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फौज की कार्रवाई पर अभिनंदन करें, शक नहीं

इक्कीस माह पहले भारतीय फौज द्वारा पाकिस्तानी आतंकियों पर किया गया सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो इतना समय बीत जाने के बाद क्यों जारी किया गया? इसपर अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी, संजय निरूपम, संदीप दीक्षित व मायावती के अलावा तमाम विपक्षी नेताओं ने फिर सवाल खड़े किए हैं।

फौज की कार्रवाई पर अभिनंदन करें, शक नहीं

- रमेश ठाकुर

इक्कीस माह पहले भारतीय फौज द्वारा पाकिस्तानी आतंकियों पर किया गया सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो इतना समय बीत जाने के बाद क्यों जारी किया गया? इसपर अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी, संजय निरूपम, संदीप दीक्षित व मायावती के अलावा तमाम विपक्षी नेताओं ने फिर सवाल खड़े किए हैं। ये नेता शुरू से ही वीडियो दिखाने की मांग कर रहे थे। लेकिन आरोप लगाने वाले इन नेताओं को वीडियो न दिखाने की थ्योरी को समझना चाहिए। सेना के अंदरूनी नियमों के अनुसार जब सेना दुश्मनों पर कोई बड़ा प्रहार या आॅपरेशन करती है तो गोपनीयता के चलते तुरंत अपनी कार्रवाई का खुलासा नहीं करती है। ऐसा इसलिए किया जाता है कि देश की सुरक्षा खतरे में न पड़े और कार्रवाई के गुप्त इंपुट लीक न हो।

सेना नियमों के मुताबिक उस वक्त कोई सूचना तुरंत सार्वजनिक नहीं करती। लेकिन नियमानुसार बड़ी कार्रवाई पर सेना का वीडियोग्राफी करना जरूरी होता है। जरूरी इसलिए होता है ताकि आॅपरेशन को अंजाम देने के बाद उस वीडियो की गहन समीक्षा की जा सके, जिससे सेना ये जान सके कि उनसे कहां-कहां चूक हुई और कहां अच्छा किया। चूक वाले बिंदुओं पर सेना अपनी तकनीक को और मजबूत करती है। सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो भी इसी का परिचायक है। जिसे तुरंत जारी न करके इक्कीस महीनों के बाद जारी किया गया। तुरंत वीडियो जारी न करना सेना नियमों का हिस्सा था। ऐसा भी नहीं है कि नेता सेना के कानूनों से अनजान है। सबकुछ समझने के बावजूद अगर कोई सवाल उठाता है तो वह मुर्खता की श्रेणी में आएगा। फौज की कार्रवाई को राजनीति से जोड़ने वालों को देशद्रोह की श्रेणी में लाकर उनपर उचित कार्रवाई करनी चाहिए।

सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो सेना के रिसर्च सेंटर में सुरक्षित रखा गया है। ताकि आने वाली सेना की पीढी उसे देखकर प्रेरणा लेती रहे। सेना के शौर्य का हमें अभिनंदन करना चाहिए, उनको अपने हिसाब से काम करने देना चाहिए। सेना पर शक करने का मतलब उनके मनोबल को गिराना। सर्जिकल स्ट्राइक पर किसी को कोई शक नहीं करना चाहिए। करीब दो साल पहले हमारे जवानों ने अपनी जान हथेली पर रखकर भारतीय सीमाओं के आसपास डेरा जमाए पाकिस्तानी आंतकियों पर मौत बनकर टूटे थे। उनके हौसलों की हमे दाद देनी चाहिए। सर्जिकल स्ट्राइक का दर्द पाकिस्तान आज भी नहीं भूल पाया।

भारतीय सेना दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना है। हमारी सेना हर विभाग में अतिआधुनिक तकनीक से लैस है। इस लिहाज से विपक्ष के नेताओं का उनके शौर्य का उपहास उड़ाना उनके मनोबल को कमजोर करने जैसा होगा। सेना न ही किसी सरकार की रही, न ही भारतीय जनता पार्टी की और न किसी और की। सेना पूरे देशवासियों की है। जिसके बदौलत हम अपने परिवार के साथ चैन से रहते हैं। सरहद पर काली रातों में जब सेना के जवान पहरेदारी करते हैं उस वक्त देशवासी अपने घरों में आराम से सोते होते हैं। इसलिए उनके पराक्रम का हमें अभिनंदन करना चाहिए।

फौज पर शक करने वाले विपक्ष के नेता अरविंद केजरीवाल, राहुल गांधी, संजय निरूपम, संदीप दीक्षित व मायावती जैसों को सेना के नियमों और इतिहास को पढ़ना और जानना चाहिए। सेना से जुड़ी तकरीबन प्रत्येक सूचनाएं गोपनीय ही होती है। फौज की अंदरूनी बातों को सार्वजनिक करने का मतलब देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने जैसा होता है। पाकिस्तानी आतंकियों पर सेना की बड़ी कार्रवाई 29 सितंबर 2016 को की गई थी जिसे सर्जिकल स्ट्राइक का नाम दिया गया था। लेकिन इस कार्रवाई पर शुरू से ही सवाल उठते रहे हैं। लेकिन सेना ने अब पक्का सबूत पेश करके सबके मुंह पर ताला लगा दिया है। पर, विपक्षी दल अब भी मानने को राजी नहीं। वीडियो के पीछे सरकार की कारस्तानी बता रहे हैं। राहुल गांधी ने अब ये तक बोल दिया है कि प्रधानमंत्री सेना के जवानों के खून पर राजनीति कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस नेता संजय निरूपम ने मोदी को सबसे झूठा नेता करार दिया है। नेता अपनी हरकतों से बाज नहीं आने वाले। उनको सिर्फ राजनीति करनी होती है। सेना पर सवाल उठाने के अलावा और भी कई गंभीर मुद्दे हैं जिसपर विपक्ष के लोग शांत हैं।

सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम देने के वक्त सेना ने आधुनिक तकनीकों से वीडियोग्राफी करवाई थी। सर्जिकल स्ट्राइक के वीडियो को सेना ने मानवरहित ड्रोन से बनाया था। ड्रोन में थर्मल इमेजिंग का इस्तेमाल किया गया था। जारी वीडियो में नक्शे पर सर्जिकल स्ट्राइक का निशाना नंबर-1 दिखाई पड़ रहा है। फिर ड्रोन से रिकॉर्ड की गई तस्वीर में इस पर निशाने की जानकारी देने वाले अहम डेटा दिखते हैं। दूसरी तस्वीर हेलमेट पर लगे कैमरे से ली गई, जिसमें निशाने की तस्वीर दिखाई दे रही है। तस्वीर में पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र में आतंकी घुसपैठ की तैयारी करते प्रतीत होते हैं। इसके बाद इस निशाने पर हमले के वक्त और उससे पहले की तस्वीर एक साथ दिखाई गई है। तीसरी तस्वीर में एक झोपड़ी नुमा कैंप की तबाही, जिसे धमाके से उड़ा दिया गया। इसके बाद कई सिलसिलेवार धमाके हुए, जिसमें आतंकियों का लॉन्चिंग पैड पूरी तरह से तबाह हो गया। तबाही का मंजर ड्रोन कैमरे से रिकॉर्ड किया गया।

सर्जिकल स्ट्राइक के एक दिन बाद तत्कालीन डायरेक्टर जनरल आॅफ आॅपरेशंस रणबीर सिंह ने उस घटना की जानकारी दी थी. उन्होंने कहा था कि पीओके के आसपास आतंकी पैड को खत्म करने के लिए सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया है। इसके बाद देश में स्ट्राइक की सफलता को लेकर जश्न मनाया जा रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक पर एक डॉक्यूमेंट्री भी बनी है जिसमें सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का जिक्र किया गया है। केंद्र सरकार और पूरा देश सर्जिकल स्ट्राइक पर जहां खुशी मना रहा है वहीं विपक्ष के नेता मातम मना रहे हैं। विपक्षी सियासी दल सर्जिकल स्ट्राइक को शुरू से ही फर्जी बता रहे हैं। अब वीडियो आने के बाद वह नरेंद्र मोदी को सेना का सहारा लेकर 2019 में जीत हासिल करने की चाल बता रहे हैं। बड़े दुख की बात है राजनीति में अब सेना को भी घसीटा जाने लगा है। समय की दरकार है कि विपक्षी नेताओं को सर्जिकल स्ट्राइक पर विश्वास करके गंदी राजनीति से तौबा करे। क्योंकि सर्जिकल स्ट्राइक के अलावा दूसरे जनहित के तमाम मसले हैं जिनपर उन्हें अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए।

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं )


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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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