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दूसरे दिन ही खत्म हो गया मानसून सत्र

14 वीं विधानसभा का अंतिम सत्र दो दिन भी नहीं चल सका। दोनों दिन हंगामे के चलते जैसे तैसे जरुरी कामकाज निपटाया गया।

दूसरे दिन ही खत्म हो गया मानसून सत्र

भोपाल | 14 वीं विधानसभा का अंतिम सत्र दो दिन भी नहीं चल सका। दोनों दिन हंगामे के चलते जैसे तैसे जरुरी कामकाज निपटाया गया। दूसरे दिन आपातकाल ,भाजपा विधायक नीलम मिश्रा, अनूपूरक बजट व अविश्वास प्रस्ताव को लेकर पूरे समय हंगामा होता रहा। बजट पर चर्चा नहीं कराए जाने से नाराज कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह द्वारा सदन में नियम पुस्तिका फाडऩे की घटना भी हुई। इस हंगामे के बीच कामकाज निपटाने के बाद विधानसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। कार्यवाही स्थगित करने से नाराज कांग्रेस विधायकों ने नारेबाजी की। सत्र के दूसरे दिन की शुरूआत ही हंगामे से रही । कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्यमंत्री ने आपातकाल का मुद्दा उठाते हुए कांग्रेस पर जमकर हमला बोला।

उन्होंने आपातकाल को देश के इतिहास में सबसे काला दिन बताया तो कांग्रेस विधायक नाराज हो गए और हंगामा करते हुए आसंदी तक पहुंच गए।दोनों के बीच तीखी नोकझोंक होने लगी, जिसके चलते सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद फिर शुरू हुई कार्यवाही में भी इसी मुद्दे पर हंगामा शुरू हो गया। उसके बाद आधे घंटे के लिए कार्यवाही को स्थगित करनी पड़ी। उसके बाद हंगामे के बीच ही सरकार द्वारा 17 विधेयकों के साथ अनुपूरक बजट को बिना चर्चा के पारित कर दिया। पारित विधेयकों में आपातकाल के दौरान जेल गए मीसा बंदियों को स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का दर्जा देने तथा लाड़ली लक्ष्मी योजना को लाड़ली लक्ष्मी योजना को कानूनी रूप देने वाला विधेयक शामिल रहे।

धरने पर बैठीं भाजपा विधायक

हंगामे व शोरशराबे के बीच अचानक सिमरिया विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक नीलम मिश्रा ने आज सदन में पुलिस द्वारा उनके परिवार को प्रताडि़त करने का मुद्दा उठा दिया वह सुरक्षा की मांग करते हुए आसंदी के सामने धरने पर बैठ गई। उनके समर्थन में कांग्रेस की महिला विधायक भी धरने पर बैठ गई। इसके चलते विधानसभा की कार्रवाई 15 मिनट के लिए स्थगित कर दी गई। बाद मे काफी समझाने पर उन्होने धरना खत्म किया।

डॉ.गोविंद सिंह ने नियम पुस्तिका फाड़ी

कांग्रेस विधायक अनूपूरक बजट को बिना चर्चा कराए पास करने का विरोध करने लगे। वरिष्ठ विधायक रामनिवास रावत, गोविन्द सिंह व अन्य विधायक गर्भगृह पहुंच गए और चर्चा नहीं कराए जाने का विरोध करने लगे। अध्यक्ष का कहना था कि चर्चा के लिए नाम आए ही नहीं थे इसलिए चर्चा के लिए नाम नहीं पुकारे गए। इस पर विधायक गोविन्द सिंह नाराज हो गए। उनका कहना था कि यहाँ बिना नियम कानून के काम हो रहा है । उन्होंने कहा कि जब कामकाज नियम कानून के तहत हो ही नहीं रहा तो विधानसभा नियम पुस्तिका का क्या काम। इसके बाद उन्होंने नियम पुस्तिका को फाड़ दिया जो उनके हाथ में थी ।



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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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