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एमपी : तेज बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई इलाकों का मुख्यालय से संपर्क टूटा

-घरों में पानी घुसने से सामान हुआ खराब, बाढ़ के हालात से लोगों की परेशानी बढ़ी

एमपी : तेज बारिश से जनजीवन अस्त-व्यस्त, कई इलाकों का मुख्यालय से संपर्क टूटा

भोपाल। मध्यप्रदेश में बीते दो दिन से लगातार हो रही भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं, जिसके चलते जन-जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात भी बन गए हैं। राजधानी भोपाल में इस साल पहली बार ऐसा हुआ है, जब दसवीं बार भदभदा बांध के गेट खोलने पड़े हैं। भोपाल की लाइफ लाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब के साथ ही प्रदेश के सभी बांध लगभग भर गए हैं और उनके गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है, जिससे नदियों का जल-स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है। मौसम विभाग ने प्रदेश में अगले 48 घंटे के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

मध्यप्रदेश में शुक्रवार की रात मानसून फिर से सक्रिय हुआ था, तभी से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में जोरदार बारिश हो रही है। सोमवार को भी नर्मदापुरम्, जबलपुर, मालवा-निमांड अंचल में भारी बारिश हुई, जिसके चलते नर्मदा, ताप्ती समेत प्रदेश की सभी नदियां उफान पर हैं। भारी बारिश से देवास में काली सिंध और गुनेरी में आई बाढ़ से 52 गांवों का संपर्क मुख्यालय से टूटा गया है। बुरहानुपर में ताप्ती उफान पर है तो इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर बांध के गेट खुलने के कारण नर्मदा नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। बैतूल जिले में सूखी नदी में बाढ़ आने के कारण नेशनल हाईवे 69 बैतूल-भोपाल पर सुबह 9 बजे से बंद हैं। आमला ब्लॉक में तेज बरसात के कारण कई गांवों के पहुंच मार्ग बंद हो गए हैं।

जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी, ओंकारेश्वर, इंदिरा सागर, तवा नदी पर बने तवा डैम, ताप्ती नदी पर बने पारसडोह, सारणी में सतपुड़ा डैम के गेट खुलने से नदियों का पानी अपनी सीमाएं तोडक़र रिहायशी इलाकों में घुस गया है, जिससे प्रदेश के अधिकांश इलाकों में बाढ़ के हालात बन गए हैं और लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ताप्ती नदी में बाढ़ के कारण पुलिया के ऊपर से पानी बह रहा है। सोमवार की सुबह पुल पर पानी होने के बाद भी बाइक सवार बोण्डु काले ने पुल पार करने का प्रयास किया। तेज बहाव के कारण वह बाइक समेत बहने लगा। पुल के किनारे पर पहुंचते ही लोगों ने जान जोखिम में डालकर उसे बचाया।

रविवार रात हुई झमाझम बारिश से देवास की देवगढ़ कालीसिंध नदी का पानी पुल के ऊपर से बह निकला, जिससे जिला मुख्यालय से 52 गावों का संपर्क टूट गया। बागली के गुनेरी नदी में आई बाढ़ से कई गांव अलग-थलग पड़ गए हैं। इंदौर का यशवंत सागर तालाब भी लबालब हो गया। पानी बढऩे पर रात को ही इसका एक गेट खोल दिया गया। यशवंत सागर बांध का एक गेट खोलने से यह पानी उज्जैन के गंभीर डेम में आया। इसके बाद डेम का गेट नंबर 3 खोला गया। शिप्रा नदी का जलस्तर भी बढ़ गया। इंदिरा सागर और आंकारेश्वर बांध के गेट खोलने का असर खरगोन जिले में भी देखने को मिल रहा है। यहां नर्मदा नदी उफान पर है। नर्मदा पट्टी इलाके में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। नर्मदा के उफान के चलते खरगोन जिले में स्थित खलघाट का पुराना पुल डूबने की कगार पर है।

प्रदेश के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र पर कम दबाव का क्षेत्र सक्रिय होने के साथ ही मानसून ट्रफ के गुना से होकर गुजरने से प्रदेश के अनेक स्थानों पर तेज बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने सोमवार-मंगलवार को राजधानी भोपाल सहित इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, दतिया, मुरैना, भिंड, गुना, अशोकनगर, विदिशा, सागर, रायसेन, सीहोर, होशंगाबाद, खंडवा, खरगोन में भारी बरसात होने की संभावना जताई थी। बैतूल जिले में पिछले 24 घंटे में दो इंच, भोपाल-खरगोन में एक-एक इंच से अधिक बारिश हो चुकी है। मौसम विभाग ने कई जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

भोपाल मौसम केन्द्र के वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक उदय सरवटे के मुताबिक वर्तमान में उत्तर-पूर्व मध्यप्रदेश एवं उसके आसपास एक कम दबाव का क्षेत्र बना है। साथ ही हवा के ऊपरी भाग में 1.5 किमी की ऊंचाई तक चक्रवाती हवा का घेरा बना है। मानसून द्रोणिका (ट्रफ) अनूपगढ़ सीकर गुना से उत्तर पूर्व मध्य प्रदेश से पेंड्रा रोड, झारसुगुड़ा, पुरी से बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इस सिस्टम के प्रभाव से 28 अगस्त को बंगाल की खाड़ी में एक कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इससे आगामी 48 घंटों के दौरान प्रदेश के अधिकांश इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है। साथ ही सिंतबर के पहले सप्ताह में भी अच्छी बरसात होने के आसार हैं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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