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स्टेशन पर कुछ खाने से पहले सोचे, रेलवे नहीं करता जांच

स्थानीय अधिकारी नहीं करते जांच

स्टेशन पर कुछ खाने से पहले सोचे, रेलवे नहीं करता जांचFile Photo

रेलवे के स्वास्थ्य अधिकारी देख रहे स्टेशन पर साफ-सफाई का काम

ग्वालियर/स्वदेश वेब डेस्क। आप रेलवे स्टेशन पर समोसा, कचौरी या फिर बनी हुई कोई अन्य चीज खा रहे हैं तो खुद ही गुणवत्ता जांच लें। स्टेशन पर खुलेआम बिकने वाली खान-पान की सामग्री आपको बीमार तक कर सकती है। स्टेशन पर खाना बनाते समय सफाई का कोई ख्याल नहीं रखा जाता। खुले व गंदगी में रखी जाने वाली खान-पान सामग्री पर मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। यही नहीं, खान-पान सामग्री पर दिनभर चूहे भी मुंह मारते रहते हैं।

रेलवे ने इन चीजों की गुणवत्ता जांचने के लिए स्वास्थ्य अधिकारी तो नियुक्त किए है, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारी सिर्फ सफाई व्यवस्था पर ध्यान देने में लगे हुए हैं। रेलवे स्टेशन पर संचालित खानपान स्टॉलों पर बिकने वाले खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग एवं गुणवत्ता की जांच के लिए रेल विभाग बड़े स्टेशनों पर स्वास्थ्य अधिकारी नियुक्त करता है। ग्वालियर में सीएचआई तेजपाल सिंह को पदस्थ किया गया है। लेकिन पिछले कई माह से सीएचआई द्वारा एक भी स्टॉल की सैंपलिंग नहीं की है। नियमानुसार अधिकारियों को रेलवे स्टेशन पर संचालित खानपान स्टॉलों पर बिकने वाले खाध पदार्थों की जांच करना चाहिए। लेकिन स्थानीय अधिकारियों की मिली भगत के चलते रेलवे स्टेशन पर कभी खाध पदार्थों की गुणवत्ता की जांच नहीं होती। रेलवे की निगरानी न होने की वजह से रेलवे प्लेटफार्मों पर संचालित खानपान स्टॉलों एवं ट्रालियों में बासी एवं घटिया खाना यात्रियों को उंची कीमतों पर बेचा जा रहा है। पूड़ी, सब्जी, बिरयानी, चावल एवं अन्य पदार्थो में हानिकारक तत्वों को मिलाकर बेचा जा रहा है। इससे यात्रियों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ हो रहा है। निरीक्षक की देखरेख न होने का फायदा वेंडर एवं रेलवे ठेकेदार उठा रहे हैं। वेंडर बासी खाद्य पदार्थों की बिक्री धड़ल्ले से कर रहे हैं। स्टेशन पर गुणवत्ताहीन मिनरल वॉटर भी बेचा जा रहा है। यदि इसकी जांच की जाए तो कई खाद्य एवं पेय पदार्थ अमानक पाए जाएंगे।

रेल मंडल में अनदेखी

रेल मंडल में खाना सप्लाई करने की अनुमति है। यात्री आईआरसीटीसी की वेबसाईट पर इसकी सूचना देकर खाना बुलवा रहे हैं। रोज बड़ी मात्रा में ट्रेनों में खाना सप्लाय किया जा रहा है। ऐसे में यात्रियों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी रेलवे की ही है। रेलवे स्टेशन पर आईआरसीटीसी रेस्टोरेंट सहित अन्य खानपान ईकाइयों पर माह में दो या तीन बार खाद्य वस्तुओं की सैंपलिंग लेने के अलावा वैधता के दस्तावेज जांचे जाते हैं। इसके बाद संचालन की अनुमति दी जाती है। होटलों के खाने को लेकर ऐसी कोई जांच नहीं की जा रही है।

इन स्टेशनों पर खाना उपलब्ध

आईआरसीटीसी द्वारा ग्वालियर, झांसी भोपाल, नागपुर, इटारसी, सतना, उज्जैन, इंदौर पर खाना मंगलवाने की सुविधा दी गई है। इन स्टेशनों पर आईआरसीटीसी एजेंट नियुक्त हैं। व्यवस्था यह है कि आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर ऑर्डर बुक करवाए जाते हैं। स्टेशन पर नियुक्त एजेंट द्वारा होटल संचालक को सूचना देना होती है। यात्री सीधे भी अनुबंधित होटल से खाना मंगवा सकते हैं।

इनका कहना है

समय-समय पर स्टेशन पर बने स्टॉलों पर खाद्य पदार्थों की जांच की जाती है। अगर खान-पान की गुणवत्ता में कोई शिकायत आएगी तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मनोज कुमार सिंह

जनसंपर्क अधिकारी, झांसी मंडल

आईआरसीटीसी से अनुबंधित होटलों में जांच नहीं

रेलवे स्टेशन की हर खानपान यूनिट पर खाद्य वस्तुओं की जांच और सैंपल लेते हुए गड़बड़ी मिलने पर जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन आईआरसीटीसी द्वारा अनुबंधित शहर की होटल के लिए यह प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही है। यहां से प्रतिदिन हजारों यात्रियों को खाना दिया जाता है। बगैर जांच के खाना परोसकर यात्रियों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। दूसरी ओर अनुबंध के मुताबिक आईआरसीटीसी द्वारा तय नियमों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। यात्रियों द्वारा ऑर्डर बुक होने के बाद इसे देने व वेंडर के लिए भी नियम शर्तें हैं। हालात यह है कि होटल से कोई भी व्यक्ति स्टेशन पर सीधा प्रवेश कर यात्री को खाना पहुंचा रहा है। ऐसे में सुरक्षा मापदंडों की भी अनदेखी की जा रही है।

शर्त और अनदेखी

-खाना देने वाले तय वेंडर की अनिवार्यता निर्धारित नहीं है।

-परिचय-पत्र पर आईआरसीटीसी के सक्षम अधिकारी के अलावा स्टेशन मास्टर के हस्ताक्षर जरुरी है।

-बगैर हस्ताक्षर परिचय-पत्र होने पर व्यक्ति या वेंडर को स्टेशन पर बगैर टिकट माना जाएगा।

-यहां वेंडर बगैर परिचय-पत्र के स्टेशन पर प्रवेश कर रहे हैं। जबकि इसे अपने शर्ट पर चस्पा करना होता है।

-कुछ वेंडर खाने के साथ यात्रियों को शराब तक उपलब्ध करवाने में मदद कर रहे हैं।

स्थानीय अधिकारी नहीं करते जांच

रेलवे स्टेशन पर बनने वाले खान-पान की चेकिंग स्थानीय अधिकारी कभी नहीं करते। गंदगी में पड़े खाने को देख अधिकारी मुंह फेरकर चले चले जाते हैं। कार्रवाई नहीं होने के कारण स्टॉल संचालक यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। रात में बना खाना स्टॉल संचालक सुबह के लिए बचा लेते हैं। अगले दिन यही बासी खाना यात्रियों को परोस दिया जाता है।

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