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विधानसभा में तो हारे तो अब लोकसभा से उम्मीद

विधानसभा में तो हारे तो अब लोकसभा से उम्मीद

भाजपा-कांग्रेस में हारे हुए नेता कर रहे टिकट की मांग, कई पूर्व मंत्रियों ने भी जताई दावेदारी

सुमित शर्मा भोपाल

लोकसभा चुनाव के लिए टिकट के दावेदारों ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। इसमें ऐसे उम्मीदवार भी सामने आ रहे हैं, जो विधानसभा का चुनाव तो नहीं जीत सके, लेकिन अब उन्हें उम्मीद है कि वे लोकसभा का चुनाव जरूर जीत जाएंगे। इसके लिए वे अपने राजनीतिक आंकाओं से टिकट की मांग भी कर रहे हैं। भाजपा, कांग्रेस में ऐसे नेताओं की संख्या सबसे ज्यादा है। हालांकि इनमें कई ऐसे दिग्गज नेता हैं, जो पहले भी लोकसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा चुके हैं, लेकिन वे जीत दर्ज नहीं करा सके। अब एक बार फिर से वे जीत के इरादे से टिकट की मांग कर रहे हैं।

टिकट मिला, लेकिन नहीं जीत सके

भाजपा ने विधानसभा चुनाव में ऐसे कई दिग्गज नेताओं को टिकट दिया था, लेकिन वे चुनाव हार गए। ये दिग्गज नेता भाजपा सरकार में मंत्री भी रहे हैं, लेकिन क्षेत्रीय विरोध के कारण इन्हें अपने-अपने क्षेत्रों में हार का सामना करना पड़ा। भाजपा सरकार में मंत्री रहे लालसिंह आर्य, जयभान सिंह पवैया, रुस्तम सिंह, जयंत मलैया, अर्चना चिटनिस, ललिता यादव, नारायण सिंह कुशवाह, कुसुम महदेले लोकसभा चुनाव के लिए भी अपनी दावेदारी जता रहे हैं। इसी तरह पूर्व विधायक शंकरलाल तिवारी, चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी भी लोकसभा में अपनी किस्मत आजमाना चाहते हैं। अन्य पूर्व विधायक भी टिकट के लिए अपनी जोड़-जुगाड़ में लगे हुए हैं। यही स्थिति कांग्रेस खेमे की भी है। कांग्रेस में इस बार विधानसभा चुनाव में कई ऐसे दिग्गज नेता धराशाही हुए हैं, जो वर्षों से चुनाव जीतते आ रहे हैं, लेकिन इस बार उनके क्षेत्रों की जनता ने उन्हें यह मौका नहीं दिया। इनमें नेता प्रतिपक्ष रहे अजय सिंह, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रामनिवास रावत, विधानसभा उपाध्यक्ष रहे डॉ. राजेंद्र सिंह, मुकेश नायक, सुंदरलाल तिवारी आदि हैं। इनमें से सुंदरलाल तिवारी का तो पिछले दिनों देहांत हो गया है। इस बार कांग्रेस उन्हें लोकसभा का चुनाव लड़ाने पर भी विचार कर रही थी। उम्मीद थी कि उन्हें पार्टी रीवा-सतना की किसी सीट से चुनाव मैदान में उतारती। इधर मुकेश नायक तो चुनाव लडऩे से मना कर चुके हैं, लेकिन कांग्रेस से जिन दावेदारों के नाम सामने आ रहे हैं उनमें रामनिवास रावत, अजय सिंह, डॉ. राजेंद्र सिंह, अरूण यादव चुनाव मैदान में उतरेंगे।

जिताऊ चेहरों पर दांव

इस बार लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस ऐसे चेहरों पर ही दांव खेलेगी, जिनसे उन्हें जीत की उम्मीद है। दरअसल इस बार देश का चुनावी वातावरण बदला हुआ सा नजर आ रहा है। सभी दलों की नजर इस बार युवा और किसानों पर ही है। चुनावी मुद्दों में फिलहाल ये ही नजर आ रहे हैं। इसके लिए सभी दल इन्हें साधने में लगे हुए हैं। यही कारण है कि जनता के बीच में ऐसे चेहरों को ही सामने लाया जाए, जो शत-प्रतिशत जीत की ग्यारंटी देता हो। मध्यप्रदेश में अब तक लोकसभा चुनाव में भाजपा का ही पलड़ा भारी रहा है और भाजपा अपने अब तक के इतिहास को दोहराना चाहती है। जबकि कांग्रेस अब प्रदेश में इतिहास बनाना चाहती है और उसका फोकस ज्यादा से ज्यादा सीटों को जीतने पर है। इसके लिए कांग्रेस ने चुनाव से पहले किसानों की कर्जमाफी का दांव खेला है। युवाओं को भी रोजगार देने का वादा किया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन किसान और युवाओं को खुश करने में कामयाब हो पाते हैं।

युवा चेहरों को चमकने की उम्मींद

प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए कई युवा चेहरों को भी उम्मीद है कि उन्हें पार्टी लोकसभा चुनाव लडऩे का मौका देगी, ताकि युवा मतदाताओं पर प्रभाव डाला जा सके। दरअसल वर्ष 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कई युवा दावेदारों को टिकट दिया था और वे चुनाव जीतकर भी आए, लेकिन इस मामले में भाजपा को मुंह की खानी पड़ी। भाजपा ने युवा उम्मीदवारों पर विश्वास नहीं जताया और चुनाव परिणाम विपरीत आए। अब लोकसभा में भी कांग्रेस खेमे में इसकी ज्यादा संभावनाएं नजर आ रही हैं कि पार्टी युवा उम्मीदवारों को मैदान में उतारे। इधर भाजपा की युवा टीम भी अब यह भरोसा कर रही है कि पार्टी विधानसभा चुनाव की तरह लोकसभा चुनाव में गलती नहीं करेगी।

Naveen ( 1696 )

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