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प्रियंका - राहुल बने पोस्टर के देवी-देवता

बिहार की राजधानी पटना में उनके राम रूप पोस्टर लग गए। उनकी बहन प्रियंका क्यों पीछे रहें, उनके भी पोस्टर लग गए। प्रयागराज के कुम्भ मेला क्षेत्र में पोस्टर लगे हैं।

प्रियंका - राहुल बने पोस्टर के देवी-देवता

- सियाराम पांडेय शांत

समर्थक भी बेहतर जानते हैं कि खुशामद ही से आमद है,इसलिए बड़ी खुशामद है। वे पूरे खुशामदी हो जाते हैं। नेता को ऐसा जकड़ते हैं कि सच से उसका साबका ही नहीं होने देते। राहुल गांधी भगवान हो गए। भगवान के आदर्श अवतार से उनका नाम जुड़ गया। बिहार की राजधानी पटना में उनके राम रूप पोस्टर लग गए। उनकी बहन प्रियंका क्यों पीछे रहें,उनके भी पोस्टर लग गए। प्रयागराज के कुम्भ मेला क्षेत्र में पोस्टर लगे हैं। उसमें उन्हें सिंह वाहिनी दुर्गा के रूप में दिखाया गया है। पोस्टर पर लिखा है कि कांग्रेस की दुर्गा करेगी शत्रुओं का नाश। दुर्गा जगन्माता है।वह प्राणी मात्र का कल्याण करती हैं लेकिन यह दुर्गा कांग्रेस की है,वह जिन शत्रुओं का नाश करने वाली है,वे शत्रु आम जन के नहीं ,कांग्रेस के हैं। कांग्रेस के शत्रु कौन-कौन हैं,यह देखने वाली बात है। जहां तक भगवान राम की बात है तो उनकी बहन शांता श्रृंगी ऋषि को ब्याही थीं। वे देवी नहीं थीं। योग्य ऋषि की योग्य पत्नी थीं। प्रियंका मां दुर्गा के अवतार रूप में प्रकट हुई हैं। उनकी दादी इंदिरा गांधी ने जब भारत और पाकिस्तान को अलग कराया था तब अटल जी ने उन्हें एक बार दुर्गा कहा था। वे तो एक बड़ा काम करके दुर्गा की उपाधि हासिल करने में सफल हुई थीं। प्रियंका ने ऐसा क्या खास किया है। उनके पति रॉबर्ट वाड्रा पर आर्थिक अनियमितताओं के आरोप हैं। किसी आरोपी की पत्नी देवी कैसे हो सकती है? कांग्रेस बांग्ला देश को अलग करने का श्रेय ले सकती है लेकिन उसे समझना होगा कि बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग कराकर उसकी मदद ही की थी। भारत की राह में बैमनस्य के कांटे बो दिए थे। उस समय पाकिस्तान आंतरिक संघर्ष से जूझ रहा था। बंगाल के लोग,बलूचिस्तान के लोग,पंजाब के लोग पाकिस्तान सेे हक की लड़ाई लड़ रहे थे। सब आपस में मर कट रहे थे। इंदिरा गांधी ने अपनी अदूरदर्शिता से उनका संकट दूर कर दिया और उसे हमेशा के लिए भारत विरोधी बना दिया। दुर्भाग्यवश मोदी सरकार को घेरकर राहुल भी पाकिस्तान की ही मदद कर रहे हैं?

बलिया से भाजपा विधायक ने राहुल को रावण और प्रियंका को शूर्पनखा कह दिया है,यह उचित नहीं है। इसकी आलोचना की जानी चाहिए।किसी भी महिला का निरादर न करने की हमारी संस्कृति रही है। पटना में राहुल गांधी के दो तरह के पोस्टर लगे हैं। एक में उन्हें राम बताया गया है और दूसरे में सेनापति। घोड़े पर बैठकर तलवार भांजते वे जा रहे हैं। विरोधी इसे उनका दस्यु अवतार भी कह सकते है। व्याख्या तो राजनीतिज्ञ अपनी सुविधा के अनुसार ही करते हैं। राजस्थान,छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के विधान सभा चुनाव में,कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में राहुल मंदिर-मंदिर घूम रहे थे। शर्ट पर जनेऊ पहन रहे थे। मतलब अपने को हिन्दू साबित कर रहे थे। अब वे अपने को भगवान साबित कर रहे हैं? राहुल और उनके भक्तों को यह कौन समझाए कि भगवान राम ने रथ पर चढ़कर युद्ध किया था,घोड़े पर चढ़कर नहीं। धनुष बाण से युद्ध किया था,तलवार से नहीं। जहाँ तक ईश्वर की बात है तो वह सर्वव्यापक है। हममें तुममें खड़ग खम्भ में सबमें व्यापत राम।

तुलसी बाबा ने तो खुल्लमखुल्ला कह दिया-ईश्वर अंश जीव अविनासी।चेतन अमल सहज सुखरासी। इनमें से कोई भी गुण राहुल और प्रियंका में हैं क्या ? पूर्ण और अंश में अंतर तो होता ही है। जो इस फर्क को नहीं समझता,वह तो कायदतन इंसान भी नहीं कहा जा सकता। ऐसे में एक शायर की शायरी याद आती है। जो लोग जान बूझ कर नादान बन गए,मेरा ख्याल था कि वे इंसान बन गए। जो आदमी ढंग का इंसान न बन सके,वह भगवान कैसे बन सकता है? भगवान दिखावा नहीं करता। भगवान बिना किसी ठोस वजह के किसी की आलोचना नहीं करता। भगवान अपने भक्तों के यहां जाता है,उन्हें कुछ देकर आता है। देता भी कुछ इस तरह है कि गृहीता को भी पता नहीं चलता कि उसे कुछ दिया गया है। उसकी मदद भी होती है,लेकिन उसे पता नहीं चलता कि उसकी मदद ईश्वर कर रहा है। अपने सुदामा जी को ही ले लो,भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें विदा किया,प्रेम से विदा किया।राजमहल के मुख्यद्वार तक छोड़ने आए।सुदामा रास्ते भर सोचते रहे- दिया तो कुछ भी नहीं। जो मेरे पास था वह भी खा गए। कोरे सम्मान से गुजारा तो नहीं होता।परिवार तो नहीं चलता। कहने का मतलब है कि भगवान मदद करने का भी दिखावा नहीं करता। वह गरीबों की विवशता पर हंसता नहीं, रोता है। यही तो मनुष्यता है।मनुष्य तो वही है जो मनुष्य के काम आए।

राम होने का दावा करना और राम बनना बिल्कुल अलग बात है। राम किसी से मिलने जाते हैं तो उसका कल्याण करते है। राहुल गांधी दो दलित महिलाओं के घर गए,उसका ढिंढोरा तो पीटा लेकिन उनकी माली स्थिति में तो कोई सुधार नहीं आया। उन्हें योगी आदित्यनाथ से प्रेरणा लेनी चाहिए।उनके यहां एक लड़की आती है। अपने पिता की बनाई खड़ाऊं देती है।अपने दिवंगत पिता की इच्छा बताती है और बदले में उसे मिलता है योगी का प्यार,5 लाख का चेक,प्रधानमंत्री आवास, दिवंगत पिता का बीमा क्लेम और बेहतर शिक्षा की व्यवस्था। राहुल गांधी ने ऐसा एक भी नेक काम किया हो तो बतावें। हाल ही में वे गोवा के बीमार मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का हाल जानने उनके घर गए और वहां से लौटकर अपना राजनीतिक हित साधा। फ्रांस्वा ओलांद से मिले और ऐसा बयान दिया कि उन्हें कहना पड़ा कि राहुल झूठे हैं। भगवान राम ने कभी झूठ नहीं बोला। उन्होंने तो अपने शत्रु के भी सम्मान का ध्यान दिया। रावण से भी कहा कि तुम कहो तो तुम्हें जिंदा कर दूं। राहुल को समझना होगा कि व्यक्ति भगवान नहीं हो सकता। राहुल पहले सम्पूर्ण भारतीय तो बनें। जिस दिन वे भारतीय बन जाएंगे देवत्व गुण उनमें खुद बख़ुद आ जाएंगे।देवताओं के आदर्शों का अनुगमन ही मनुष्यता है और देवत्व का प्रदर्शन अहंकार।रावण और कंस खुद को देवता मान बैठे थे। क्या हुआ,यह किसी से छिपा नहीं है। अहम ब्रह्मास्मि का भाव भक्ति के अर्थों में तो ठीक है लेकिन अहंकार रूप में यह कथमपि वरेण्य नहीं है। राम कहलाने से पहले,दुर्गा के रूप में अपने पोस्टर लगवाने से पहले राहुल और प्रियंका को रामायण और देवी भागवत का वाचन जरूर कर लेना चाहिए। वरना उनकी अहमियत एक बहुरुपिए से अधिक नहीं होगी। साथ ही यह संदेश भी जाएगा कि नकली आदमी नकल तो कर सकता है,असली नहीं हो सकता। (हिंस)

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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