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अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरण चौदह सौ, लाभ मिला 74 को

अनुकंपा नियुक्ति के लंबित प्रकरण चौदह सौ, लाभ मिला 74 को

बिजली कम्पनी में अनुकंपा नियुक्ति के लिए चक्कर लगा-लगाकर थक चुके हैं मृत कर्मचारियों के परिजन
दिनेश शर्मा/ ग्वालियर|
मध्यप्रदेश की बिजली कम्पनियों में मृत कर्मचारियों के आश्रितों के लिए अनुकंपा नियुक्ति आसान नहीं है। इसका कारण यह है कि बिजली कम्पनियों ने संशोधित अनुकंपा नियुक्ति नीति 2013 में इतनी कठिन शर्तें जोड़ दी हैं, जिन्हें पूरा कर पाना हर किसी आश्रित के लिए आसान नहीं है। यही कारण है कि गुजरे पांच साल में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी के ग्वालियर रीजन में अब तक केवल 74 आश्रितों को ही अनुकंपा नियुक्ति नसीब हो पाई है, जबकि लगभग 1400 आश्रित अनुकंपा नियुक्ति के लिए निरंतर चक्कर लगा रहे हैं। इनमें से अधिकांश लोग थक-हारकर घर बैठ चुके हैं।

म.प्र. विद्युत मंडल की छह उत्तरवर्ती बिजली कम्पनियों में राज्य शासन ने अन्य विभागों से हटकर जो अनुकंपा नियुक्ति नीति 2013 लागू की है, उसके अनुसार 10.4.2012 से पूर्व और 15.11.2000 के पश्चात केवल उन कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता दी गई है, जिनकी मृत्यु सेवाकाल के दौरान किसी दुर्घटना में हुई है, जबकि 10.4.2012 के बाद सेवाकाल में मृत सभी कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने का प्रावधान किया गया है। इसमें भी वरीयता लाइन दुर्घटना मृत्यु के प्रकरणों में दी जा रही है। इसके अलावा अनुकंपा नियुक्ति के लिए जो शर्तें निर्धारित की गई हैं, वह आश्रितों की राह में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इनमें मुख्य रूप से मृत कर्मचारी के आश्रित की शैक्षणिक योग्यता तकनीकी पद के लिए हाईस्कूल एवं आईटीआई इलेक्ट्रीकल तथा गैर तकनीकी पद के लिए स्नातक व पीजीडीसीए होना जरूरी है। इसके अलावा परिवार का अन्य कोई व्यक्ति बिजली कम्पनी में सेवारत न हो तथा बिजली कम्पनी में सेवारत परिवार के किसी व्यक्ति को बर्खास्त न किया गया हो। यह शर्तें पूरी नहीं कर पाने के चलते अधिकांश मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अपात्र घोषित कर दिया गया है।

पांच साल से धरने पर बैठे हैं आश्रित
म.प्र. विद्युत मंडल अनुकंपा आश्रित दल के बैनर तले मृत विद्युत कर्मचारियों के आश्रित अन्य विभागों की तरह बिना शर्त अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर अपने परिजनों के साथ 11 मार्च 2013 से जबलपुर में शक्ति भवन के सामने निरंतर धरने पर बैठे हुए हैं। म.प्र. विद्युत मंडल अनुकंपा आश्रित दल के ग्वालियर व चम्बल संभाग अध्यक्ष विनीत चौबे ने बताया कि प्रदेश की छह बिजली कम्पनियों में अब तक लाइन दुर्घटना के मामलों में लगभग 1800 लोगों को ही अनुकंपा नियुक्ति दी गई है, जबकि वर्तमान में लगभग 5200 आश्रित अनुकंपा नियुक्ति के लिए संघर्षरत हैं। उन्होंने बताया कि आश्रित दल का प्रतिनिधि मंडल दो दिन पूर्व ही ऊर्जा मंत्री से भी मिला था, लेकिन उन्होंने कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया। उन्होंने बताया कि जब तक सरकार बिना शर्त सभी मृत कर्मचारियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग स्वीकार नहीं करती है, तब तक धरना प्रदर्शन चलता रहेगा।

विधानसभा में भी उठ चुका है मामला
म.प्र. विद्युत मंडल अनुकंपा आश्रित दल के बैनर तले जबलपुर में शक्ति भवन के सामने पिछले पांच साल से चल रहा धरने का मामला कांग्रेस विधायक रामनिवास रावत द्वारा विधानसभा में भी उठाया गया था, लेकिन सरकार द्वारा ऐसा कोई जवाब नहीं दिया गया, जो मृत कर्मचारियों के आश्रितों को राहत देता हो। इसके चलते कई आश्रित अनुकंपा नियुक्ति के लिए बिजली कम्पनी के अधिकारियों से लेकर मंत्रियों की चौखट तक चक्कर लगा-लगाकर इस कदर थक चुके हैं कि उन्होंने अब अनुकंपा नियुक्ति की आस ही छोड़ दी है।

अनुकंपा नियुक्ति के बदले थमाए एक लाख रुपए
मृत कर्मचारियों के जो पात्र आश्रित अनुकंपा नियुक्ति के लिए शर्तें पूरी नहीं कर पा रहे हैं या जिन पदों के लिए वे शर्तें पूरी कर पा रहे हैं और वह पद खाली नहीं है तो ऐसे आश्रितों के लिए अनुकंपा नियुक्ति सहायता के रूप में कर्मचारी की मृत्यु दिनांक से सेवानिवृत्त दिनांक तक या अधिकतम पांच वर्ष की कर्मचारी की अंतिम वेतन परिवार पेंशन में समायोजित कर भुगतान किए जाने का प्रावधान किया गया है। ऐसे आश्रितों को उनकी सहमति से अधिकतम एक लाश की राशि का चेक प्रदान कर प्रकरण निराकृत किए जा रहे हैं। ग्वालियर रीजन में अब तक ऐसे करीब 74 आश्रितों को एक-एक लाख के चेक प्रदान किए जा चुके हैं। सूत्रों के अनुसार कई आश्रितों ने असहमति व्यक्त करते हुए चेक लेने से इंकार भी कर दिया है और वे अनुकंपा नियुक्ति चाहते हैं।

सभी आश्रितों को बिना शर्त मिलना चाहिए अनुकंपा नियुक्ति
म.प्र. विद्युत कर्मचारी संघ फैडरेशन (इंटक) के क्षेत्रीय सचिव एल.के. दुबे का कहना है कि राज्य शासन जब सभी विभागों में 15.11.2000 से मृत सभी कर्मचारियों के आश्रितों को बिना शर्त अनुकंपा नियुक्ति दे रही है तो बिजली कम्पनियों में 15.11.2000 से 10.4.2012 तक केवल दुर्घटना के प्रकरणों में ही अनुकंपा नियुक्ति का प्रावधान क्यों किया गया है। इसके अलावा योग्यता सहित अन्य कई शर्तें भी जोड़ दी गई हैं, जबकि अनुकंपा नियुक्ति के लिए कोई शर्त नहीं होनी चाहिए। इसमें यदि शर्तें रखी जाएंगी तो फिर अनुकंपा का मतलब ही क्या रह जाता है। श्री दुबे ने कहा कि अन्य विभागों की तरह बिजली कम्पनियों को भी अन्य विभागों की तरह 15.11.2000 के बाद मृत अपने सभी कर्मचारियों को बिना शर्त अनुकंपा नियुक्ति देना चाहिए।

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