांसी मण्डल के अधिकारियों से जब इस बारे में जानने का प्रयास किया गया तो उनका कहना था कि पिछले आठ माह से निविदा की प्रक्रिया चल रही है। खास बात यह है कि विभाग निविदा प्रक्रिया का कार्य आठ माह में भी पूरा नहीं कर सका। जानकारी के अनुसार स्टेशन की साफ-सफाई के लिए रेलवे द्वारा वर्ष 2011 में जबलपुर की मैसर्स अल्ट्रा क्लीन एण्ड केयर सर्विसेज कम्पनी को ठेका दिया गया था, लेकिन कम्पनी का ठेका करीब नौ माह पहले ही समाप्त हो चुका था, लेकिन झांसी मण्डल द्वारा तीन-तीन माह का समय अतिरिक्त तीन वार बढ़ाया गया, लेकिन आखिर में पांच फरवरी को सफाई ठेका की समय अवधि समाप्त हो गई। इस बार कम्पनी द्वारा ठेका की अवधि बढ़वाने में कोई रुचि भी नहीं दिखाई और न ही निविदा प्रक्रिया में भाग लेने में रुचि दिखाई।
सूत्र बताते हैं कि कम्पनी पर लगातार पैनल्टी लगाई गई, जिससे उसे कोई खासा लाभ न होते हुए नुकसान उठाना पड़ा। इस कारण कम्पनी ने सफाई कार्य करने से रेलवे प्रशासन को मना कर दिया, लेकिन खास बात यह रही कि जब झांसी मण्डल को यह पता था कि पांच फरवरी को सफाई का ठेका समाप्त होने वाला है तब भी किसी अन्य को सफाई कार्य का ठेका देने के बारे में न तो सोचा गया और न ही निविदा आमंत्रित की गई। यदि निविदा आमंत्रित की जाती तो इस समय स्टेशन की सफाई का कार्य कुछ सफाई कर्मियों के कंधों पर नहीं टिका होता और स्टेशन की स्वच्छता बनी रहती, लेकिन अब स्टेशन पर जगह-जगह गंदगी देखने को मिल रही है।

1.80 लाख प्रतिमाह लगी पैनल्टी
सूत्र बताते हैं कि जबलपुर की कम्पनी का ठेका 329990 रुपए प्रति माह में दिया गया था, जिसे प्लेटफार्म नम्बर 1, 2 व 3 की सफाई का कार्य करना होता था और प्लेटफार्म नम्बर चार की सफाई कार्य स्थानीय रेलवे सफाई कर्मचारियों द्वारा किया जाता था। सफाई कार्य के लिए कम्पनी द्वारा करीब 40 से 50 कर्मचारी रख रखे थे, जो तीन शिफ्टों में सफाई कार्य करते थे। गंदगी मिलने पर रेलवे प्रशासन द्वारा कम्पनी से प्रति माह 1.80 लाख रुपए की पैनल्टी वसूल की गई। इस कारण कम्पनी को प्रतिमाह घाटा उठाना पड़ा।

सफाई का भार 25 कर्मचारियों पर
सूत्र बताते हैं कि अब आलम यह है कि जहां तीन प्लेटफार्म पर 40 से 50 सफाई कर्मी साफ-सफाई करते थे वहीं आज चारों प्लेटफार्मों पर मात्र 25 कर्मचारी सफाई कार्य करते हैं, जबकि रात्रि में केवल तीन सफाई कर्मी ही रह जाते हैं।

''निविदा प्रक्रिया मंगवाई जा चुकी है और वह करीब आठ माह से प्रोसेस में है। जल्द ही सफाई का ठेका जिस कम्पनी को मिलेगा, वह सफाई कार्य प्रारंभ कर देगी। ''
रविप्रकाश
जनसम्पर्क अधिकारी, रेलवे मण्डल झांसी

Updated : 2015-02-16T05:30:00+05:30
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