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भारत के मंगलयान की तकनीकी खराबी दूर, चौथा चरण सफल

भारत के मंगलयान की तकनीकी खराबी दूर, चौथा चरण सफल
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बेंगलुरू | भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की कक्षा में और ऊपर उठाने के काम के चौथे चरण को सफलतापूर्वकअंजाम दिया। इसरो ने बताया कि तड़के 05 बजकर 03 मिनट 50 सेकेंड पर बेंगलूरू के पीन्या स्थित संगठन के अंतरिक्षयान नियंत्रण केंद्र (एससीसी) से कमांड देकर मंगलयान की कक्षा बदलने का काम किया गया। यान की पृथ्वी से अधिकतम दूरी अब 71 हजार 636 किलोमीटर से बढ़कर एक लाख 18 हजार 642 किलोमीटर हो गई है। हालांकि पहले के तीन चरणों की तरह यह चरण अबाध नहीं रहा। इसरो के मुताबिक मंगलयान के कक्षा उन्नयन का चौथा चरण कल ही पूरा किया जाना था। लेकिन सुबह जब मंगलयान को ऊपर उठाने के लिए इंजन चालू किया गया तो कुछ तकनीकी खराबी के कारण इसे 78 हजार 276 किलोमीटर की ऊंचाई तक ही उठाया जा सका, जबकि लक्ष्य एक लाख किलोमीटर के करीब का था। इसरो ने तब कहा था कि मंगलयान पूरी तरह ठीक है और चौथे चरण का पूरक उन्नयन आज तड़के निश्चित किया गया था।
मंगलवार को लगभग 304 सेकेंड के आपरेशन में यान को 118642 किलोमीटर की ऊंचाई तक उठाया गया। मंगलयान की कक्षा का आगामी दिनों में और उन्नयन करते हुए धीरे-धीरे यान को उस कक्षा में स्थापित कर दिया जाएगा जहां से 30 नवंबर की मध्य रात्रि के बाद यान को मंगलयात्रा पर रवाना किया जाएगा।
पहली तीन प्रक्रियाओं के सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद यान को कक्षा में आगे बढाने की चौथी प्रक्रिया कल पूरी तरह सफल नहीं हो पाई थी। इसके बाद इसरो ने मंगलवार सुबह पांच बजे पूरक प्रक्रिया की योजना बनाई थी ताकि एक लाख किलोमीटर से आगे के दूरस्थ बिंदू के लक्ष्य को हासिल किया जा सके। मंगलयान को कक्षा में आगे ले जाने की पांचवीं प्रक्रिया 16 नवंबर को होगी जिसके तहत इसकी अधिकतम दूरी बढ़ाकर 1,92,000 किलोमीटर की जाएगी।
चौथी प्रक्रिया के तहत एक लाख किलोमीटर की दूरी तय करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन यान सिर्फ 78,276 किलोमीटर की दूरी तय कर सका। इसरो ने बताया कि एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत जब प्राथमिक एवं ‘अतिरिक्त क्वाइल’ को एक साथ उर्जा दी गई तब तरल ईंजन को उर्जा का प्रवाह रूक गया। उम्मीद के मुताबिक अभियान ‘एटीट्यूड कंट्रोल थ्रस्टर्स ’ के उपयोग से जारी रहा। यान ‘सामान्य’ है और 100 फीसदी सुरक्षित है।
इन पांचों प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद अभियान के लिए एक दिसंबर का दिन काफी महत्वपूर्ण होगा जब परा-मंगल अंत:प्रक्षेपण रात करीब 12 बजकर 42 मिनट पर होगा। इसरो के पीएसएलवी सी-25 ने 1350 किलोग्राम के मंगलयान (मार्स आर्बिटर) को गत मंगलवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से दोपहर दो बजकर 38 मिनट पर प्रक्षेपण के 44 मिनट बाद पृथ्वी की कक्षा में भेज दिया था। इसके साथ ही 450 करोड़ रूपये के इस अभियान का पहला चरण सफलतापूर्वक पूरा हो गया था।

Updated : 2013-11-12T05:30:00+05:30
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