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भीषण गर्मी व लू से जनजीवन हलाकान

बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग ने की टीमें गठित
भिण्ड । भिण्ड जिले में इन दिनों भीषण गर्मी व लू चल रही है, इससे बचने के लिए जहां लोग अपने निजी नुस्के इस्तेमाल कर रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग भी भीषण गर्मी व लू से फैलने वाली बीमारियों से बचाव के उपाय करने में जुटा है।
भिण्ड जिले में इन दिनों तापमान काफी बढ़ा हुआ 46 डिग्री सेंटीग्रेट तक पहुंच गया है। तापमान से लोगों का जीना दूभर हो गया है, लोगों ने दोपहरी में घरों से निकलना बन्द कर दिया है, वहीं गर्मी के साथ-साथ शाम को तेज अंधड़ भी चलने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इन दिनों मौसम में भीषण गर्मी एवं लू तापघाट एवं ग्रीष्म ऋतु में फैलने वाली बीमारियों से बचाव के लिए जिले व ब्लॉक स्तर पर टीम गठित की गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राकेश शर्मा ने बताया कि ग्रीष्म ऋतु में विभिन्न संक्रामक रोग आंत्रशोध, पेचिस, दस्त, कॉलरा, पीलिया, मस्तिष्क ज्वर तथा महामारियोंं के फैलने की आशंका रहती है। स्वच्छ जल के अभाव में अधिक सावधानी अपनाने की आवश्यकता रहती है। जिसके बचाव हेतु जिले व ब्लॉक स्तर पर काम्बेट टीम का गठन कर सभी खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र के समस्या मूलक ग्रामों को चिन्हित कर उन पर निगरानी रखें। क्षेत्र में किसी भी प्रकार की बीमारी फैलने पर दूरभाष नं. 07534-244843 पर सूचित करें। समस्त मैदानी अमले को निर्देशित किया गया है वे अपने-अपने क्षेत्र की जनता को शुद्ध पेयजल के सेवन हेतु स्वास्थ्य शिक्षा दें एवं पीने के कुए का मासिक क्लोरीनिकेशन करें।
इसी प्रकार वर्तमान में निरंतर तापमान बढऩे से लू एवं ताप की संभावना बढ़ जाती है। इसके लिए आमजन से आग्रह है कि वे घर से बाहर निकलने से पहले गर्दन के पिछले भाग, कान व सिर को गमछे या तौलिया से ढककर ही धूप में निकलें, रंगीन चश्मे का इस्तेमाल करें, हमेशा सफेद एवं हल्के रंग के एवं ढीले कपड़ों का इस्तेमाल करें, पानी अधिक मात्रा में पिएं एवं पेय पदार्थों का अत्याधिक सेवन करें, भीड़ एवं अत्याधिक यात्रा न करें।
यदि कोई व्यक्ति लू से पीडि़त है तो प्राथमिक उपचार निम्न तरीके से करें। रोगी को तुरंत छायादार जगह पर कपड़े ढीले कर लिटाएं एवं हवा करें, होश में आने पर ठण्डे पेय पदार्थ, जीवन रक्षक घोल, कच्चा आम का पना, प्याज का रस अथवा जौ के आंटे को भी ताप नियंत्रण हेतु मला जा सकता है।

Updated : 2014-06-02T05:30:00+05:30
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