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दिल्ली तो हम ही जीतेंगे : शीला दीक्षित

गठबंधन पर आलाकमान करेगा फैसला

दिल्ली तो हम ही जीतेंगे : शीला दीक्षित

नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर दिल्ली की सातों सीटों पर गठबंधन को लेकर मचे घमासान के बीच प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने गेंद एक बार फिर से आलाकमान के पाले में डाल दी है। आप पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर वे आज भी अपने रूख पर कायम हैं लेकिन अंत में निर्णय आलाकमान पर छोड़ देती हैं। शीला दीक्षित कहती हैं कि पार्टी और उनका हमेशा से यह मानना रहा है कि सैद्धांतिक लड़ाई के चलते हमें आप पार्टी के साथ लड़ने के बजाए अकेले ही चुनावी समर में उतरना चाहिए। जिसके लिए पार्टी पूरी तरह कमर कस भी चुकी है। अहम बात यह है कि उनके साथ तीन कार्यकारी अध्यक्ष भी पूरी शिद्दत के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। बाकायदा 24 उम्मीदवारों की सूची उन्होंने केंद्रीय समिति को भेजी गई है। गुरूवार को इस सूची को शार्टलिस्ट करनी थी लेकिन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के वायनाड चले जाने से मामला अटका पड़ा है। पार्टी के दिल्ली प्रदेश मुख्यालय में लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी की ओर से जारी घोषणा पत्र पर राय व्यक्त करने आई श्रीमती दीक्षित ने 'स्वदेश' के साथ बेबाक अंदाज में बातचीत की। दिल्ली में पंद्रह साल राज करने वाली शीला दीक्षित की जनमानस में खास छवि रही है। युवाओं में लोकप्रिय तो हम उम्र के लोगों के बीच अपनापन का भाव उन्हें औरों से अलग बना देता है। यही कारण है कि 82 के पार खड़ी शीला दीक्षित एक और पारी खेलने का जज्बा रखती हैं। पेश है उनके साथ बातचीत के अंश-

सवाल:आप पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर आखिर पेंच कहां फंसा हुआ है? कहीं ऐसा न हो कि सूत पतला कातने के फेर में कहीं धागा ही न टूट जाए।

जवाब: नहीं, ऐसी बात नहीं है। हम अब भी अपने रूख पर कायम हैं। हम पूरी तैयारी के साथ मैदान में खड़े हैं। लेकिन, आखिरी फैसला तो आलाकमान को करना है।

सवाल: पंद्रह साल के विकास को आप किस तरह देखती हैं? कांग्रेस के सत्ता गंवाने के बाद क्या लोग दोबारा कांग्रेस में उम्मीद देख रहे?

जवाब: देखिए, हम काम करने में विश्वास रखने वाले लोग हैं। कांग्रेस ने दिल्ली के हर वर्ग के लोगों का ध्यान रखा। आज का शासन देखों, अराजकता के अलावा कुछ नहीं दिखता। इतने भारी-भरकम पुलों को देखिए जिन पर दिल्ली दौड़ती नजर आती है। वरना दिल्ली में लगने वाले जाम से क्या निजात मिल पाती?

सवाल: आप पार्टी के साथ गठबंधन का मामला गले की हड्डी बनकर रह गया जो ना तो निगलते बन रहा है और ना ही उगलते ही। क्या यह सही नहीं है कि इस पेचीदा मामले में दिल्ली इकाई में दो फाड़ हो गया है?

जवाब: ऐसा नहीं है। पार्टी के अपने विचार और सिद्धांत को लेकर हमें मतदाताओं के बीच जाना होता है। हमने अपने विचार लोगों के बीच रखे। लोग मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के काम को देख रहे हैं। लोग अब भी उन्हें हमारी सरकार के नीतिगत निर्णय और काम याद करते हैं। इसमें दो फाड़ होने की बात कहां से आ गई? हम आज भी सर्व सम्मति से फैसला लेने में विश्वास रखते हैं। आलाकमान का जो भी निर्णय होगा हम उस पर आगे बढ़ेंगे। और दिल्ली की जनता की भलाई के लिए काम करेंगे।

सवाल: आपके शासन में उपराज्यपाल के साथ टकराव या अन्य दूसरी चीजें नहीं आई। क्या कारण है मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आए दिन उपराज्यपाल के साथ टकराव करते नजर आते हैं?

जवाब: मुस्कराते हुए, यह तो आप केजरीवाल जी से ही जाकर पूछिए। जनता के लिए अगर काम करना है तो इसमें संसाधन या अधिकारों को लेकर रोना नहीं रोया जाता।

सवाल: मुख्यमंत्री केजरीवाल लगातार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की बात कर रहे हैं। वे इसे चुनाव में बखूवी मुद्दा बनाने जा रहे हैं। इसके इतर, वे कांग्रेस पर भी दबाव बना रहे हैं कि वह इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में जगह दे। क्या आप भी दिल्ली को पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग करेंगी?

जवाब: मैने हमेशा से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की बात की है। लेकिन, कई बार कुछ चीजें समान नहीं हो पाती, जैसाकि हम सोचते हैं। यह संविधान प्रदत्त मामला है। मेरा मानना है इस पर कानूनी राय बने फिर अमल में लाया जाए।

सवाल: कांग्रेस की 'न्याय' योजना को आप किस तरह देखती हैं? अर्थ शास्त्री इसके क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं।

जवाब: कांग्रेस समावेशी सोच वाली पार्टी है। हमारी पार्टी सभी वर्गाें के हित के लिए कल्याणकारी सोच में विश्वास रखती है। क्या देश मनरेगा, खाद्य सुरक्षा अधिनियम, आरटीआई जैसे कानूनों को भूल सकता है? मेरा मानना है न्याय योजना इस कड़ी में क्रांतिकारी योजना है जिससे सभी वर्ग के लोगों की राह आसान होगी।

सवाल: दिल्ली में मुकाबला अगर त्रिकोणीय बनता है तब आप भाजपा को किस नजरिए से देखती हैं? क्या वह गेम चेंजर बनकर उभरेगी?

जवाब: भाजपा दिल्ली में कहीं भी लड़ाई में नजर नहीं आ रही। उसने पिछले चुनाव में सीटें जरूर जीती थीं लेकिन इस बार का मामला कुछ अलग है।

सवाल: दिल्ली में कांग्रेस कितनी सीटें जीतने का मादा रखती है?

जवाब: फिलहाल तो हम सातों सीटों पर उम्मीदवार उतारने जा रहे हैं। और सभी सीटें जीतेंगे।

सवाल: कहा जा रहा है कि आप 2020 के विधानसभा की तैयारी में हैं। लोकसभा चुनाव तो सेमी फायनल है।

जवाब: नहीं, हम पूरी मुस्तैदी के साथ लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हैं। कांग्रेस दिल्ली व अन्य राज्यों में भी कमाल का प्रदर्शन करेगी। 2020 के लिए अभी काफी समय है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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