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रोहिंग्या मुसलमानों का पक्ष क्यों?

वर्तमान में रोहिंग्या मुसलमानों के पक्ष में जिस प्रकार से वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है, वह एक प्रकार से बिना सोचे समझे उठाया गया कदम माना जा सकता है। वास्तव में सबसे बड़ी चिन्ता इस बात की है कि रोहिंग्या मुसलमानों को कोई देश अपने साथ रखने को तैयार क्यों नहीं हो रहा? इसका अध्ययन किया जाए तो सहज ही यह बात ध्यान में आती है कि इन लोगों की गतिविधियां संदिग्ध मानी जाती हैं। यह संदिग्धता क्यों और कैसे हुर्इं, इसका विचार करना आवश्यक है। यहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इनको शरणार्थी मानकर केवल भारत में ही शरण देने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। क्या भारत एक धर्मशाला है। आज भारत में रोहिंग्या मुसलमानों के पक्ष में भारत में स्वर उभर रहे हैं। कोई अपना राजनीतिक लाभ देख रहा है तो कोई मजहबी तौर पर उनको भारत में रखने की वकालत करता हुआ दिखाई दे रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जो लोग रोहिंग्या मुसलमानों का समर्थन कर रहे हैं, वह विश्व के अन्य देश से इनको संरक्षण दिए जाने की मांग क्यों नहीं कर रहे। इनके समर्थन में म्यांमार और बांग्लादेश से भी मांग की जा सकती है कि इन मुसलमानों को अपने यहां रखा जाए, लेकिन बांंग्लादेश एक मुस्लिम देश होने के बाद भी इनको रहने की अनुमति देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में यह कहा जा सकता है कि जब एक मुस्लिम देश इन पर विश्वास नहीं कर रहा, तब भारत के राजनीतिक दल और उनके मजहब को मानने वाले लोग उन पर विश्वास क्यों कर रहे हैं। बिना सोचे समझे बयान देना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने के समान है।

प्राय: यह तर्क दिया जा रहा है कि शरणार्थी को संरक्षण देना भारत की परंपरा का हिस्सा रहा है, लेकिन यह भी सच है कि शरणार्थी वास्तव में दया का पात्र होता है। सवाल यह भी है कि इनके प्रति अन्य देश दया भाव क्यों नहीं दिखा रहे। निश्चित रुप से इनकी छवि ठीक नहीं होगी, तभी तो कोई भी देश इनको रखने के पक्ष में नहीं है। तब भारत इनको क्यों रखे? वास्तव में इनको इनके मूल देश वापस भेजने की कार्यवाही की जाना चाहिए। राजनीतिक दलों को इनका समर्थन करने से पहले राष्ट्रीय भाव का भी विचार करना चाहिए। लेकिन वर्तमान में ऐसा लग रहा है कि रोहिंग्या मुसलमानों के बारे में बोलने वाले लोग राष्ट्रीय भाव का विचार नहीं कर रहे हैं। अगर वे राष्ट्रीय भाव का विचार करते तो संभवत: उनको कश्मीर से भगाए गए हिन्दुओं का दर्द भी दिखना चाहिए, लेकिन राजनेताओं को लम्बे समय बाद भी कश्मीर के हिन्दुओं का दर्द नहीं दिखता।

इस प्रकार के भेदभाव पूर्ण वातावरण के निर्माण में लगे हमारे कुछ राजनीतिक दल शायद इस बात को भूल गए हैं कि भारत सबका सम्मान तो करता है, लेकिन दुश्मन को आमंत्रित नहीं करता। भारत में दुश्मन अनाधिकृत रुप से घुसपैठ करके आते रहे हैं। यह सही है कि घुसपैठ हमेशा चोरी करने जैसा कृत्य है। एक अपराध है। इसलिए यह कहा जा सकता है कि रोहिंग्या मुसलमानों ने अवैध घुसपैठ करके भारतीय दृष्टिकोण से एक गंभीर अपराध किया है। इसलिए इनको शरणार्थी कहना भी न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। क्योंकि शरणार्थी तो वह होता है, जो अपने देश में रहकर परेशान होकर भारत आने की मांग करता। रोहिंग्या मुसलमानों ने भारत से ऐसी कोई मांग नहीं की, यह तो भारत में एक अपराधी की भांति घुसपैठ करके आए हैं। इसलिए राष्ट्रीय दृष्टिकोण से इनका अपराध राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में ही आता है। हम जानते हैं कि पाकिस्तान से प्रताड़ित होकर कई हिन्दू परिवार भारत में शरण लेने आए, वह भारत को अपना देश मानते हैं, इसलिए यह वास्तविक शरणार्थी की श्रेणी में आते हैं, ऐसे लोगों को शरण देना भी चाहिए, लेकिन जो घुसपैठ करके आए हैं, वह एक अपराध है। ऐसे लोगों को तत्काल ही देश से निकाल देना चाहिए। कहीं ऐसा न हो कि यह लोग भारत में ही कहीं खो जाएं और फिर इनकी तलाश करने में ही कठिनाई हो। भारत सरकार को तत्काल ही इनके विरोध में उचित कार्यवाही करना चाहिए। क्योंकि कहीं देर न हो जाए।

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