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कुंभ में स्नान करने से शनि की साढ़े साती, ढैया और राहु-केतु की पीड़ा होगी शांत

अगले वर्ष लगेगा कुंभ का मेला

कुंभ में स्नान करने से शनि की साढ़े साती, ढैया और राहु-केतु की पीड़ा होगी शांत

हिन्दू धर्म में कुंभ मेला एक महत्वपूर्ण पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसमें देश-विदेश से सैकड़ों श्रद्धालु स्नान करने के लिए आते हैं। कुंभ का संस्कृत अर्थ कलश होता है। हिन्दू धर्म में कुंभ का पर्व 12 वर्ष के अंतराल में आता है। छह वर्ष के अंतराल में अर्ध कुंभ होता है। कुंभ का मेला मकर संक्रांति के दिन से प्रारंभ होता है। हिन्दू धर्म के अनुसार मान्यता है कि किसी भी कुंभ मेले में पवित्र नदी में स्नान या तीन डुबकी लगाने से सभी पुराने पाप धुल जाते हैं और मनुष्य को जन्म-पुनर्जन्म तथा मृत्यु-मोक्ष की प्राप्ति होती है। ज्योतिषाचार्य डॉ. एच.सी. जैन के अनुसार इस बार का अर्ध कुंभ इलाहाबाद (प्रयागराज) में मनाया जाएगा। इस अर्ध कुंभ में तीन शाही स्नान होंगे, जिसमें पहला शाही स्नान पौष नवमी मंगलवार 14-15 जनवरी मकर संक्रांति के दिन, दूसरा 4 फरवरी मोनी अमावस्या और तीसरा शाही स्नान 10 फरवरी वसंत पंचमी के दिन पड़ेगा। ज्योतिषाचार्य के अनुसार इस दिन पृथ्वी से उच्च लोकों के द्वार खुलते हैं और इस दिन स्नान करने से आत्मा को उच्च लोकों की प्राप्ति सहजता से हो जाती है। इस दिन यहां स्नान करना साक्षात स्वर्ग दर्शन माना जाता है। इसी के साथ कुंभ में स्नान करने से शनि की साढ़े साती, ढैया और राहु-केतु की पीड़ा शांत होती है।

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि प्रत्येक स्थान पर प्रति बारहवें वर्ष और प्रयाग में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्ध कुंभ होता है। वर्ष 2013 का कुंभ प्रयाग में हुआ था। वर्ष 2019 में प्रयाग में अर्ध कुंभ मेले का आयोजन होगा। संक्रांति के दिन होने वाले इस योग को कुंभ स्नान योग कहते हैं। इस दिन को विशेष मांगलिक माना जाता है। पृथ्वी से उच्च लोकों के द्वारा इस ही दिन खुलते हैं और इस प्रकार इस दिन स्नान करने से आत्मा को उच्च लोकों की प्राप्ति सहजता से हो जाती है। कुंभ में स्नान करना साक्षात स्वर्ग दर्शन माना जाता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार कुंभ का असाधारण महत्व बृहस्पति के कुंभ राशि में प्रवेश तथा सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ जुड़ा है। ग्रहों की स्थिति हरिद्वार से बहती गंगा के किनारे पर स्थित हरकी पौड़ी स्थान पर गंगा जल को औषधिकृत करती है तथा उन दिनों यह अमृतमय हो जाती है। यही कारण है कि अपनी अंतरात्मा की शुद्धि हेतु पवित्र स्नान करने लाखों श्रद्धालु यहां आते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से अर्ध कुंभ के काल में ग्रहों की स्थिति एकाग्रता तथा ध्यान साधना के लिए उत्कृष्ट होती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि अर्ध कुंभ महापर्व में स्नान करने से करोड़ों सूर्य ग्रहण के पुण्य का फल मिलता है। कुंभ में स्नान करने से शनि की साढ़े साती, ढैया और राहु-केतु की पीड़ा शांत होती है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार माघ अमावस्या के दिन यदि वृश्चिक राशि में गुरु और सूर्य व चन्द्रमा मकर राशि में हों तो महान तीर्थ प्रयागराज में पुण्य सलिला त्रिवेणी के संगम पर अर्ध कुंभ महापर्व का योग बनता है।


2019 कुंभ मेले के शाही स्नान

14-15 जनवरी मकर संक्रांति (पहला शाही स्नान)

21 जनवरी पौष पूर्णिमा

31 जनवरी पौष एकादशी स्नान

04 फरवरी मौनी अमावस्या (मुख्य शाही स्नान, दूसरा शाही स्नान)

10 फरवरी वसंत पंचमी (तीसरा शाही स्नान)

16 फरवरी माघी एकादशी

19 फरवरी माघी पूर्णिमा

04 मार्च महा शिवरात्रि

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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