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भाजपा के लिए सत्ता की कुंजी है मध्य भारत,मालवा-निमाड़

प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा कांग्रेस मैदान संभाल चुकी है।

भाजपा के लिए सत्ता की कुंजी है मध्य भारत,मालवा-निमाड़

भोपाल । प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा कांग्रेस मैदान संभाल चुकी है। दोनो दलो की अपनी अपनी चुनावी रणनीति है लेकिन भाजपा का विशेष ध्यान केवल अपने असर वाले मध्य भारत, मालवा-निमाड़ पर है क्योकि यह क्षैत्र ही भाजपा के लिए सत्ता की कुंजी है। भाजपा के असर वाले मध्य भारत, मालवा-निमाड़ में कुल 102 विधानसभा सीटें हैं। इनमें मध्य भारत में 36 जिनमें से 29 भाजपा के पास हैं। मालवा में 45, इनमें से 41 भाजपा के पास है जबकि निमाड़ मं कुल 21 सीटों में से 15 भाजपा के पास है।

अर्थात 102 में से कुल 85 सीटें भाजपा के पास है। पार्टी की यह सबसे बड़ी पंूजी है, बैठक में इस पंूजी को बचाए रखेन पर चर्चा की गई। संभवत: इसलिए रणनीत के तहत मालवा निमाड़ में पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय सक्रिय हुए हैं। वे किसानों के साथ टै्रक्टर रैलियां निकाल रहे हैं और मध्य भारत में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का फोकस बना हुआ है।यही कारण है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनआशीर्वाद यात्रा के पहले चरण में ही इन क्षैत्रो को रखा गया है। यात्रा 14 जुलाई से उज्जैन से शुरू होगी। यात्रा प्रदेश के दो हिस्सों में एक साथ चलेगी। इसके लिए दो रथ तैयार किए गए हैं। पहले हिस्से में मालवा, निमाड़, नर्मदापुरम्, ग्वालियर-चंबल, भोपाल क्षेत्र के विधानसभा क्षेत्र में शिवराज रथ लेकर जाएंगे। वहीं दूसरे हिस्से में विंध्य, बुंदेलखंड और महाकोशल के क्षेत्र में यात्रा चलेगी। प्रत्येक चरण दो दिन का होगा।


यह है राहत


कमलनाथ की जगह अगर ज्योतिरादित्य सिंधिया को प्रदेश कांग्रेस की कमान दी जाती तो भाजपा को परेशानी हो सकती थी क्योंकि सिंधिया का ग्वालियर चंबल निमाड़ व मध्यभारत में प्रभाव है यहां जनमानस व कार्यकर्ताओ के बीच उनका अपना संपर्क है। इसलिए वह भाजपा के लिए परेशानी खड़ी कर सकते थे। लेकिन इसके मुकाबले कमलनाथ का इन क्षैत्रो पर कोई प्रभाव नही है जिससे भाजपा को फायदा होना तय है।


यह है चुनौतिया


किसानो की नाराजगी वआदिवासी युवाओं के बीच छह साल से सक्रिय जय आदिवासी संगठन (जयस) विधानसभा चुनाव में अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी ने भाजपा नींद उड़ा दी है। जयस का प्रभाव मालवा-निमाड़ में सबसे ज्यादा है।जयस का कहना है कि चुनाव में 47 आदिवासी सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगा। साथ ही उन 35 सीटों पर भी प्रत्याशी खड़े किए जाएंगे, जहां आदिवासी मतदाताओं की संख्या 50 हजार तक है। हाल ही में मनावर, धार और कुक्षी में हुई जयस की रैली में जुटी भीड़ आदिवासी नेताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। जयस झाबुआ- मंडला जैसे आदिवासी जिलों में भी काम कर रहा है।


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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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