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अमेठी में 'छोटी बहू' से घिरते नजर आ रहे हैं राहुल

कांग्रेस के चेहरे पर चिंता की लकीरें, भाजपा नेता खुश

अमेठी में

नई दिल्ली/लखनऊ। पांचवें चरण के लिए होने वाले मतदान में सबसे चर्चित सीट अमेठी है। यहां से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी तो दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी उम्मीदवार हैं। इस सीट पर अब तक हुए 16 आम चुनावों और दो उप चुनावों में कांग्रेस की 16 बार जीत दर्ज हुई है, जबकि एक बार भाजपा व एक बार लोकदल को यहां से सफलता हाथ लगी है। मतदाताओं के बीच पांच साल में बहुत कम आना और खुद के शासन काल में अमेठी के लिए कुछ विशेष न करना कांग्रेस अध्यक्ष के लिए इस बार महंगा पड़ता साबित हो रहा है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन शनिवार को स्मृति ईरानी के साथ भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो से कार्यकर्ताओं में और जोश भर गया है।

पहली बार कमल खिलने के बाद जागी भाजपा की उम्मीद

1998 में भाजपा उम्मीदवार संजय सिंह की विजय के बाद पुन: भाजपा नेताओं को इस सीट पर आने वाले समय में कमल खिलने की उम्मीद जगी। राजनीतिक विश्लेषक हर्ष वर्धन त्रिपाठी के अनुसार इसी कारण स्मृति ईरानी को केंद्र में मंत्री पद से नवाजते हुए उन्हें पांच साल तक अमेठी में सक्रिय रहने के लिए कहा गया। स्मृति ने किया भी ऐसा ही। वे अमेठी के लोगों के साथ हमेशा संपर्क में बनीं रही। उनका दौरे भी सांसद राहुल गांधी की अपेक्षा पांच साल में अधिक हुए।

पिछली बार चुनाव में स्मृति के प्रदर्शन से उत्साहित हैं भाजपा कार्यकर्ता

अमेठी लोकसभा क्षेत्र में कुल 16,69,883 मतदाता हैं। 2004 में पहली बार अमेठी से जब राहुल गांधी चुनाव लड़े थे तो उन्हें 3,90,179 वोट मिले थे, जबकि बीएसपी के चंद्र प्रकाश मिश्रा 99,326 मत पाकर हार गये थे। भाजपा के राम विलास वेदांती को 55,438 मत मिले थे। 2009 में राहुल गांधी के वोट बढ़कर 4,64,195 हो गए। दूसरे नम्बर पर रहने वाले बसपा के आशीष शुक्ला को 93,997 मत मिले थे और वे 3,70,198 वोट से हार गये थे। इस बार भी भाजपा तीसरे नम्बर थी और प्रदीप को मात्र 37,570 वोट मिले थे।

2014 के चुनाव में 'छोटी बहू' के रूप में उस समय तक चर्चित स्मृति ईरानी भाजपा उम्मीदवार के रूप में आईं। उस समय हारते हुए भी वे कांग्रेस की धड़कन बढ़ा गईं क्योंकि उनके वोट राहुल गांधी के 4,08,651 के सापेक्ष 3,00,746 थे। स्मृति 1,07,905 मतों से चुनाव हार गईं लेकिन जीत-हार का अंतर लगभग एक लाख तक सिमटना कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गया। यही वजह है कि इस बार भाजपा समर्थक इस 'अंतर' को भी बराबर करने के हौसले से स्मृति ईरानी के चुनाव प्रचार में लगे हैं।

इस बार राहुल गांधी की राह कठिन

अमेठी के वरिष्ठ पत्रकार केके मिश्रा का कहना है कि इस बार राहुल गांधी की राह कठिन जान पड़ रही है। इसका कारण है कि कल तक जो मतदाता और कार्यकर्ता इनके साथ थे, आज वे स्मृति ईरानी के साथ चले गये हैं। हर गांव में इसका असर दिख रहा है। बसपा के मतदाता भी कांग्रेस की तरफ न जाकर भाजपा की तरफ रूख कर रहे हैं। तीन विधानसभाओं में भाजपा की जीत से भाजपा नेताओं में पहले से उत्साह है। चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद से ही स्मृति ईरानी के अमेठी में लगातार बने रहने और घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने का असर अब दिखने लगा है। यहां गठबंधन का कोई उम्मीदवार न होने से भी भाजपा के पक्ष में माहौल बनता दिख रहा है।

अमित शाह का रोड शो 'सोने पर सुहागा' की तरह

अमेठी में राहुल के सिर फिर जीत का सेहरा बंधेगा या स्मृति ईरानी उनसे कुर्सी छिनने में सफल होंगीं, यह तो आने वाला समय बताएगा लेकिन मतदाताओं के रूख को देखकर लगता है कि राहुल गांधी की 'कुर्सी' हिल रही है। स्मृति के तख्ता पलट करने की उम्मीद से ही सीएम योगी आदित्य नाथ भी कई बार दौरा कर चुके हैं, जबकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह शनिवार को वहां पर रोड शो कर कार्यकर्ताओं में जोश भर गये।

चार में से तीन विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा

अमेठी लोकसभा क्षेत्र के विधानसभाओं पर नजर दौड़ाएं तो यहां कुल चार विधानसभाएं हैं, जिसमें तीन अमेठी, जगदीशपुर और तिलोई विधानसभाओं पर भाजपा का कब्जा है, जबकि गौरीगंज सीट सपा के कब्जे में है। विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के कई स्थानीय नेता भाजपा का दामन थाम चुके हैं।

जातिगत ढांचा

यहां के जातिगत आंकड़ों पर ध्यान दें तो यहां 20 प्रतिशत मुसलमान हैं। हिन्दू मतदाताओं में 22 फीसद ओबीसी, अनुसूचित जाति करीब 15 प्रतिशत, ब्राह्मण मतदाता लगभग 12 प्रतिशत, क्षत्रिय मतदाता 11 प्रतिशत हैं। इसके अलावा अन्य मतदाता करीब 20 फीसद हैं।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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