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फिर काल बनी बेकाबू ट्रेक्टर-ट्रॉली, बाइक सवार तीन छात्रों को रौंदा, एक की मौत, दो गंभीर

फिर काल बनी बेकाबू ट्रेक्टर-ट्रॉली, बाइक सवार तीन छात्रों को रौंदा, एक की मौत, दो गंभीर

शहर की सड़कों पर मौत बनकर दौड़तीं ट्रेक्टर-ट्रॉलियों से नहीं रुक रहे है हादसे

गुना/निज प्रतिनिधि। शहर की सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहीं ट्रेक्टर-ट्रॉली फिर एक छात्र के लिए काल बनी है। हादसा नानाखेड़ी के पास गुरुवार दोपहर में हुआ। जिसमें ट्रेक्टर-ट्रॉली ने बाइक सवार छात्रों में पीछे से टक्कर मारी। हादसे में एक छात्र की मौत हो गई, वहीं दो अन्य घायल हुए है। तीनों छात्र शासकीय महाविद्यालय में परीक्षा देने जा रहे थे। घायल छात्रों को उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गौरतलब है कि अभी हाल ही में बांसखेड़ी में भी ट्रेक्टर-ट्रॅाली की टक्कर से एक मासूम की मौत हो चुकी है, इससे पहले भी कई हादसे सामने आ चुके है। बावजूद इसके ट्रेक्टर-ट्रॅालियों पर रोक नहीं लग पा रही है।

बाईक में पीछे से मारी ट्रेक्टर-ट्रॉली ने टक्कर

जानकारी अनुसार खेरीखता निवासी रवि बारेला अपने दो अन्य साथी छात्रों बलराम पुत्र पन्नालाल एवं बद्री बारेला के साथ गुरुवार को गुना आया हुआ था। यहां तीनों छात्रों की शासकीय महाविद्यालय में परीक्षा थी। अपनी बाइक से तीनों छात्र जब नानाखेड़ी के पास से निकल रहे थे, तभी मंडी से आती एक ट्रेक्टर-ट्रॉली ने उनमें टक्कर मार दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ट्रेक्टर-ट्रॉली की गति काफी तेज थी और उसने बाइक में पीछे से टक्कर मारी। हादसे में बाइक चला रहे रवि बारेला की मौके पर ही मौत हो गई, वहीं अन्य दोनों छात्र गंभीर रुप से घायल हो गया। हादसे के साथ ही मौक पर भारी हुजूम जमा हो गया। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुँची और घायल छात्रों को उपचार के लिए जिला अस्पताल भिजवाने की व्यवस्था की। पुलिस ने ट्रेक्टर चालक पर प्रकरण दर्ज कर लिया है।

मासूम की मौत के बाद कुछ दिन ही कायम रही सख्ती

उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहर के बांसखेड़ी क्षेत्र में एक ट्रेक्टर-ट्रॉली की टक्कर से एक मासूम की मौत हो चुकी है। घटना में बांसखेड़ी निवासी मुकेश कुशवाह की छह वर्षीय बेटी चांदनी कुशवाह स्कूल जा रही थी, इसी दौरान सीमेन्ट से भरी एक तेज रफ्तार ट्रेक्टर-ट्रॉली ने उसमें पीछे से टक्कर मार दी। जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई थी। इस घटना के बाद नो एंट्री में ट्रेक्टर-ट्रॉलियों के शहर में प्रवेश को लेकर फिर सवाल खड़े हो गए थे, साथ ही यातायात पुलिस की घेराबंदी भी शुरु हो गई थी। चौतरफा बने दबाव के बाद यातायात पुलिस, परिवहन विभाग एवं खनिज विभाग ने संयुक्त बैठक कर कार्रवाई की रणनीति बनाई थी। इसके साथ ही कार्रवाई भी शुरु की थी, जो एक, दो दिन तो सख्ती से जारी रही, इसके बाद सब पुराने ढर्रे पर चल निकला। जिम्मेदारों की इस लापरवाही का खामिजया फिर एक छात्र को अपनी जान देकर और दो छात्रों को घायल होकर चुकाना पड़ा।

दूर जाकर लगता है ब्रेक

ट्रेक्टर-ट्रॅालियों से सर्वाधिक हादसे होने का कारण इनकी बनावट है। जानकार बताते है कि ट्रेक्टर-ट्रॉली मुख्यत: कृषि कार्य के लिए ही होती है। इनका सड़क पर चलाना इसलिए भी खतरनाक है कि इसमें अन्य वाहनों की अपेक्षा ब्रेक तुरंत नहीं लगता है। अचानक किसी के सामने आने पर ब्रेक लगाने पर थोड़ी दूर जाकर ट्रेक्टर रुकता है, तब तक हादसा हो चुका होता है। इसके साथ ही इनमें पीछे ट्रॅाली लगी होने से यह झूलती हुई चलती है, जो हादसे एवं आवागमन में बाधा बनने का कारण बनती है। बताया यह भी जाता है कि शहर में निर्माण सामग्री ढोने वाली अधिकांश ट्रेक्टर-ट्रॉलियां का पंजीयन कृषि कार्य का है। ट्रेक्टर-ट्रॉली का पंजीयन दो तरह का होता है, पहला कृषि कार्य के लिए और दूसरा व्यवसायिक उपयोग के लिए। जिसे पीला पंजीयन कहा जाता है। कृषि कार्य के लिए पंजीयन आसानी से हो जाता है, किन्तु व्यवसायिक इस्तेमाल के लिए कड़े मापदंड़ है। इसमें ट्रॉली के साईज, पहिओं की क्षमता और संख्या के साथ कहां पर ट्रॉली बनवाई जाए? इसका भी उल्लेख रहता है, किन्तु इन मापदंडों का पालन नहीं किया जाता है

फसल के सीजन में बेकाबू हो जाते है हालात

ट्रेक्टर-ट्रॉलियों के कारण फसल के सीजन में हालात बेकाबू हो जाते है। इस दौरान अनाज लेकर नानाखेड़ी मंडी पहुँचने वाली ट्रेक्टर-ट्रॉलियां शहर के बीचों-बीच से होकर ही निकलती है। इससे यातायात पर दोतरफा दबाव पड़ता है, पहला भवन निर्माण सामग्री ढोने वाली ट्रेक्टर-ट्रॉली और दूसरा अनाज की ट्रेक्टर ट्रॉली। जिससे जहां आवागमन प्रभावित होता है और जाम की स्थिति बनती है, वहीं हादसे भी सामने आते है। कायदे से अनाज की ट्रेक्टर-ट्रॉलियों को बायपास होकर निकलना चाहिए, वहीं शहर में प्रवेश पर प्रतिबंध के नियम का पालन सख्ती से होना चाहिए।

Naveen ( 1696 )

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