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गुरू का निर्णय ही छात्र के भविष्य को दिशा देता है

गुरू का निर्णय ही छात्र के भविष्य को दिशा देता है

डीईआई में संगीत की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन

आगरा। बिना अच्छे गुरू की संगत से किसी भी विधा में पारंगकता नहीं पायी जा सकती है। संगीत में तो विशेष रूप से गुरूमुखी विद्या का महत्व अधिक है। यह कहना है बीएचयू के तबला विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण उद्धव का। बुधवार को वह दयालबाग शिक्षण संस्थान में आयोजित दो दिवसीय संगीत की अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन छात्रों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने छात्रों को तबला के विभिन्न घरानों खासकर बनारसी बाज की विशेषताओं से परिचित कराया। उन्होंने उठान, कायदा, रेला, गतों के निकास के अलावा संगत की विभिन्न तकनीकी पक्षों को छात्रों के समक्ष रखा। प्रवीण ने कहा कि गुरू का निर्णय ही छात्र के भविष्य को दिशा देता है।

दूसरे सत्र में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक नृत्यांगना काजल शर्मा ने नृत्य को दृश्य काव्य के रूप में बताया। साथ ही नृत्य के भावपक्ष व कला पक्ष पर छात्रों के साथ चर्चा की। आपने लय में यति को सपष्ट करते हुए गोपुच्छा यति को बंदिश के माध्यम से समझाया। काजल शर्मा के साथ तबला पर प्रो. नीलू शर्मा व नगमें पर डॉ. ईश्वर सिंह खींचीं ने संगत की। अतिथि कलाकारों को स्मृतिचिन्ह देकर डीईआई संगीत विभागध्यक्ष प्रो. एसके सत्संगी ने सम्मानित किया। धन्यवाद प्रो. सुधा सहगल व संचालन डॉ. नीतू गुप्ता ने किया। कार्यक्रम में प्रो. रवि भटनागर, प्रो. गिरधारीलाल शर्मा, डॉ. गौतम तिवारी, डॉ. नीतू गुप्ता, प्रो. रीमा जौहरी, प्रभात वशिष्ठ आदि उपस्थित रहे।


Naveen ( 1696 )

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