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पश्चिमी उ.प्र. की आठों सीटों पर उलझे सियासी समीकरण

पश्चिमी उ.प्र. की आठों सीटों पर उलझे सियासी समीकरण

मेरठ। लोकसभा चुनावों के पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आठ लोकसभा सीटों पर 11 अप्रैल को मतदान होना है। इस बार के लोकसभा चुनावों में सियासी समीकरण पूरी तरह से उलझे हुए हैं। जहां भाजपा पर 2014 का प्रदर्शन दोहराने का दबाव है वहीं गठबंधन एवं कांग्रेस उम्मीदवारों के सामने भाजपा का तिलिस्म तोड़ने की चुनौती है। सभी सीटों पर स्थिति अभी साफ नहीं है।

वर्ष 2014 में पश्चिमी उत्तर प्र्रदेश सभी सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। इसमें मेरठ-हापुड़ सीट पर भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल जीते थे तो बागपत पर डाॅ सत्यपाल सिंह ने रालोद के प्रमुख अजित सिंह को हराया था। इसी तरह कैराना से दिवंगत हुकुम सिंह, मुजफ्फरनगर से डाॅ संजीव बालियान, सहारनपुर से राघव लखनपाल शर्मा, बिजनौर से कुंवर भारतेंद्र सिंह, गाजियाबाद से जनरल वीके सिंह और गौतमबुद्ध नगर से डाॅ महेश शर्मा विजयी हुए थे।

केवल कैराना सीट पर बदला उम्मीदवार

भाजपा के हाथों शिकस्त खाए बसपा, सपा और रालोद ने गठबंधन कर लिया है तो कांग्रेस भी अपने स्वर्णिम अतीत की तलाश में है। भाजपा ने कैराना को छोड़कर अपने पुराने सांसदों को ही चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा ने दिवंगत बाबू हुकुम सिंह की बेटी मृगांका की जगह गंगोह विधायक प्रदीप चौधरी को टिकट दिया है। इससे भाजपा को क्षेत्र में नुकसान हो रहा है। लोग खुलकर भाजपा उम्मीदवार प्रदीप चौधरी का विरोध कर रहे हैं। गठबंधन से यहां सपा के टिकट पर तबस्सुम हसन और कांग्रेस से पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक चुनाव मैदान में है। यहां पर अभी तक त्रिकोणीय मुकाबला माना जा रहा है।

याकूब की बजाय मजबूरी में राजेंद्र को वोट की बात

मेरठ-हापुड़ से दो बार के भाजपा सांसद राजेंद्र अग्रवाल को चुनाव-प्रचार के दौरान लोगों का विरोध झेलना पड़ रहा है। लोग उन पर विकास कार्य न कराने और व्यवहार ठीक नहीं होने के आरोप लगा रहे हैं। वहीं भाजपा नेता भी अदंर ही अंदर विरोध कर रहे हैं लेकिन अमित शाह के पेंच कसने के बाद भाजपा नेता प्रचार में दिखाई दे रहे हैं। बसपा ने यहां पूर्व मंत्री एवं कट्टर मुस्लिम छवि के याकूब कुरैशी को टिकट दिया है। कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री बाबू बनारसी दास के बेटे हरेंद्र अग्रवाल चुनावी ताल ठोंक रहे हैं। भाजपा के समर्थकों कहना है कि याकूब को चुनाव जिताने की बजाय मजबूरी में ही सही वह राजेंद्र अग्रवाल को वोट देंगे। हरेंद्र अग्रवाल ने गठबंधन उम्मीदवार की परेशानी को बढ़ाया हुआ है।

वोटरों का जातिगत आंकड़ा

मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर 2.25 लाख वैश्य वोटर हैं। ठाकुर 60 हजार, ब्राह्मण डेढ़ लाख, जाट एक लाख, गुर्जर 90 हजार, मुस्लिम साढ़े पांच लाख, दलित तीन लाख, पंजाबी 50 हजार, पिछड़े व अन्य करीब चार लाख वोटर हैं।

बागपत में भाजपा और रालोद के बीच होगा मुकाबला

रालोद ने बागपत में पूर्व सांसद जयंत चौधरी को मैदान में उतारा है। कांग्रेस का कोई उम्मीदवार नहीं होने से यहां भाजपा-रालोद के बीच सीधा मुकाबला है। दोनों दलों के उम्मीदवार वोटरों को अपने पाले में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे। भाजपा ने बागपत में अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चुनावी सभाएं कराई हैं तो जयंत चौधरी खुद ताल प्रचार में जुटे हैं।

मुजफ्फरनगर सीट पर सीधा मुकाबला

अपने राजनीतिक जीवन का अहम चुनाव लड़ रहे रालोद मुखिया अजित सिंह के सामने भाजपा उम्मीदवार डाॅ संजीव बालियान फिर से चुनाव जीतने की कोशिश में है। यहां पर भी कांग्रेस प्रत्याशी नहीं होने से चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है। भाजपा के पक्ष में कई दिग्गज प्रचार कर रहे हैं तो रालोद मुखिया खुद प्रचार में लगे हैं।

सहारनपुर में मसूद का अस्तित्व दांव पर

सहारनपुर लोकसभा सीट पर भाजपा ने राघव लखनपाल शर्मा पर दांव खेला है तो कांग्रेस ने इमरान मसूद औऱ बसपा ने हाजी फजलुर्रहमान को उम्मीदवार बनाया है। इससे यहां त्रिकोणीय मुकाबला होगा। मुस्लिम मतों के बंटने की स्थिति में भाजपा उम्मीदवार को फायदा हो सकता है।

नसीमुद्दीन ने बिगाड़े गठबंधन के समीकरण

बिजनौर सीट पर कांग्रेस ने बसपा के पूर्व दिग्गज नसीमुद्दीन सिद्दीकी को टिकट देकर सपा-बसपा-रालोद गठबंधन के समीकरण बिगाड़ दिए हैं। नसीमुद्दीन के आने से बसपा उम्मीदवार मलूक नागर बेचैन हैं। भाजपा के कुंवर भारतेंद्र सिंह फिर से चुनाव मैदान में है।

गाजियाबाद में भी त्रिकोणीय संघर्ष

भाजपा से केन्द्रीय राज्य मंत्री जनरल वीके सिंह, सपा से पूर्व विधायक सुरेश बंसल और कांग्रेस से डाॅली शर्मा चुनाव मैदान में है। इससे यहां चुनावी मुकाबला रोचक हो गया है। वर्ष 2014 में वीके सिंह ने पौने छह लाख वोटों से जीत हासिल की थी। अब उनके समीकरण भी उलझ गए हैं।

नोएडा में भी चुनावी समीकरण उलझे

गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार डाॅ महेश शर्मा, बसपा के सतबीर नागर चुनावी रण में हैं। भाजपा यहां खुद को जीता हुआ मानकर चल रही है तो बसपा उम्मीदवार ने भी अपनी जीत का ऐलान किया हुआ है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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