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ग्वालियर स्टेशन पर इस तकनीक से एक बार में 3 लाख यात्रियों के चेहरे होंगे कैद

स्टेशन पर लगेगा आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सिस्टम, अपराधों पर लगेगी लगाम

ग्वालियर स्टेशन पर इस तकनीक से एक बार में 3 लाख यात्रियों के चेहरे होंगे कैद

ग्वालियर/वेब डेस्क। रेलवे स्टेशन और ट्रेनों में आपराधिक घटनाएं बढ़ रही हैं। हालांकि अपराधियों पर नजर रखने के लिए स्टेशनों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, लेकिन हर वक्त इनकी मॉनिटरिंग कर पाना संभव नहीं है, साथ ही कैमरों की रेंज भी सीमित होती है, जिससे संबंधित व्यक्ति की पहचान मुश्किल हो जाती है। इसी का फायदा उठाकर अपराधी एक जगह से दूसरी जगह आसानी से पहुंच जाते हैं।

रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए रेलवे एक बड़ा प्रयोग करने जा रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक की सहायता से रेलवे स्टेशनों पर फेस रिकगनिशन सिस्टम लगाने की योजना बनाई गई है। यह सिस्टम सीसीटीएनएस (क्राइम एण्ड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) से जुड़ा होगा, जिसमें दर्ज अपराधियों की फोटो के आधार पर उनकी पहचान हो जाएगी। शुरूआत में एनएसजी-2 (ए-1 श्रेणी) के स्टेशनों पर यह सिस्टम लगाया जाएगा, जिसमें मंडल के झांसी व ग्वालियर स्टेशन शामिल होंगे। यह सिस्टम एक बार में तीन लाख से भी अधिक चेहरे पहचान पाएगा।

अपराधियों का ब्यौरा होगा दर्ज

रेलवे स्टेशनों को फेस रिकगनिशन सिस्टम से लैस करने की तैयारी कर ली गई है। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर आधारित होगा यानि कि इसमें सीसीटीएनएस के माध्यम से अपराधियों का ब्यौरा दर्ज कर दिया जाएगा। जैसे ही कोई अपराधी स्टेशन पर इस सिस्टम की रेंज में आएगा तो सिस्टम फौरन डाटाबेस से उसे पहचानकर रेलवे पुलिस को अलर्ट दे देगा। इस सिस्टम को संचालित करने की जिम्मेदारी आरपीएफ को सौंपी जाएगी। इसकी संचालन व्यवस्था कंट्रोल रूम से होगी और अलर्ट मिलते ही स्टेशन पर मौजूद रेलवे पुलिस के जवान अपराधी को गिरफ्तार कर पाएंगे।

बड़े स्टेशनों पर कारगर साबित होगा यह सिस्टम

बताया जा रहा है कि यह सिस्टम एक बार में तीन लाख से अधिक चेहरों की रेंज बनाने में सक्षम है। यानि कि तीन लाख लोगों के बीच खड़े किसी व्यक्ति का फोटो डाटाबेस में फीड है तो सिस्टम को उसे पहचानने में कोई दिक्कत नहीं होगी, इसलिए यह सिस्टम बड़े स्टेशनों पर कारगर साबित होगा। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि ऐसे एक सिस्टम का प्रयोग कुछ वर्ष पहले भी किया गया था, पर उसमें कई खामियां पाई गई थीं।

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