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निर्जला एकादशी का जाने महत्व, यह न करें

निर्जला एकादशी का जाने महत्व, यह न करें

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर २६ हो जाती है। ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को निर्जला एकादशी कहते है इस व्रत मे पानी का पीना वर्जित है इसिलिये इसको निर्जला एकादशी कहते है। यह इस बार यह 13 जून को है। भीम ने केवल यही एकादशी करके सारी एकादशियों का फल प्राप्त किया था। सनातन धर्म में श्री हरि को सर्वाधिक प्रिय एकादशी व्रत है।

एक बार महर्षि व्यास से भीम ने कहा,'भगवन! युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, माता कुन्ती और द्रौपदी, सभी एकादशी व्रत करते हैं। मुझसे भी व्रत रखने को कहते हैं, परन्तु मैं तो बिना खाए रह नहीं सकता। मुझे तो कोई ऐसा व्रत बताइए, जिसे मैं कर सकूं और जिससे स्वर्ग की प्राप्ति भी हो। तब व्यास जी ने कहा- 'कुंतीनंदन, धर्म की यही विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता, बल्कि सबके योग्य साधन व्रत-नियमों की लचीली व्यवस्था भी करता है। ज्येष्ठ मास में सूर्य के वृष या मिथुन राशि में रहने पर शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी को तुम व्रत करो। श्री कृष्ण ने मुझे इस बारे में बताया था। इसे करने से तुम्हें वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त होगा और सुख, यश प्राप्त करने के बाद स्वर्ग भी मिलेगा।'

भीम ने बडे़ साहस के साथ निर्जला एकादशी का व्रत किया, लेकिन इस कठिन व्रत के कारण सुबह होने तक वह बेहोश हो गए। तब गंगाजल, तुलसी चरणामृत, प्रसाद देकर अन्य पांडव उन्हें होश में लाए। भीम ने द्वादशी को स्नान आदि कर भगवान केशव की पूजा कर व्रत सम्पन्न किया। इसी कारण इसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है। निर्जल रह कर ब्राह्मण या जरूरतमंद आदमी को हर हाल में शुद्ध पानी से भरा घड़ा इस मंत्र के साथ दान करना चाहिए-

देवदेव हृषीकेश संसारार्णवतारक। उदकुम्भप्रदानेन नय मां परमां गतिम् ।।

अर्थात संसार सागर से तारने वाले देवदेव हृषीकेश! इस जल के घड़े का दान करने से आप मुझे परम गति की प्राप्ति कराइए।.

व्रती को 'ओम नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप दिन-रात करते रहना चाहिए। साथ ही सामर्थ्य हो तो गर्मी में काम आने वाली वस्तुओं- वस्त्र, छाता, जूता, फल आदि का दान भी दक्षिणा सहित जरूर करना चाहिए।

-आज एकादशी के दिन इस मंत्र के पाठ से विष्णु सहस्रनाम के जप के समान पुण्य प्राप्त होता है l

-एकादशी के दिन बाल नहीं कटवाने चाहिए।

-एकादशी को चावल व साबूदाना खाना वर्जित है | एकादशी को शिम्बी (सेम) ना खाएं अन्यथा पुत्र का नाश होता है।

-जो दोनों पक्षों की एकादशियों को आँवले के रस का प्रयोग कर स्नान करते हैं, उनके पाप नष्ट हो जाते हैं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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