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विधायक जालम सिंह पटेल के घर पर खिले चार ब्रम्ह कमल

-विधायक जालम सिंह के घर गोटेगांव में खिले चार ब्रम्ह कमल -परिवार के लोगों ने की पूजा, आसपास के लोगों ने भी किए दर्शन

विधायक जालम सिंह पटेल के घर पर खिले चार ब्रम्ह कमल

नरसिंहपुर। नवरात्रि के पावन पर्व की पंचमी के दिन केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद पटेल व उनके भाई नरसिंहपुर से विधायक जालम सिंह पटेल के निज निवास गोटेगांव में चार ब्रह्म कमल खिले। ब्रह्म कमल खिलने की सूचना पर विधायक परिवार के लोगों द्वारा पूजा-पाठ किये गए और अन्‍य लोगों ने भी इन फूलों के दर्शन किए। कहते हैं कि किसी भी घर में ब्रह्म कमल का खिलना व दर्शन करना दोनों शुभ होते हैं।

बताया जाता है कि यह अत्यंत सुंदर चमकते सितारे जैसा आकार लिए मादक सुगंध वाला पुष्‍प है। ब्रह्म कमल को हिमालयी फूलों का सम्राट भी कहा गया है। यह कमल आधी रात के बाद खिलता है इसलिए इसे खिलते देखना स्वप्न समान ही है। एक विश्वास है कि अगर इसे खिलते समय देख कर कोई कामना की जाए तो अतिशीघ्र वह पूरी हो जाती है।

ब्रह्म कमल के पौधे में एक साल में केवल एक बार ही फूल आता है जो कि सिर्फ रात्रि में ही खिलता है। दुर्लभता के इस गुण के कारण से ब्रह्म कमल को शुभ माना जाता है। इस फूल की विशेषता यह है कि जब यह खिलता है तो इसमें ब्रह्म देव तथा त्रिशूल की आकृति बनकर उभर आती है। ब्रह्म कमल न तो खरीदा जाना चाहिए और न ही इसे बेचा जाता है। इस पुष्प को देवताओं का प्रिय पुष्प माना गया है और इसमें जादुई प्रभाव भी होता है। इस दुर्लभ पुष्प की प्राप्ति आसानी से नहीं होती क्योंकि इसे देवताओं के आशीर्वाद सरीखे माना जाता है।

यह साल में एक ही बार जुलाई-सितंबर के बीच खिलता है और एक ही रात रहता है। इसका खिलना देर रात आरंभ होता है तथा दस से ग्यारह बजे तक यह पूरा खिल जाता है। मध्य रात्रि से इसका बंद होना भी शुरू हो जाता है और सुबह तक यह मुरझा चुका होता है। इसकी सुगंध प्रिय होती है और इसकी पंखुड़ियों से टपका जल अमृत समान होता है। भाग्यशाली व्यक्ति ही इसे खिलते हुए देखते हैं और यह उन्हें सुख-समृद्धि से भर देता है। ब्रह्म कमल का खिलना एक अनोखी घटना है। सुगंध, आकार और रंग में यह अद्भुत होता है। भाग्योदय की सूचना देने वाला यह पुष्प पवित्रता और शुभता का प्रतीक माना गया है। जिस तरह बर्फ से ढका हिमालयी क्षेत्र देवताओं का निवास माना जाता है, उसी तरह बर्फीले क्षेत्र में खिलने वाले इस फूल को भी देव पुष्प मान लिया गया है। मानसून के मौसम में यह ऊंचाइयों पर यह खिलता है । धार्मिक मान्यता है कि ब्रह्म कमल अर्थात ब्रह्मा का कमल, फूल मां नन्दा का प्रिय पुष्प है। इसलिए इसे नन्दाष्टमी के समय में तोड़ा जाता है और इसके तोड़ने के भी सख्त नियम होते हैं। कहा जाता है कि आम तौर पर फूल सूर्यास्त के बाद नहीं खिलते, पर ब्रह्म कमल एक ऐसा फूल है जिसे खिलने के लिए सूर्य के अस्त होने का इंतजार करना पड़ता है।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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