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चुनाव सुधार पर केंद्र की दलील से असहमत सुप्रीम कोर्ट

चुनाव सुधार पर केंद्र की दलील से असहमत सुप्रीम कोर्ट

सजायाफ्ता भले ही चुनाव नहीं लड़े लेकिन पार्टी का गठन कर सकता है:केंद्र

निर्वाचन आयोग ने मांगा राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार

नई दिल्ली। दोषी व्यक्तियों को वोटर बनाने से रोकने और वोट देने से रोकने की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दोषी पाए जाने पर कोई व्यक्ति चुनाव भले ही नहीं लड़ सकता है लेकिन वह पार्टी का गठन कर सकता है। केंद्र की इस दलील पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जो व्यक्ति खुद चुनाव नहीं लड़ सकता है वो दूसरे को चुनाव जीतने के लिए कैसे खड़ा कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इस मामले पर दो हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। निर्वाचन आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर राजनीतिक पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार दिए जाने की मांग की है। अभी आयोग पार्टियों का रजिस्ट्रेशन तो करता है, लेकिन नियम तोड़ने वाली पार्टियों का रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार उसके पास नहीं है।


हलफनामे में निर्वाचन आयोग ने ये भी मांग की है कि कानून में बदलाव हो, ताकि पार्टियों में आंतरिक लोकतंत्र को सुनिश्चित करने के लिए वो गाइडलाइंस बना सके। निर्वाचन आयोग के मुताबिक वो इसके लिए 1998 से सरकार से अनुरोध कर रहा है लेकिन सरकार का रवैया सकारात्मक नहीं रहा है। याचिका बीजेपी नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दायर की है जिसमें कोर्ट द्वारा दोषी पाए गए व्यक्ति द्वारा राजनीतिक दल गठित करने से रोकने की मांग की गई है। याचिका में दोषी व्यक्तियों को वोटर बनाने से रोकने और वोट देने से रोकने की मांग की गई है । याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग को किसी पार्टी को पंजीकृत करने या पंजीयन रदद् करने का अधिकार होना चाहिए । याचिका में 1 नवंबर 2017 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया है जिसमें केंद्र को राजनेताओं पर आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए स्पेशल कोर्ट बनाने का निर्देश दिया गया था।


याचिका में एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) के आंकड़े का हवाला दिया गया है जिसके मुताबिक 2014 में 1581 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं । याचिका में कहा गया है कि अपराधी किस्म के लोगों ने राजनीतिक दल बना लिए हैं और वे लोगों के अधिकारों का हनन करते हैं । याचिका में लालू प्रसाद, ओमप्रकाश चौटाला, शशिकला, सुरेश कलमाडी जैसे कई नेताओं के नाम का जिक्र किया गया है जिनके खिलाफ कोर्ट में गंभीर आरोपों से संबंधित मामले चल रहे हैं।

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