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रोहिंग्या शरणार्थी बनने के प्रयास में था अलमक्की

नमाज पढऩे के दौरान मस्जिद से भागा बांग्लादेशी घुसपैठिया अहमद अलमक्की रोहिंग्या शरणार्थी बनने के प्रयास मेंं था।

रोहिंग्या शरणार्थी बनने के प्रयास में था अलमक्की

क्यों भागा घुसपैठिया पुलिस नहीं कर सकी खुलासा ?

ग्वालियर | नमाज पढऩे के दौरान मस्जिद से भागा बांग्लादेशी घुसपैठिया अहमद अलमक्की रोहिंग्या शरणार्थी बनने के प्रयास मेंं था। शहर से भागने के बाद अलमक्की अपने परिचित के यहां हैदराबाद पहुंचा था, और शरणार्थी बनने के लिए कागजात तैयार करा रहा था। पुलिस घुसपैठिए से भागने के कारण का खुलासा नहीं कर सकी । अलमक्की को पुलिस ने तीन दिन की रिमांड पर लिया है और पूछताछ जारी है।

12 जून को एजी कार्यालय मस्जिद से नमाज पढऩे के बाद थाने लौटते समय भागा बांग्लादेशी घुसपैठिया अहमद अलमक्की ग्वालियर से ट्रेन से सीधा हैदराबाद पहुंचा था। यहां पर उसके परिचित इस्माइल के यहां पर उसने पनाह ली। इस्माइल की मदद से घुसपैठिया रोहिंग्या शरणार्थी बनने का प्रयास कर रहा था। अलमक्की हैदराबाद के जहांगीराबाद बन्दलागढ़ा थाना चन्द्रायन गुट्टा में छिपा हुआ था। जहां से हैदराबाद पुलिस की सहायता से अपराध शाखा और पड़ाव थाना पुलिस ने उसे दबोचा।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अपराध शाखा पंकज पाण्डे ने जानकारी देते हुए बताया कि अहमद अलमक्की हैदराबाद में रोहिंग्या शरणार्थी बनने के लिए कागजात तैयार कर रहा था। ग्वालियर से भागने के बाद अलमक्की अपने परिचित इस्माइल के घर सुलैमना नगर एमएम पहाड़ी थाना राजेन्द्र नगर पहुंचा। इस्माइल और गुना निवासी इदरीश ने अलमक्की को भगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। पुलिस ने इदरीश को भी पकड़ लिया है। पुलिस बांग्लादेशी घुसपैठिए से पुलिस अभिरक्षा से भागने के कारण का खुलासा नहीं कर सकी है। जबकि अलमक्की की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होती हंै। अलमक्की काफी शातिर दिमाग का है, उसके लेपटॉप के कोड को जानकार भी नहीं खोल सके थे। पुलिस ने अलमक्की को तीन दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ प्रारंभ कर दी है।

अलमक्की मस्जिद से भागकर रेलवे स्टेशन पहुंचा

12 जून को अलमक्की मस्जिद से भागकर रेलवे स्टेशन पहुंंचा यहां से उसने झंासी तक के लिए ट्रेन पकड़ी। ट्रेन में बातचीत के दौरान उसे पता चला कि जिस ट्रेन में वह बैठा है वह हैदराबाद नहीं जाएगी। झांसी से ट्रेन बदलने के बाद वह दूसरी ट्रेन पर चढ़ गया इसके बाद वह मनमाड़ महाराष्ट्र पहुंंचा। यहां उसने एक बार फिर ट्रेन बदली और सिकन्दराबाद, हैदराबाद पहुुंचा। अलमक्की मस्जिद से सीधा पैदल रेलवे स्टेशन पहुंचा था। पुलिस उसे उस दिन वहां तलाश कर लेती तो शायद पकड़ा जाता ।

हैदराबाद जाते ही सबसे पहले टेबलेट खरीदा :- एएसपी पंकज पांडे ने जानकारी देते हुए बताया कि घुसपैठिए ने हैदराबाद पहुंचने के बाद उसने सबसे पहले एक टेबलेट खरीदा और अपने परिचित व रिश्तेदारों से बातचीत की। पुलिस अब उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि उसने कहां कहां सम्पर्क किया था ।

पांच दिन पहले बनाई थी भागने की योजना

एएसपी पंकज पांडे ने बताया कि अलमक्की ने थाने से भागने की योजना पांच छह दिन पहले बनाई थी। इदरीश से गुना में सम्पर्क कर कहा था कि मुझे यहां से निकालो, इदरीश अलमक्की को भगाने के बाद गुना रवाना हो गया था।

शंका इसलिए भी

अहमद अलमक्की ने अपने भाई ताहिर के बारे में पुलिस को बता दिया तो वह उसके पास क्यों नहीं जाता है। भाई ताहिर फोन करने पर एक लाख रुपए से ज्यादा रकम भेज सकता है तो उसे अपने पास रख क्यों नहीं सकता? पुलिस को ताहिर के बारे में पड़ताल करना चाहिए।

घुसपैठिए के भाई ने भेजे थे रुपए

अहमद अलमक्की को उसके भाई ताहिर ने 56 हजार 700 सौ रुपए हैदराबाद में रहने वाले इस्माइल को भेजे थे। इस्माइल ने उन्हें रुपयों को गुना निवासी इदरीश को दिए। इदरीश ने उन रुपयों को अहमद अलमक्की तक पहुंचाए थे। पुलिस उन खातों की जांच कर रही है जो घुसपैठिए को रुपए भेजने में मदद कर रहे थे। रकम एक लाख से ज्यादा थी लेकिन खुलासा आधा लाख के करीब का हुआ है।

हैदराबाद में पहचान लेकिन पहुंचा था ग्वालियर

बांग्लादेश में अहमद के जिस स्थान पर अलमक्की रहता था वहां केरल निवासी शाकिर का परिचित भी रहता था। केरल, दिल्ली से होते घुसपैठिया कोलकाता के रास्ते भारत पहुंचा था। यहां पर उसकी मदद इस्माइल ने, फिर ग्वालियर में पकड़े जाने पर जेल में इदरीश से मुलाकात हो गई थी। इदरीश ने अलमक्की को भगाने में अहम भूमिका निभाई थी। पुलिस दोनों से अब पूछताछ कर रही है।

मददगार नहीं बख्शे जाएंगे

पुलिस अधीक्षक नवनीत भसीन ने जानकारी देते बताया कि जिसने भी अलमक्की की भागने में मदद की है उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। चाहे वह बाहरी व्यक्ति हो या फिर थाने का स्टॉफ। जांच में जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं अलमक्की को बांग्लादेश भेजने के लिए दिल्ली में उच्च अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा।

अलमक्की अभी भी संदेहास्पद

एएसपी पंकज पांडे से जब इस संबंध में पूछा गया कि अलमक्की पर भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने की संभावना है तो उन्होंने इस बात से इंकार कर दिया कि अहमद अलमक्की को क्लीन चिट नहीं दी जा सकती कुछ भी हो सकता है। बांग्लादेशी घुसपैठिए पर संदेह बरकरार है कि वह जासूस भी हो सकता है। जो किसी मकसद से यहां आया हो और पकड़ा गया।

सऊदी अरब से इसलिए निकाला था

सऊदी अरब में अहमद अलमक्की पुरानी कारों को खरीदने-बेचने का काम करता था। वर्ष 2008 नम्बर की एक कार के वर्ष 2010 के फर्जी कागजात बनाकर उसे बेच दिया था। फर्जीवाड़ा का मामला पकड़े जाने पर पुलिस ने अहमद अलमक्की को पकड़ लिया था। जब उसकी पहचान के बारे में पता किया तो पिता सऊदी अरब का निवासी था जबकि मां बर्मा बांग्लोदश की थी। इसलिए अहमद अलमक्की को सऊदी अरब का निवासी नहीं होने पर वहां से निकाल दिया गया।

अलमक्की को पकडऩे के लिए पुलिस को पहनने पड़े बुर्के

स्थानीय पुलिस ने अहमद अलमक्की को पकडऩे के लिए हैदराबाद में जाकर वेशभूषा तक बदलना पड़ी। कोई पान खाकर चाचा जान बना तो महिला आरक्षक ने बुर्का पहनकर पहचान छिपाई। हैदराबाद पुलिस ने पकडऩे में काफी सहयोग किया।









Swadesh Digital ( 9575 )

स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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