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2.26 लाख बच्चें से वसूलते हैं छह अरब से अधिक की फीस

स्कूलों को शिक्षा का मन्दिर कहा जाता है। यहां बच्चे ज्ञान का अर्जन करने के लिए आते हैं।

2.26 लाख बच्चें से वसूलते हैं छह अरब से अधिक की फीस

दस माह की बताकर 12 माह की फीस ले रहे हैं निजी स्कूल, गणवेश और कॉपी-किताबों के नाम पर करोड़ों की लूट

ग्वालियर | स्कूलों को शिक्षा का मन्दिर कहा जाता है। यहां बच्चे ज्ञान का अर्जन करने के लिए आते हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों को यह सोचकर इन स्कूलों में भेजते हैं कि बच्चा वहां पढ़-लिख जाएगा और जीवन में कुछ बन जाएगा। मगर इन्हीं स्कूलों में फीस, गणवेश और कॉपी किताबों के नाम पर अभिभावकों को लूटा जा रहा है। बात यहां तक ही खत्म नहीं होती है, स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों को जूतों, बेल्ट एवं टाई आदि के लिए चयनित दुकानों पर खरीदने के लिए भेजा जाता है। जानकारी के अनुसार शहर में लगभग 113 निजी स्कूल हैं। इन स्कूलों में लगभग दो लाख 26 हजार बच्चे पढ़ते हैं। वर्ष भर की बात करें तो इन स्कूलों में छह अरब 78 करोड़ रुपए की आमद फीस के रूप में होती है। इसके अलावा अन्य स्त्रोंतों से भी करोड़ों की आय हो रही है।

शहर में निजी स्कूल प्रबंधन द्वारा बच्चों से शिक्षा के नाम पर मोटी फीस वसूली जाती है। बच्चों से यह फीस प्रत्येक माह न लेते हुए तीन या चार किश्तों में वसूली जाती है। स्कूल प्रबंधनों द्वारा ली जाने वाले इस फीस में मई और जून की फीस भी ले ली जाती है जो कि नियम के विरुद्ध है। शहर में चलने वाले निजी स्कूलों द्वारा प्रत्येक बच्चे से एक वर्ष में 25 से 40 हजार रुपए की फीस वसूली जाती है। शहर में कई स्कूल शिवपुरी लिंक रोड पर स्थित हैं। इन स्कूलों द्वारा बच्चों से बस वाहन से आने-जाने के रूप में भी मोटी फीस ली जाती हैं।

चयनित दुकानों से ही खरीदनी होती गणवेश और कॉपी-किताबें :-

निजी स्कूलों ने लश्कर, थाटीपुर और मुरार क्षेत्र की कुछ दुकानों को गणवेश, कॉपी-किताबें, जूते, बेल्ट और टाई आदि के लिए चयनित किया है। इन दुकानों पर ही इन स्कूलों की सामग्री का वितरण किया जाता है जो बाजार से काफी महंगी होती हैं। जानकारी के अनुसार इन दुकानदारों द्वारा स्कूल प्रबंधन को प्रत्येक चीज की खरीद पर 15 से 20 प्रतिशत तक का कमीशन भी दिया जाता है। अगर इस कमीशन की गणना की जाए तो यह करोड़ों रुपए में जाकर बैठता है।

रातों-रात खड़ी हो रही हैं इमारतें

स्कूल प्रबंधनों द्वारा अभिभावकों से फीस व अन्य स्रोतों के माध्यम से मोटी फीस वसूली जाती है। आज से कुछ वर्ष पहले जो निजी स्कूल शहर में एक छोटे से स्थान पर चलते थे, उनकी दूसरी शाखाएं शिवपुरी लिंक रोड पर एक बहुत बड़े क्षेत्र में स्थापित हैं जो अपने आप में देखते ही बनती हैं।

खेल का पैसा भी खा जाते हैं स्कूल संचालक

स्कूल प्रबंधन द्वारा क्रीड़ा के नाम पर बच्चों से मोटी फीस ली जाती है लेकिन इस फीस को राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हेतु शिक्षा विभाग में जमा नहीं किया जाता है जिससे स्कूल के होनहार बच्चे इन प्रतियोगिताओं में भाग लेने से वंचित हो रहे हैं।

हम तो दस माह की फीस ही लेते हैं

नाम नहीं लिखने की शर्त पर स्कूल प्रबंधन ने बताया कि हम तो बच्चों से दस माह की ही फीस किश्तों के रूप में लेते हैं। रही बात गणवेश, कॉपी और किताबों की तो अभिभावक उन्हें स्वयं प्राप्त नहीं कर सकते हैं जिससे हम शहर की निश्चित दुकानों पर यह सामग्री उपलब्ध कराते हैं। स्कूल प्रबंधनों का कहना है कि अभिभावकों को 50-100 रुपए से कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन उन्हें सभी सामग्री एक ही छत के नीचे उपलब्ध हो जाती है।




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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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