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भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को नोबेल शांति पुरस्कार

भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को नोबेल शांति पुरस्कार
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नई दिल्ली | भारत के कैलाश सत्यार्थी और पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई को इस साल शांति का नोबेल पुरस्कार दिया गया है। कैलाश सत्यार्थी बचपन बचाओ आंदोलन के प्रणेता हैं। अस्सी हजार से ज्यादा बच्चों की जिंदगी बदलने वाले कैलाश सत्यार्थी को पाकिस्तान की मलाला युसुफजई के साथ इस साल का नोबेल शांति पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। 11 जनवरी 1954 को जन्मे कैलाश सत्यार्थी को भोपाल गैस त्रासदी के राहत अभियान और बच्चों के लिए काम करने को लेकर दुनिया का ये सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार मिला है। पिछले दो दशकों से वे बालश्रम के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और इस आंदोलन को वैश्विक स्तर पर ले जाने के लिए जाने जाते हैं।
दूसरी ओर, पाकिस्तान के स्वात घाटी की मलाला ने सिर्फ 14 साल की उम्र से ही लड़कियों की शिक्षा के पक्ष में आवाज उठाई थी, क्योंकि तब स्वात पर तालिबान के कब्जे के बाद सारे स्कूल बंद कर दिए गए थे। इतना ही नहीं मलाला को आवाज उठाने की कीमत अदा करनी पड़ी और स्कूल से लौटते समय आतंकियों ने उन पर हमला कर दिया। आतंकियों ने मलाला के सिर में गोली मार दी, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए लंदन लाया गया और अब वह लड़कियों की शिक्षा को लेकर पूरे दुनिया का चेहरा बन चुकी हैं। कुल 278 प्रतिभागियों की सूची में से कैलाश सत्यार्थी और मलाला यूसुफजई को विजेता घोषित किया गया। कमेटी के मुताबिक इस साल सबसे अधिक प्रतिभागियों ने इस पुरस्कार के लिए नामांकन भरा था। साल 2013 में 259 प्रतिभागियों ने नामांकन किया था

Updated : 2014-10-10T05:30:00+05:30
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