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मप्र की ये हाईप्रोफाइल सीटें, जहां सबकी नजर

मप्र की ये हाईप्रोफाइल सीटें, जहां सबकी नजर

भोपाल/ स्वदेश विशेष संवाददाता। लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा के साथ ही प्रदेश की राजनीति में दखल रखने वाले प्रमुख राजनीतिक दल भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारी शुरु कर दी है। वैसे तो 4 माह पूर्व सम्पन्न हुए विधानसभा चुनाव के कारण मध्यप्रदेश में पिछले एक साल से चुनाव का माहौल बना हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिला था, जिसमे मध्य प्रदेश की सीटों का बड़ा योगदान था। प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में भाजपा ने 27 और कांग्रेस ने दो सीटों पर जीत दर्ज की थी। लेकिन इस बार हालात बदल गए हैं, हाल ही में कांग्रेस विधानसभा चुनाव में मिली जीत से उत्साहित है और ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतने की जुगत भिड़ा रही है, वहीं भाजपा प्रदेश की नई सरकार के तीन माह के कार्यकाल और विधानसभा चुनाव में किए वादों को पूरा न कर पाने के मुद्दों को लेकर कांग्रेस के खिलाफ साल 2014 जैसे माहौल की पुनरावृत्ति करने का प्रयास कर रही है। भाजपा देश में सक्षम नेतृत्व को मुद्दा बनाकर मध्यप्रदेश में ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना चाहती है। ऐसे में इस बार माना जा रहा है कि भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकबला होगा। देश भर की नजर मध्य प्रदेश पर है, मध्यप्रदेश की 29 सीटों में से 6 सीटें ऐसी हैं जिन्हें हाईप्रोफाइल माना जाता है और इन सीटों पर पर सबकी नजर है।

इन सीटों पर सबकी नजर

17वीं लोकसभा के लिए होने वाले चुनाव में मध्यप्रदेश की आधा दर्जन सीटों को हाईप्रोफाइल माना जाता है। इनमें लोकसभा स्पीकर श्रीमती सुमित्रा महाजन की इंदौर लोकसभा सीट, कांग्रेस महासचिव ज्योजिरादित्य सिंधिया की गुना सीट, कमलनाथ के मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के कारण खाली हुई छिंदवाड़ा सीट, केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर की ग्वालियर सीट, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के गृह जिले की राजगढ़ सीट तथा राजधानी की भोपाल सीट शामिल हैं। अब हम सिलसिलेवार इन 6 लोकसभा सीटों के बारे में प्रमुख तथ्यों के पर चर्चा करते हैं और जानते हैं कि क्या खास है इन लोकसभा सीटों का इतिहास और क्यों है इन सीटों पर सबकी नजर।

ग्वालियर

इस कारण है प्रमुख सीट: राजनीतिक रुप से तो इस संसदीय सीट पर सिंधिया राजघराने की दखल रहती है, परन्तु पिछले कुछ चुनावों से यह सीट भाजपा का गढ़ बन चुकी है।

2014 के परिणाम: 2014 के चुनाव में भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर ने कांग्रेस के अशोक सिंह को हराया था। इस चुनाव में तोमर को जहां 4 लाख 42 हजार 796 (44.69 प्रतिशत) मत मिले थे तो वहीं अशोक सिंह को 4लाख 13 हजार 097 (41.69 प्रतिशत) मत मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 29 हजार 699 मतों का था।

2019 में क्यों खास: इस सीट से इस बार ज्योतिरादित्य सिंधिया और उनकी पत्नी प्रियदर्शनी राजे में से किसी एक के चुनाव लडऩे की अटकलें हैं। नरेन्द्र सिंह तोमर वर्तमान में केन्द्रीय मंत्री हैं।

ग्वालियर का जातिगत समीकरण: ग्वालियर की 2011 की जनगणना के मुताबिक ग्वालियर की जनसंख्या 27लाख 30 हजार 472 है। 51.04 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 48.96 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। ग्वालियर में 19.59 प्रतिशत लोग अनुसूचित जाती के हैं और 5.5 प्रतिशत लोग अनुसूचित जनजाति के हैं।

राजगढ़

इस कारण है प्रमुख सीट: राजगढ़ लोकसभा सीट राज्य की हाईप्रोफाइल सीटों में से एक है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह का गृह जिला है। यहां से दो बार दिग्विजय सिंह और पांच बार उनके भाई लक्ष्मण सिंह सांसद रहे।

2014 के परिणाम: 2014 के चुनाव में भाजपा के रोडमल नागर ने कांग्रेस के नारायण सिंह को हराया था। इस चुनाव में नागर को 5 लाख 96 हजार 727 (59.04 प्रतिशत) मत और नारायण सिंह को 3 लाख 67 हजार 990 (36.41 प्रतिशत) मत मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 2 लाख 28 हजार 737 मतों का था।

2019 में क्यों खास: इस बार इस लोकसभा सीट से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के चुनाव लड़ने की संभावना है।

राजगढ़ का जातिगत समीकरण: साल 2011 की जनगणना के मुताबिक राजगढ़ में 24 लाख 89 हजार 435 जनसंख्या है। यहां की 81.39 प्रतिशत जनसंख्या ग्रामीण इलाके और 18.61 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। इस क्षेत्र में गुर्जर, यादव और महाजन मतदाताओं की संख्या अच्छी खासी है। 18.68 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 5.84 अनुसूचित जनजाति के हैं।

भोपाल

इस कारण है प्रमुख सीट : राजधानी की यह सीट भाजपा की पारंपारिक सीट। 1984 से लगातार भाजपा यहां से चुनाव जीत रही है।

2014 के परिणाम : साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आलोक संजर ने कांग्रेस के प्रकाश मंगीलाल शर्मा (पीसी शर्मा) को पराजित किया था। आलोक संजर को इस सीट में 7 लाख 14 हजार 178 (63.19 प्रतिशत) और प्रकाश मंगीलाल को 3 लाख 43 हजार 482 (30.39 प्रतिशत) मत मिले थे। आलोक ने प्रकाश मंगीलाल को 3 लाख 70 हजार 696 मतों से हराया था।

2019 में क्यों खास : इस बार यहां भाजपा की ओर से किसी बड़े दिग्गत नेता को लड़ाए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही है।

भोपाल का जातिगत समीकरण : साल 2011 की जनगणना के मुताबिक भोपाल की जनसंख्या 26 लाख 79 हजार 574 है। 23.71 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है जबकि 76.29 प्रतिशत शहरी इलाके में रहती है। 15.38 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति की है और 2.79 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की है।

छिंदवाड़ा

इस कारण है प्रमुख सीट: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ का गृह क्षेत्र का गृह जिला होने के साथ ही उनका संसदीय क्षेत्र भी है।

2014 के परिणाम: 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्यप्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री कमलनाथ ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने भाजपा के चौधरी चंद्रभान सिंह को हराया था। कमलनाथ को 5 लाख 59 हजार 755 (50.54 प्रतिशत) मत और चंद्रभान सिंह को 4 लाख 43 हजार 218 (40.02 प्रतिशत) मत मिले थे। यानी दोनों के बीच जीत हार का अंतर 1 लाख 16 हजार 537 मतों का था।

2019 में क्यों खास: कमलनाथ के मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद से इस सीट पर अब उनके बेटे नकुलनाथ के चुनाव लड़ने की चर्चा है। कमलनाथ यहां से हर बार लोकसभा का चुनाव लड़े, एक उप चुनाव को छोड़कर कभी पराजित नही हुए। । सिर्फ 1997 में हुए उप-चुनाव में भाजपा के सुंदरलाल पटवा ने कमलनाथ को हराया था। कमलनाथ यहां से 10 बार सांसद चुने गए।

छिंदवाड़ा का जातिगत समीकरण: 2011 की जनगणना के मुताबिक छिंदवाड़ा की जनसंख्या 20 लाख 90 हजार 922 है। यहां की 75.84 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 24.16 प्रतिशत शहरी क्षेत्र में रहती है। 11.11 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति और 36.82 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति की है।

इंदौर

इस कारण है प्रमुख सीट: यह लोकसभा क्षेत्र भारतीय संसद की स्पीकर सुमित्रा महाजन की परंपरागत सीट है। इस सीट पर साल 1989 से उनका कब्जा रहा है।

2014 के परिणाम: भाजपा की उम्मीदवार के रुप में सुमित्रा महाजन ने 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सत्यनारायण पटेल को हराया था। सुमित्रा महाजन को 8 लाख 54 हजार 972 (64.93 प्रतिशत) मत मिले थे, जबकि सत्यनारायण को 3 लाख 88 हजार 071 (29.47 प्रतिशत) मत मिले थे। सुमित्रा महाजन ने इस चुनाव में 4 लाख 66 हजार 901 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी।

2019 में क्यों खास : सुमित्रा महाजन एक बार फिर वे यहां से टिकट की दावेदार हैं वहीं, कांग्रेस की तरफ से किसी बड़े चेहरे को उतारने के लिए तलाश चल रही है।

इंदौर का जातिगत समीकरण: साल 2011 की जनगणना के मुताबिक इंदौर की जनसंख्या 34 लाख 76 हजार 667 है। यहां की ज्यादातर आबादी शहरी क्षेत्र में रहती ही। इंदौर की 82.21 प्रतिशत आबादी शहरी और 17.79 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है। 16.75 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति, 4.21 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति के लोगों की है।

गुना

इस कारण है प्रमुख सीट: सिंधिया परिवार की परंपरागत सीट।

2014 के परिणाम: 2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा के जयभान सिंह पवैया को हराया था। इस चुनाव में सिंधिया को 5 लाख 17 हजार 036 (52.94 प्रतिशत) मत मिले थे और पवैया को 3 लाख 96 हजार 244 (40.57 प्रतिशत) मत मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 1 लाख 20 हजार 792 मतों का था। 2004 से ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां से लगातार कांग्रेस के टिकट पर सांसद हैं।

2019 में क्यों खास: इस सीट पर सिंधिया परिवार का ही कब्जा रहा है। जब भी सिंधिया परिवार का कोई सदस्य इस सीट से चुनाव लड़ता है जीत उसी की होती है। राजमाता विजयाराजे सिंधिया यहां से 6 बार, माधवराव सिंधिया 4 बार सांसद रहे। ज्योतिरादित्य सिंधिया के एक बार फिर यहां से लड़ने की बात चल रही है।

गुना का जातिगत समीकरण: यहां मुख्यत: हिन्दू, मुस्लिम तथा जैन समुदाय के लोग रहते हैं। 2011 की जनगणना के मुताबिक गुना की जनसंख्या 24 लाख 93 हजार 675 है। यहां की 76.66 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 23.34 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। 18.11 प्रतिशत लोग अनुसूचित जाति और 13.94 प्रतिशत लोग अनुसूचित जनजाति के लोग हैं।

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Naveen ( 1696 )

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