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क्या होगा कांग्रेस का वनवास खत्म या फिर खिलेगा कमल

क्या होगा कांग्रेस का वनवास खत्म या फिर खिलेगा कमल

सतना/विशेष संवाददाता। 17वीं लोकसभा के चुनाव के लिए मध्यप्रदेश की राजनीति में सक्रिय दो प्रमुख दलों ने अभी अपने पनो नही खोले हैँ इस बीच प्रदेश की खजराहो लोकसभा सीट को लेकर चर्चाओं का दौर प्रारंभ हो चुका है । आंकडों पर गौर करें तो खजुराहो लोकसभा सीट पर पहला चुनाव साल 1957 में हुआ था। भौगोलिक मानकों में नजर डालें तो खजुराहो सीट छतरपुर और कटनी जिले के कुछ क्षेत्रों तक फैली हुई है। 1957 में इस सीट पर हुए पहले चुनाव में कांग्रेस के राम सहाय ने जीत हासिल की थी। 1957 में यहां पर फिर से चुनाव जिसमें कांग्रेस के ही मोतीलाल मालवीय विजयी रही। इसके अगले चुनाव 1962 में कांग्रेस ने यहां पर जीत की हैट्रिक लगाई और राम सहाय एक बार फिर से सांसद बने।

यहां पर अगला चुनाव 1977 में हुआ। कांग्रेस के हाथ से यह सीट निकल गई और भारतीय लोकदल के लक्ष्मी नारायण नायक यहां के सांसद बने। 1977 का चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने यहां पर 1980 में एक बार फिर वापसी की। कांग्रेस की विद्दावती चतुर्वेदी ने लक्ष्मीनारायण नायक को शिकस्त दी। विद्यावती चतुर्वेदी ने इसके बाद अगला चुनाव भी जीता और उन्होंने उमा भारती को मात दी। उमा भारती का इस सीट पर पहला चुनाव था। हालांकि उमा भारती ने 1989 के चुनाव में बदला लिया और विद्यावती चतुर्वेदी को हराया। उमा भारती ने इसके बाद 1991, 1996 और 1998 का चुनाव भी जीता। 1999 के चुनाव में कांग्रेस ने यहां से सत्यव्रत चतुर्वेदी को टिकट दिया। सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कांग्रेस की इस सीट पर वापसी कराई और वह यहां से सांसद बने।

2004 में भाजपा ने एक बार फिर यहां पर वापसी की। भाजपा के रामकृष्ण कुसमरिया ने इस बार सत्यव्रत चुतर्वेदी का मात दे दी। भाजपा ने इसके बाद अगले 2 चुनावों में यहां से जीतेन्द्र सिंह बुंदेला और नागेन्द्र सिंह के रूप में उम्मीदवार को बदला और दोनों ही बार उसको जीत मिली। खजुराहो लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं। चंदला, गुनौर, मुड़वारा, राजनगर, पन्ना, बहोरीबंद, पवई, विजयराघवगढ़ यहां की विधानसभा सीटें हैं। यहां की 6 सीटों पर बीजेपी और 2 पर कांग्रेस का कब्जा है।

2014 के जनादेश पर एक नजर

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नागेंद्र सिंह ने कांग्रेस के राजा पटेरिया को हराया था। इस चुनाव में नागेंद्र सिंह को 4 लाख 74 हजार 966 (54.31 प्रतिशत) मत मिले थे, तो वहीं राजा पटेरिया को 2 लाख 27 हजार 476 (26.01 प्रतिशत) मत मिले थे। दोनों के बीच हार-जीत का अंतर 2 लाख 47 हजार 490 मतों का था। वहीं बसपा 6.9 प्रतिशत मतों के साथ तीसरे स्थान पर थी। इससे पहले 2009 के चुनाव में भी भाजपा को जीत मिली थी। भाजपा के जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस के राजा पटेरिया को हराया था। जितेंद्र सिंह को 2 लाख 29 हजार 369 (39.34 प्रतिशत) मत मिले थे, तो वहीं राजा पटेरिया को 2 लाख 1 हजार 37 (34.48 प्रतिशत) मत मिले थे। जितेंद्र सिंह ने राजा पटेरिया को 28 हजार 332 मतों से हराया था। वहीं बसपा 13.22 प्रतिशत मतों के साथ तीसरे स्थान पर रही थी।

क्या है इस सीट का सामाजिक ताना-बाना

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक खजुराहो की जनसंख्या 25 लाख 87 हजार 685 है। यहां की 81.78 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्र और 18.22 प्रतिशत आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। खजुराहो में 18.57 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जाति और 15.13 प्रतिशत जनसंख्या अनुसूचित जनजाति के लोगों की है। चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2014 के चुनाव में 17 लाख २ हजार 794 मतदाता थे। इसमें से 7 लाख 95 हजार 482 महिला मतदाता और 9 लाख 7 हजार 312 पुरुष मतदाता थे। 2014 के चुनाव में यहां पर 51.36 प्रतिशत मतदान हुआ था। पन्ना जिलावासियों ने 30 वर्ष पहले देखा था कांग्रेसी सांसद यदि लोकसभा के इतिहास पर नजर डाले तो पन्ना जिला और दमोह को मिलाकर पन्ना-दमोह लोकसभा क्षेत्र कहा जाता था। पन्ना जिले को 2009 में खजुराहो लोकसभा में जोड़ा गया। साल 2009 के बाद तो खजुराहो लोकसभा में भाजपा का कब्ज़ा रहा, लेकिन यदि 2009 के पहले के इतिहास पर नजर डाले तो साल 1984 में पन्ना-दमोह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के डालचंद जैन चुने गए थे, फिर 1989 में पन्ना-दमोह से भाजपा के लोकेंद्र सिंह सांसद चुने गए। तब से आज तक पन्ना जिले की जनता भाजपा के सांसद ही देखती आ रही । 2014 के आम चुनाव में नागेंद्र सिंह ने रचा इतिहास। 2014 में खजुराहो लोकसभा से भाजपा के प्रत्यासी नागेंद्र सिंह ने कांग्रेस प्रत्यासी राजा पटेरिया को 2 लाख 47 हजार मतों से पराजित कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की ।

Naveen ( 1696 )

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