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गलतफहमी के शिकार ग्रामीण बेरोजगार

गलतफहमी के शिकार ग्रामीण बेरोजगार

युवा स्वाभिमान योजना में ग्रामीण युवा भी कर रहे आवेदन

मध्य स्वदेश संवाददाता भोपाल

प्रदेश सरकार द्वारा शहरी बेरोजगारों के लिए शुरू की गई, मुख्यमंत्री युवा स्वाभिमान योजना में गलतफहमी के कारण ग्रामीण बेरोजगार भी आवेदन कर रहे हैं। आवेदन देने के बाद जब वे आधार कार्ड के साथ नगर निगम मुख्यालय आते हैं, तब अधिकारी उन्हें यह कहकर रवाना कर देते हैं कि आप योजना के पात्र नहीं हैं। परेशानी यह है कि ऑनलाइन आवेदन करते समय ऐसी कोई व्यवस्था सॉफ्टवेयर में नहीं की गई है, जिससे कि यह पता चल सके आवेदक शहरी है या ग्रामीण। इस वजह से हर कोई आवेदन कर रहा है और बाद में अपात्र लोग परेशान हो रहे हैं।

प्रदेश के नगरीय निकायों के अधिकारी इस में खुद को असहाय महसूस कर रहे हैं, क्योंकि आवेदन के लिए पोर्टल तैयार करने का काम और नियंत्रण भोपाल से हो रहा है। राज्य सरकार के निर्देश के बाद निगम ने 12 फरवरी से योजना के लिए आवेदन लेना शुरू किए थे। तब से अब तक करीब 8 5 हजार से ज्यादा लोग आवेदन कर चुके हैं। प्रदेश के सभी निकायों में इनमें से ज्यादातर लोगों राजस्व वसूली में लगाया जा रहा है, जबकि कुछ को सफाई और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसे काम सौंपे जा रहे हैं। काम के दौरान निगम उन्हें चार हजार रुपए महीने का स्टायपंड देगा। हालांकि 100 दिन बाद सभी को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा और फिर उन्हें नए सिरे से अपने स्थायी रोजगार की तलाश करना होगी। ऑनलाइन आवेदन के बाद निकाय हर आवेदक को अपने मुख्यालय बुलाते है और उसकी पहचान और पता जानने के लिए आधार कार्ड लेते हैं।

कब तक लेना हैं आवेदन, पता नहीं

राज्य सरकार की तरफ से अब तक निकायों को केवल शहरी बेरोजगार युवाओं के आवेदन लेकर उन्हें 100 दिन का काम देने के निर्देश दिए गए हैं। यह नहीं कहा गया है कि योजना के तहत आवेदन किस तारीख तक लिए जाना हैं। हालांकि मार्च में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने का अनुमान है तो अपने आप आवेदन लेने का काम निगम को रोकना पड़ेगा। चुनाव बाद राज्य सरकार ही तय करेगी कि कब तक बेरोजगारों से आवेदन लेकर उन्हें काम दिया जाना है।

Naveen ( 1696 )

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