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उपराष्ट्रपति ने महालनोबिस जयंती पर 125 रुपये का स्मृति सिक्का जारी किया

कहा - युवा शक्ति का करना होगा सकारात्मक इस्तेमाल

उपराष्ट्रपति ने महालनोबिस जयंती पर 125 रुपये का स्मृति सिक्का जारी किया

कहा-युवा शक्ति का करना होगा सकारात्मक इस्तेमाल

कोलकाता। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने सांख्य‍िकी विशेषज्ञ पीसी महालनोबिस की 125वीं जयंती के अवसर पर 125 रुपये का स्मृति सिक्का जारी किया। साथ ही पांच रुपये का नया सिक्का भी उन्होंने जारी किया है। इस मौके पर उन्होंने देश की विशाल युवा आबादी की 'संभावित शक्ति' को 'वास्तविक शक्ति' में बदलने का सुझाव दिया।

उपराष्ट्रपति कोलकाता में प्रोफेसर प्रशांत चंद्र महालानोबिस की 125वीं जयंती पर इंस्टीच्यूट अॉफ स्टैटिक्स के वार्षिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अगर युवा भारत में छिपी संभावनाओं को निखारने में हम असफल रहे तो यह एक व्यापक मौके को चूकने जैसा होगा। आंकड़ों के क्षेत्र में महालनोबिस के आवेदन-संचालित शोध के महत्व को दर्शाते हुए उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि आंकड़े वास्तव में सुशासन की रीढ़ की हड्डी है और योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन के लिए यह बेहद अनिवार्य है ।

नायडू ने कहा, "हमें जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए कंप्यूटिंग, संचार और रोबोटिक्स की शक्ति का उपयोग करने की जरूरत है। विश्व में आवश्यक शक्ति का विकल्प बनाने के लिए हमें डेटा चाहिए, हमें आंकड़ों की आवश्यकता है, हमें विश्लेषण और संश्लेषण के लिए उपकरणों की जरूरत है, जिसमें सांख्यिकी के आंकड़े बेहद मददगार साबित हो सकते हैं।"

उपराष्ट्रपति ने कहा, "हमारी कुल जनसंख्या का 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। यह जनसांख्यिकीय आंकड़े महत्वपूर्ण हैं, यदि हम इसे राष्ट्र शक्ति में बदल सकते हैं।" यदि हम हम इसके पीछे छिपी व्यापक संभावनाओं को मूर्त रूप नहीं दे सके तो देश को गरीबी, असमानता, सामाजिक अशांति और अस्थिर विकास सहित कई सामाजिक-आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। नायडू ने कहा कि कृत्रिम बुद्धि के साथ आंकड़े और बड़े डेटा प्रबंधन आने वाले वर्षों में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

गौरतलब है कि महालनोबिस की जयंती को सांख्य‍िकी दिवस के रूप में मनाया जाता है। महालनोबिस की तरफ से सांख्य‍िकी के क्षेत्र में किए गए योगदान को देखते हुए सरकार ने 2007 में हर वर्ष 29 जून को सांख्यिकी दिवस के रूप में मानने की घोषणा की थी। उन्होंने कोलकाता में भारतीय सांख्यिकी संस्थान की स्थापना 1931 में की थी।

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स्वदेश वेब डेस्क www.swadeshnews.in


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